विज्ञान

(21/Sep/2017)

साइबर आतंक के साये में दुनिया

विजन कुमार पांडेय
 
साइबर सुरक्षा इन दिनों खूब चर्चाओं में है। इससे जुड़ी दो महत्वपूर्ण घटनाएं पिछले दिनों घटी-चीन के मिलिट्री हैकरों ने पश्चिमी देशों की सरकारों की कम्प्यूटर प्रणाली पर हमला बोला और अमेरिकी एयर फोर्स ने साइबर स्पेस कमान नाम के संगठन का गठन किया। इसे संयोग ही कहा जायेगा कि दोनों घटनाएं एक ही समय हुई, लेकिन इनसे इक्कीसवीं सदी में साइबर प्रणाली से जुडे खतरों की वास्तविकता और भयावहता का अनुमान लगाया जा सकता है। आज रोजमर्रा की कार्यप्रणाली में साइबर स्पेस का दायरा उत्तरोत्तर बढ़ता ही जा रहा है। सरकारें, प्रशासन, शिक्षा, संचार और सूचना के विस्तार में इसका बढ़-चढ़कर इस्तेमाल कर रही हैं। वहीं दूसरी ओर आंतकवादी समूह साइबर तकनीक का उपयोग अपने प्रचार, विभिन्न गुटों के साथ समन्वय तथा अर्थ प्रबंधन के लिए कर रहे है। साइबर तकनीक का इस तरह दुरुपयोग देखते हुए अब विशेषज्ञ भी खासे चिंतित हैं। आज कम्प्यूटर का उपयोग करने वाला हर व्यक्ति कम्प्यूटर वायरस के हमले के बारे में जानता है। जब यह खतरा बड़े पैमाने पर हो तो इसकी भयावहता और दुष्परिणाम के बारे में सहजता से समझा जा सकता है। यह सही है कि साइबर से जुड़ी अभी तक कोई बड़ी आतंकवादी घटनाएं प्रकाश में नहीं आई हैं, पर इसका यह मतलब कतई नहीं कि आने वाले दिनों में कोई बड़ी घटना नहीं होगी। 1998 में एक बारह वर्षीय बालक ने अमेरिका के अरिजोना स्थित थियोडोररूजवेल्टडैम की कम्प्यूटर प्रणाली को हैक कर उस पर अपना नियंत्रण स्थापित कर लिया। इस प्रणाली के जरिए बाढ़ नियंत्रण व बांध के गेट का संचालन किया जाता था। अब यदि वह हैकर चाहता तो कभी भी बांध के गेट खोल सकता था और इससे कितनी बड़ी आबादी तबाह हो सकती थी, उसका अनुमान आसानी से लगाया जा सकता है। आज इस बात की पुख्ता खुफिया खबरें हैं कि अलकायदा जैसे कई खतरनाक आतंकवादी संगठन साइबर स्पेस के जरिए दुनिया भर में आतंक फैलाने की फिराक में हैं। ऑन-लाइन से जुड़े आतंकवाद के खतरों को अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति बिल किं्लटन ने 1996 में ही भांप लिया था और उन्होंने तभी इस चुनौती से निबटने के लिए क्रिटिकल इन्फ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्यान कमीशन का गठन किया था। साइबर स्पेस में आतंकवाद की घुसपैठ का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भविष्य में होने वाले युद्धों और संघर्षों में यह एक भयावह वास्तविकता के रूप में उभरकर सामने आ सकता है। साइबर आतंकवादी नई संचार तकनीक के औजारों और तौर-तरीकों का इस्तेमाल करके नेटवर्क को तहस-नहस कर सकते हैं, हैकिग के साथ ही कम्प्यूटरों को बड़े पैमाने पर वायरस से संक्रमित कर सकते हैं, ऑनलाइन नेटवर्क सेवाओं को बाधित कर सकते है।

