पत्र प्रक्रिया


‘इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए’ अंक दिसंबर, 2017 प्राप्त हुआ। विज्ञानवार्ता के अंतर्गत ‘जीवन के हर पहलू से जुड़ा है विज्ञान’ तथा विजन कुमार पाण्डेय का आलेख ‘नोबेल और भारतीय प्रतिभाएं’ संग्रहणीय है। इस पत्रिका में प्रकाशित प्रत्येक आलेख मानव जीवन को एक नया वैज्ञानिक दृष्टिकोण देता है। ‘विज्ञान इस माह’ स्तंभ भी प्रशंसनीय है। पत्रिका का संपादकीय कौशल किसी भी वैज्ञानिक संस्थान की पत्रिका के संपादक के लिए अनुकरणीय है। ‘इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए’ का संपादकीय कौशल मेरे लिए सदैव पथ-प्रदर्शक रहा है। पूर्ण विश्वास है कि यह पत्रिका इसी प्रकार अन्य पत्रिकाओं के संपादकों का मार्ग प्रशस्त करती रहेगी।

डॉ.राजनारायण अवस्थी, हैदराबाद

आपके द्वारा प्रकाशित पत्रिका को पढ़कर मैं यह निश्चित रूप से कह सकता हूँ कि ‘इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए’ विज्ञान पत्रिका के रूप में एक ऐसा स्थान बना चुकी है जहाँ आने वाले समय में अन्य कोई पत्रिका पहुँच न सकेगी, क्योंकि जिस तरह किताबें ई-वर्जन में आ रही है, प्रिंट स्वरूप का अस्तित्व खतरे में है। हम सब आज एक वर्चुअल वर्ल्ड में जी रहे हैं, यह कहना-समझना कितना दिलचस्प है कि हमारे साघन-साध्य और ‘टूल्स’ भी वर्चुअल हो रहे हैं। ऐसे समय में आईसेक्ट लिमिटेड की ओर से सिद्धार्थ चतुर्वेदी द्वारा पत्रिका प्रकाशन का एक ठोस कदम उठाना ऐतिहासिक ही है। इस पत्रिका के पक्ष में मैं इतना ही कहूँगा कि अन्य विज्ञान पत्रिकाओं की तुलना में यह अधिक पठनीय, रोचक और संग्रहणीय है। सबसे बड़ी बात यह है कि हिन्दी में निकलने वाली यह पत्रिका ‘अपनी’ ही पत्रिका लगती है जबकि अन्य पत्रिकाएँ अंग्रेजी पत्रिकाओं की डमी लगती हैं। अन्य पत्रिकाओं से इसकी तुलना करने का मेरा कोई प्रयोजन नहीं है, इसका स्वतंत्र रूप में उल्लेख होना चाहिए।
दिसम्बर अंक में डॉ.बी.के.त्यागी का इंटरव्यू ‘जीवन के हर पहलू से जुड़ा है विज्ञान’ एक अच्छी चर्चा है। जब कोई वैज्ञानिक विषय विशेष पर बयान देता है तब वह अपने कर्तव्य का निर्वहन ही कर रहा होता है, उन्हें बधाई और धन्यवाद। इस अंक में स्वाति तिवारी, राग तेलंग, अरविंद दुबे और इरफान ह्यूमन की प्रशंसा करनी होगी कि उनकी भाषा में एक रवानगी है। जीवन के अलग-अलग पहलू और विषयों पर वे वैज्ञानिक ढंग से अपनी तार्किर्क बात कह सके हैं। संजय गोस्वामी का कॉलम ‘कॅरियर’ हमेशा की तरह उपयोगी है।