साइबर हमले से कितना सुरक्षित हमारा देश

अभी हाल ही में कई देश साइबर हमले के शिकार हुए हैं। दुनिया के सौ से ज्यादा देशों पर हुए साइबर हमले का भारत पर अब तक कोई खास असर तो नहीं हुआ है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कियह हमला वीकेंड के दौरान होने की वजह से इसका असर भारत में कम रहा। केवल आंध्र प्रदेश पुलिस विभाग पर इस साइबर हमले का असर होने का पता चला है। वैसे, यहाँ किसी भी समय ऐसे हमले हो सकते हैं। ऐसे किसी हमले की स्थिति में भारत के पास बचाव के ज्यादा संसाधन नहीं हैं। सरकार ने इस बारे में अलर्ट जारी कर दिया है। भारतीय रिजर्व बैंक ने भी एहतियात के तौर पर तमाम बैंकों को एटीएम के विंडोज सिस्टम और सॉफ्टवेयर अपडेट करने की सलाह दी है। इसी बीच, चीनी और पाकिस्तानी हैकरों ने सैन्य अधिकारियों के कम्प्यूटरों को हैक करने का नाकाम प्रयास किया था। सूचना तकनीक उद्योग के व्यापार संगठन कंपटीआईए (ब्वउचज्प्।) के क्षेत्रीय निदेशक का कहना था कि माइक्रोसॉफ्ट ने बीते मार्च में इस गड़बड़ी के दुरुस्त करने के लिए एक अपडेट जारी किया था। लेकिन कई सिस्टम संचालकों ने इस अपडेट को इंस्टॉल नहीं किया। आंध्र प्रदेश पुलिस विभाग माइक्रोसॉफ्ट ऑपरेटिंग सिस्टम के पुराने संस्करण का इस्तेमाल कर रहा था। यही वजह है कि वहां इस साइबर हमले का कुछ असर हुआ। इस बीच, चीनी और पाकिस्तानी हैकरों ने एक बार फिर भारतीय सैन्य अधिकारियों के कम्प्यूटरों को हैक करने का प्रयास किया। इसके तहत इन अधिकारियों को श्रीलंका में तैनाती की लुभावनी पेशकश वाले मेल भेजे गए थे। इससे पहले अप्रैल में भी ऐसा करने का प्रयास हुआ था। कुछ अधिकारियों ने ऐसे मेल खोल लिए थे। उसके बाद ही आर्मी साइबर ग्रुप ने तमाम अधिकारियों को ऐसा कोई मेल नहीं खोलने की सलाह दी गई। इन तमाम ई-मेल्स में आंकड़े चुराने वाले वायरस थे। फिलहाल आर्मी साइबर ग्रुप और (सीईआरटी-इन) इन हैकरों के ठिकाने का पता लगाने का प्रयास कर रहा है। हैकरों ने श्रीलंका में पोसिं्टग के ऑफर वाले यह मेल ऐसे समय भेजे थे जब भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी श्रीलंका के दो दिन के दौरे पर थे।

वायरस से कैसे बचें 

लेकिन क्या आम लोगों पर भी ऐसा हमला हो सकता है? क्या इस वायरस से निजी कम्प्यूटरों को भी निशाना बनाया जा सकता है। यह सबसे बड़ा सवाल है। लेकिन ऐसे हैकर बड़े संगठनों को ही निशाना बनाते है। इसकी वजह यह है कि उसके नेटवर्क के किसी एक कम्प्यूटर में यह वायरस घुसते ही तमाम कम्प्यूटरों को अपनी गिरफ्त में ले लेता है। इससे हैकरों और ब्लैकमेलरों को कम मेहनत में ज्यादा फायदा होता है। ऐसे में हमें क्या करना चाहिए। इसके लिए एंटीवायरस का ऑफ लाइन बैकअप रखना जरूरी है। इसके अलावा अंजान मेल या पोर्नसाइटों से भी सावधानी बरतनी चाहिए। इसलिए अभी से भारत को किसी संभावित हमले से बचाव का इंतजाम करने में जुट जाना चाहिए। आज रेलवे, एयरलाइंस, बैंक, स्टॉक मार्केट, हॉस्पिटल के अलावा सामान्य जनजीवन से जुड़ी हुई सभी सेवाएं कम्प्यूटर नेटवर्क के साथ जुडी हैं, इनमें से तो कई पूरी तरह से इंटरनेट पर ही आश्रित हैं, यदि इनके नेटवर्क के साथ छेड़-छाड़ की गयी, तो क्या परिणाम हो सकते हैं यह सभी को पता है।अब तो सैन्य-प्रतिष्ठानों का काम-काज और प्रशासन भी कम्प्यूटर नेटवर्क के साथ जुड़ चुका है। जाहिर है कि यह क्षेत्र भी साइबर आतंक से अछूता नहीं बचा है। 
 

आतंकवाद के साये में दुनिया 

साइबर स्पेस एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ बिना किसी खून-खराबे के किसी भी देश को आंतकित किया जा सकता है। साइबर के जरिए आसानी से आतंक फैलाया जा सकता है। किसी भी कम्प्यूटर से महत्वपूर्ण जानकारियाँ निकाली जा सकती है। इसका इस्तेमाल धमकी देने व सेवाओं को बाधित करने में किया जा सकता है। अभी सामान्य तौर पर साइबर अपराध के जो छोटे-मोटे अपराध सामने आते हैं, वह प्रायः युवा वर्ग द्वारा महज मजा लेने या खुराफात करने के होते हैं, लेकिन यदि इन्हीं तौर-तरीकों का उपयोग व्यापक पैमाने पर आतंकवादी समूह करने लगें तो भारी मुश्किलें खड़ी हो जायेंगी। इतना ही नहीं वे सरकारों व प्रतिष्ठानों के महत्वपूर्ण ई-मेल पर भी दखल दे सकते हैं। कोई कम्प्यूटर हैकर आंतकवादियों के साथ मिलकर साइबर से जुड़ी किसी भी खतरनाक घटना को अंजाम दे सकता है। आज आंतकवाद के इस खूनी खेल में पढे-लिखे लोग, आईटी और मेडिकल के होनहार युवक भी शामिल हैं। ऐसे में इनकी प्रतिभा का इस्तेमाल साइबर नेटवर्क को भेदने में सहजता से किया जा सकता है। अभी तो दुनिया भर के सभी सैन्य संगठन साइबर हमले से बचने के लिए एक सहज तरीका अपनाते हैं कि वे अपनी सूचनाओं को इंटरनेट के साथ नहीं जोड़ते। लेकिन यह व्यवस्था अभेद्य नहीं है। इसमें भी सेंध लगाया जा सकता है। आज के दौर में सेनाएं शांति काल व युद्ध के समय अपने अभियानों को अंजाम देने के लिए इंटरनेट पर पूरी तरह आश्रित हैं। आज साइबर आतंकवाद और उससे जुड़े अपराधों को गंभीरता से लेते हुए अमेरिका ने साइबर स्पेस कमान गठित करके नई सदी की इस चुनौती से निपटने के लिए कमर कस ली है। भारत जैसे राष्ट्र को भी अपनी सुरक्षा व्यवस्था को चाक-चौबंद करने के लिए ऐसे ही इंतजामों की जरूरत है। सौभाग्य से भारत में आईटी के ऐसे बहुत से विशेषज्ञ हैं, जिनकी सेवाएं साइबर आतंकवाद की चुनौती से निपटने के लिए ली जा सकती हैं। सरकार को चाहिए कि नागरिक और सैन्य क्षेत्र की सुरक्षा को देखते हुए वह ऐसी नीति व कार्ययोजना तैयार करे, जिससे समय रहते ही आईटी और साइबर से जुड़े अपराधों व आतंक की संभावनाओं से निपटा जा सके।