अखिलेश सोनी, सीहोर

‘इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए’ का जनवरी अंक पढ़ा। आवरण पृष्ठ प्रभावित करता है। इसमें विलुप्त हो रही जीव-जातियों की चिंता है। वर्ष के आरंभ से ही आपने यह चिंता दर्ज करायी है तो सहज ही पूरी जिम्मेदारी से कहा जा सकता है कि पत्रिका अपने दायित्व को निभा रही है। देवेन्द्र मेवाड़ी एक वरिष्ठ विज्ञान लेखक हैं, उनका लिखा किसी भी क्लासिक श्रेणी से कम नहीं। बच्चों के लिए उनके द्वारा किए जा रहे काम बहुत ही महत्वपूर्ण हैं। प्रो। हुकुमसिंह का मनीष मोहन गोरे ने बहुत उम्दा इंटरव्यू लिया है। साक्षात्कार किसी भी पत्रिका को चर्चा में लाने के लिए एक अमोघ जरिया है, लेकिन सिर्फ चर्चा ही नहीं आप इसका उपयोग विज्ञान संचार के लिए कर रहे हैं। एक और सम-सामयिक स्तंभ आपने शुरू किया है वह है, स्वाति तिवारी का दैनिक विज्ञान। इस हेतु आपको बधाई। इधर विज्ञान पर केन्द्रित एक कविता वायरल हुई है जो कि समग्र विज्ञान के इतिहास पर केंद्रित है, मुझे लगता है आपकी पत्रिका ऐसे ही समग्रता में कार्य कर रही है। इसलिए इस कविता को पाठकों के लिए प्रेषित कर रहा हूँ। विज्ञान के इतने सारे संस्तर हैं कि उन्हें एक पत्र में समेटना संभव नहीं है और ना ही पत्रिका के एक अंक में। आप पिछले तीस वर्षों से इस पत्रिका का संपादन-प्रकाशन कर रहे हैं, यह एक महत्वपूर्ण, उल्लेखनीय और प्रशंसनीय कार्य है। आपका साधुवाद।

मनीष पारासर, भोपाल


इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए का जनवरी अंक प्राप्त हुआ। आभार। यह अंक मुझे कई मायनों में विशिष्ट लगा और मैं इसे उल्लेखनीय मानता हूँ कि आपने सारी सामग्री का संयोजन कुशलता से किया है। संपादक मंडल को मेरी बधाई।
    गणित के विद्वान प्रो.हुकुमसिंह से डॉ.मनीष मोहन गोरे की वार्ता ने हमें कई मायनों में संपन्न किया। गणित का अध्ययन हमें सत्य और शुद्धता की प्रेरणा देता है, मेरी इस उक्ति से पूर्ण सहमति है। गणित और विज्ञान जैसे गूढ़ विषयों से उनकी आत्मा की भाषा तक आपकी दृष्टि पहुँचती है और हम इलेक्ट्रॉनिकी पत्रिका के कायल हो जाते हैं। बरमूडा त्रिभुज लेख, विज्ञान कथा हिमीभूत इस अंक की उपलब्धि है। प्रमोद दीक्षित जी का आलेख विज्ञान की कक्षा में एक दिन, कैसिनी मिशन का अंत, जहरीली हवा में अटकती सांसें दिलचस्प आलेख लगे।
आपकी पत्रिका अंतरिक्ष ब्रह्मांड और पर्यावरण जैसे मुद्दों पर अक्सर फोकस करती है। यह देश की अकेली ऐसी हिन्दी की विज्ञान पत्रिका है जो जटिल से जटिल विषयों को सरलीकृत ढंग से पेश करती है और वैज्ञानिक सोच और नजरिए के निर्माण का काम करती है। यह कार्य करना आज के समय में चुनौती भरा है और आप लोग यह कार्य कर रहे हैं। इस हेतु मेरा विनम्र साधुवाद।

विनीत शर्मा, भोपाल

‘इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए’ के पिछले अंक में दिनेश मणि का लेख ‘पर्यावरण हितैषी हरित रसायन विज्ञान’ बहुत उम्दा लेख है। यह भारत के प्राकृतिक संसाधनों के दोहन के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए जैविक खेती की ओर संकेत करता है। रसायन से होने वाले लाभ और नुकसान की ओर इशारा करते हुए रासायनिक संरचना क्रिया और कार्यप्रणाली पर दिनेश मणि ने एक अच्छा लेख लिखा है। कालीशंकर का लेख टेक्नीकल होते हुए भी बहुत उपयोगी है। डॉ। रुचि बागड़देव संभवतः इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए में पहली बार प्रकाशित हुई है। इसके पहले मैंने इनका कोई लेख नहीं पढ़ा था लेकिन पहली बार पढ़कर ही मैं उनके वैज्ञानिक दृष्टिकोण से प्रभावित हुआ हूँ

राम लालवानी, शहडोल