भारत का साइबर सुरक्षा तंत्र कमजोर

भारत में जिस तरह इंटरनेट का विस्तार हो रहा है, उसी तरह यहाँ साइबर लॉ की जरूरत भी महसूस की जाने लगी है। वास्तव में साइबर लॉ की जरूरत हर उस देश में महसूस की जा रही है जहाँ भी साइबर अपराध हो रहे हैं। ऐसे में ज्यादातर सभी विकासशील देशों जहाँ इंटरनेट अभी पूरी तरह से जड़ें जमा नहीं पाया है, वहाँ भी साइबरलॉ की जरुरत महसूस की जा रही है। साइबर अपराध को निपटाने और न्याय दिलाने के लिए इसके विशेषज्ञों की माँग लगातार बढ़ रही है। इसी जरुरत को ध्यान में रखते हुए साइबरलॉ से संबंधित पाठयक्रमों की शुरुआत अब ज्यादातर इंस्टीट्यूट में कर दी गई है। कहीं स्पेशलाइज्ड रूप में, तो कहीं एलएलबी के साथ इसकी पढ़ाई होती है।
आए दिन साइट हैकिंग से लेकर ऑनलाइन बैंकिंग फ्रॉड अथवा साइबर बुलिंग एवं साइबर स्टाकिंग की खबरें सुनने को मिलती रहती हैं। यही है साइबर क्राइम और इन कामों को अँजाम देता है कम्प्यूटर तकनीक के जरिए एक हाइटेक अपराधी। इसे रोकने के लिए जरुरत होती है साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट की। एक ऐसा साइबर एक्सपर्ट जो हाइटेक अपराधी की तरह सोच सकता हो और साथ ही में कानून की भाषा का ज्ञाता भी हो। ऐसे साइबर एक्सपर्ट्स की मदद से साइबर क्राइम की रोकथाम की जा सकती है और साथ ही में आवश्यकता पड़ने पर पीड़ित को परामर्श देने का कार्य भी करता है। यहाँ सवाल यह उठता है कि आखिर में ‘साइबर क्राइम’ है क्या? सरल शब्दों में हम कह सकते हैं कि साइबर अपराध गैरकानूनी कृत्य हैं जिसमें कम्प्यूटर एक उपकरण का काम करता है। साइबर अपराध पारंपारिक प्रति के होते हैं जैसे चोरी, धोखाधड़ी, जालसाजी, मानहानि और शरारत, जो भारतीय दंड संहिता के अधीन हैं। कम्प्यूटर के दुरुपयोग ने भी आपराधिक गतिविधियों में समाविष्ट होकर नवयुगीन अपराधों के एक स्वर को जन्म दिया है जिन्हें सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 एवं तत्पश्चात सूचना प्रोद्यौगिकी संशोधन 2008 द्वारा संबोधित किया जा रहा है।दुनिया में साइबर स्पेस का अपना कानून है, जिसका उपयोग इंटरनेट के माध्यम से होने वाले अपराधों से निपटने के लिए किया जाता है। मशहूर कम्प्यूटर सुरक्षा विशेषज्ञों, साइबर आतंकवाद गुरुओं और विशेषज्ञों का भी मानना है कि निकट भविष्य में साइबर लॉ विशेषज्ञों की बड़ी संख्या में भारत में जरूरत होगी। ऐसे में इस क्षेत्र में कोर्स करने वालों को सामने विश्व के सामने अपने काम के जरिए अपनी चमक बिखेरने का मौका होगा और वह भी लुभावनी सैलरी पर। साइबर विशेषज्ञ किसी संस्थान से जुड़कर या फिर स्वतंत्र रूप से सलाहकार के रूप में काम करके भी कमाई कर सकते हैं जो कि एक अतिरिक्त कमाई का उत्तम जरिया बनेगा।

कैसे बचें साइबर क्राइम से 

वैसे तो इन दिनों भारत के आई.टी.विशेषज्ञों का डंका पूरी दुनिया में बज रहा है। लेकिन साइबर क्राइम से निपटने के जो भी प्रयास अब तक यहाँ हुए हैं, उन्हें पर्याप्त नहीं कहा जा सकता। आने वाले दिनों में जैसे-जैसे कम्प्यूटर, मोबाइल फोन और स्मार्टफोन पर हमारी निर्भरता और बढ़ती जाएगी, वैसे-वैसे इस तरह के क्राइम बढ़ने की आशंका भी बढ़ती जाएगी। ऐसे में उन एक्सपर्ट्स की आवश्यकता होगी जो इस नए तरह के अपराध से निपटने में माहिर हों। दरअसल, सामान्य कानून और पुलिस इस तरह के अपराधों से निपटने में सक्षम नहीं है। ऐसी स्थिति में साइबर क्राइम से निपटने वाले माहिर खिलाड़ी वहीं होंगे, जो साइबर लॉ के विशेषज्ञ हों और साइबर क्रिमिनल्स की हाइटेक तकनीक को भी आसानी से भेदना जानते हों। इसलिए मानना पड़ेगा कि आने वाले दिनों में साइबरलॉ कोर्स किए हुए कैंडिडेट्स के लिए जॉब के अनगिनत अवसर पैदा होंगे।
साइबर लॉ विशेषज्ञों के अनुसार, साइबरलॉ करियर के लिहाज से आज एक बढ़िया विकल्प है। साइबरलॉ भविष्य में उज्जवल करियर विकल्प साबित हो सकता है। इसलिए लॉ, टेक्नॉलॉजी मैनेजमेंट, अकाउंट आदि क्षेत्रों से जुड़े छात्र या पेशेवर व्यक्ति भी यह कोर्स कर सकते हैं। यह क्षेत्र उनके लिए विशेष रूप से उपयोगी है, जिन्होंने पहले से लॉ कोर्स किया है। उन्हें लॉ के बेसिक्स नहीं पढ़ने होंगे, केवल साइबर क्राइम और इससे निपटने के तरीके सीखने होंगे।

साइबर क्राइम अनजाने में भी 

हर व्यक्ति जो नेट प्रयोग करता है वह कोई न कोई साइबर क्राइम जरूर अनजाने में कर जाता है। लेकिन उसे पता नहीं चलता। वह व्यक्ति अगर कानूनी नहीं तो नैतिक अपराध तो करते ही है। इनमें से ज्यादातर लोगो को तो इसका अंदाजा तक नहीं होता। वे कहीं से भी कोई चित्र, लेख या विडियो कॉपी-पेस्ट करते समय जरा भी नहीं झिझकते। इंटरनेट पर ऐसे तमाम काम हैं, जो साइबर क्राइम के तहत आते हैं। दूसरे की सामग्री कॉपी-पेस्ट करना अपराध है। दरअसल हर क्रिएटिव चीज बनाने वाले के पास एक खास हक होता है जो उसकी सामग्री को गैरकानूनी ढंग से नकल किए जाने के खिलाफ सुरक्षा देता है। इसे कॉपीराइट कहते हैं। कोई भी व्यक्ति आपकी इजाजत के बिना आपकी रचना की कॉपी नहीं कर सकता और न ही उसे दूसरों को दे सकता है। ऐसा करना कॉपीराइट कानून का उल्लंघन है और आप उसके खिलाफ अदालत जा सकते हैं। कॉपीराइट लेने की एक कानूनी प्रक्रिया होती है, लेकिन अगर ऐसा नहीं भी करते, तो भी अपनी रचना पर आपका ही हक है। शायद आपको पता न हो अगर कोई शख्स अपनी रचना को लेकर ज्यादा ही गंभीर हो, तो यह छोटी सी चोरी आपको भारी पड़ सकती है।

गूगल केवल एक सर्च इंजन 

दरअसल जिस गूगल के जरिये आपने वह लेख ढूंढा है, उसी के जरिये आपकी चोरी भी पकड़ी जा सकती है। दरअसल गूगल एक सर्च इंजन भर है, वह फ्रीडाउन लोड साइट नहीं है। इसीलिए वह किसी भी पिक्चर के साथ उस वेब पेज को भी दिखाता है, जहाँ से उसे ढूंढा गया है। ऐसा करके वह पिक्चर चुराए जाने के मामले में किसी भी तरह की जिम्मेदारी से आजाद हो जाता है।अगर आपको गूगल इमेज सर्च पर मौजूद कोई फोटो इस्तेमाल करना है, तो नियमतः उस वेब पेज के संचालक से इजाजत लेनी चाहिए। इसी तरह अगर आप किसी और का फोटो बिना उसके लिखित मंजूरी के अपने फेसबुक प्रोफाइल पर पोस्ट करते हैं तो वह भी साइबर क्राइम ही है। इससे आप बच नहीं सकते।
कुछ लोग अपने दोस्तों और साथियों के ईमेल अकाउंट, फेसबुक वगैरह का पासवर्ड ढूंढने की कोशिश करते हैं और कभी-कभी सफल भी हो जाते हैं। हो सकता है, आप महज मौज-मस्ती या मजाक के लिए ऐसा कर रहे हों लेकिन अगर आप किसी का पासवर्ड हासिल करने के बाद उसके खाते में लॉग-इन करते हैं तो आप साइबर क्राइम कर रहे हैं। इसी तरह अगर कोई अपराधी आपके इंटरनेट कनेक्शन का इस्तेमाल करते हुए साइबर क्राइम करता है तो पुलिस उसे भले ही न ढूंढ पाए लेकिन आप तक वह जरूर पहुंच जाएगी और नतीजे भुगतने होंगे आपको। आप अगर वाई-फाई इंटरनेट कनेक्शन इस्तेमाल करते हैं तो उसे पासवर्ड प्रोटेक्ट करना और एनक्रिप्शन का इस्तेमाल करना न भूलें। अगर आप जाने या अनजाने अपने इंटरनेट कनेक्शन के जरिये चाइल्ड पॉर्नोग्राफी देखते हैं तो यह भी साइबर क्राइम है। यदि आपने ऐसी किसी सामग्री को अपने किसी दोस्त को फॉरवर्ड कर दिया तो जान लें आप एक और साइबर क्राइम कर चुके हैं। दरअसल 18 साल से कम उम्र वालों से संबंधित अश्लील सामग्री देखना और इंटरनेट से इसे भेजना साइबर क्राइम है।इन्हें न खुद देखें, न किसी को फॉरवर्ड करें। अगर आपके कम्प्यूटर पर किसी वायरस या स्पाईवेयर ने कब्जा जमा लिया है और वह जोम्बी में तब्दील हो गया है तो समझिए, आप अपने कम्प्यूटर और डेटा की असुरक्षा के साथ-साथ साइबर क्राइम में भी फंस सकते हैं। ऐसी भी संभावना है कि आप किसी परोक्ष साइबर क्राइम में हिस्सेदार बन रहे हों। इसलिए कम्प्यूटर में अच्छा एंटीवायरस, एंटीस्पाईवेयर और फायरवॉल जरूर लगवाएं। ये सिर्फ आपकी साइबर सुरक्षा के लिहाज से ही जरूरी नहीं है बल्कि इसलिए भी है कि कहीं आप अनजाने में कोई साइबर अपराध न कर बैठें।

लोगो के चक्कर में न फंसे 

अगर आपको अच्छा सा लोगो दिखाई दिया और आपने उसे कॉपी कर इस्तेमाल कर लिया या किसी डिजाइनर की सेवा ली जिसने झटपट इंटरनेट से किसी कंपनी का अच्छा सा लोगो इस्तेमाल कर आपका विजिटिंग कार्ड, ब्रोशर और लेटरहेड तैयार कर दिया। ऐसा करके आपने न सिर्फ कॉपीराइट का उल्लंघन किया है बल्कि ऑनलाइन ट्रेडमार्क के उल्लंघन मामले में भी आपको दोषी करार दिया जा सकता है। कुछ वायरस और स्पाईवेयर न सिर्फ आपके कम्प्यूटर के डेटा और निजी सूचनाएं चुराकर अपने संचालकों तक भेजते हैं बल्कि आपके संपर्क में मौजूद दूसरे लोगों तक अपनी प्रतियाँ पहुँचा देते हैं। कभी इंटरनेट के जरिये, कभी ईमेल के जरिये तो कभी लोकल नेटवर्क के जरिये। जिन लोगों के कम्प्यूटर में आपके जरिये वायरस या स्पाईवेयर पहुँचा और कोई बड़ा नुकसान हो गया, उनकी नज़र में दोषी कौन होगा? आप होगें दोषी। ऐसे मामलों में आप अपनी कानूनी और नैतिक जिम्मेदारी से बच नहीं सकते। इसलिए नेट के रास्ते पर बच के चलिए।
 
vineeta_niscom@yahoo.com