विज्ञान

(27/Apr/2019)

महासागर का कचराघर

द ग्रेट पेसिफिक गारबेज पैच

डॉ. शुभ्रता मिश्रा

पृथ्वी के लगभग तीन.चौथाई भाग में विस्तारित प्रशांतए अटलांटिकए हिंदए आर्कटिक और दक्षिणी महासागर वे पाँच महासागर हैंए जिनके आधार पर जलवायु और मौसम प्रणालियां संचालित होती हैं। ये ही वे जलस्त्रोत हैंए जो वैश्विक कार्बन उत्सर्जन के अवशोषण द्वारा जलवायु परिवर्तन के प्रतिरोधक का काम भी करते हैं। भौगोलिक उत्तरदायित्वों का करोड़ों वर्षों से सतत् निर्वहन करते आ रहे महासागर मानव स्वार्थ और उसकी अनुत्तरदायी प्रवृत्ति के कारण प्रदूषण का गम्भीर शिकार हो गए हैं। आज हाल यह है कि महासागरों में प्रदूषण को अवशोषित कर पाने की क्षमता भी पूर्णता के कगार पर है। कई रिपोर्टों के मिले जुले परिणामों से स्पष्ट होता है कि पिछली दो शताब्दियों में भूमि पर उत्पन्न सभी तरह का लगभग 525 अरब टन कचरा महासागरों में समा चुका है। इसके अलावा मानवीय गतिविधियों के कारण उत्सर्जित कार्बन का औसतन आधा भाग भी महासागरों ने स्वयं में समाहित कर लिया है। सार रूप में कहा जाए तो शताब्दियों से धरती का कचराए कॉर्बन डाईऑक्साइड और अपशिष्ट पदार्थ को समेटते समेटते दुनिया के महासागरों में कई सारे कचराघर बन गए हैं। 
इन समुद्री कचराघरों में भरे कचरे का फैलना बहुत कुछ महासागरीय जल के उस बहाव पर निर्भर करता हैए जिसे समुद्रविज्ञान की भाषा में महासागरीय जल घूर्णन चक्र अथवा ज़ायर ;हलतमद्ध कहते हैं। जायर से तात्पर्य किसी सागरीय या महासागरीय क्षेत्र में घूर्णन करने वालेए अर्थात् किसी क्षेत्र विशेष में घूमने वाले जल प्रवाह से होता है। जायरों में जल एक ही बड़े क्षेत्र में गोल.गोल घूमता रहता है और साथ में इनमें भारी वायु प्रवाह भी चलता है। जायर मूलतः भौतिक विज्ञान के कॉरिऑलिस प्रभाव और फेरेल के नियम पर काम करते हैं। प्रायः महासागरीय जायर पृथ्वी के घूर्णन से होने वाले कॉरिऑलिस प्रभाव के कारण जल व वायु दोनों में भ्रमिलता ;टवतजपबपजलद्ध से पैदा हुए घूर्णन के कारण बनते हैं। वहीं फेरेल के नियम के अनुसार पृथ्वी पर मुख्य रूप से चलने वाली सभी हवाएं पृथ्वी की गति के कारण उत्तरी गोलार्द्ध में दाहिनी ओर तथा दक्षिणी गोलार्द्ध में बायीं ओर मुड़ जाती हैं। पाँचों महासागरों में अनेकानेक जायर होते हैंए जिनके बहाव और घूर्णन की दिशा भौगोलिक परिथितियों के अनुसार अलग.अलग होती है। पृथ्वी के पाँच प्रमुख उल्लेखनीय महासागरीय जायरों में हिन्द महासागर जायर ;प्दकपंद व्बमंद ळलतमद्धए उत्तर अटलांटिक जायर ;छवतजी ।जसंदजपब ळलतमद्धए  दक्षिण अटलांटिक जायर ;ैवनजी ।जसंदजपब ळलतमद्धए उत्तर प्रशांत जायर ;छवतजी च्ंबपपिब ळलतमद्ध और दक्षिण प्रशांत जायर ;ैवनजी च्ंबपपिब ळलतमद्ध शामिल हैं। महासागरों में पहुँच रहा कचरा किसी गतिशील वस्तु की भांति काम करते हुए इन महासागरीय जायरों जैसे घूर्णी निर्देश तंत्र में विक्षेपित होता रहता है। और इस तरह दुनिया के सभी महासागर में छोटे बड़े कचराघर बन गए हैं। इनमें प्रशांत महासागर में बना द ग्रेट पेसिफिक गारबेज पैच पिछले कई सालों से सुर्खियों में रहा है। 
प्रशांत महासागर दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे गहरा महासागर है। एक ओर प्रशांत महासागर के पास पृथ्वी के आधे से अधिक मुक्त जल के स्वामी होने का गौरव हैए वहीं दूसरी ओर दुर्भाग्यवश इसमें धरती का सबसे अधिक कचरा रखने क कलंक भी लग गया है। यह कचरा प्रशांत महासागर में समान रूप से नहीं फैला है। प्रशांत महासागर मेंए वास्तव में कुछ श्पैसिफिक कचरा पैचश् अलग.अलग आकारों के साथ.साथ अनेक स्थानों पर भी हैंए जहाँ समुद्री मलबा जमा होता जाता है। इनमें से ही द ग्रेट पेसिफिक गारबेज पैच वर्तमान में प्रशांत महासागर में विशाल कचराघर के तौर पर दुनिया की सबसे बड़ी डंपिंग साइट की तरह उपयोग किया जा रहा है। इसमें लगातार कचरा बढ़ता ही जा रहा है। लगभग 600,000 वर्ग मील क्षेत्रफल में बने द ग्रेट पेसिफिक गारबेज पैच का आकार अब फ्रांसए जर्मनी और स्पेन के संयुक्त क्षेत्रफल से भी बड़ा हो गया है और यह लगातार बढ़ रहा है। एक अनुमान के अनुसार इसमें लगभग 80,000 मीट्रिक टन वजन वाले प्लास्टिक के करीब 1ण्8 खरब टुकड़े मौजूद हैं। 
अधिकांशतया जिस श्ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैचश् की चर्चा होती हैए वह पूर्वी प्रशांत कचरा पैच है। यह उत्तरी प्रशांत उपोष्ण कटिबंधीय उच्च के नाम से प्रचलित एक वायुमंडलीय क्षेत्र में हवाई और कैलिफोर्निया के बीच लगातार घूर्णन कर रहे और परिवर्तित हो रहे जलक्षेत्र में स्थित है। सीधे शब्दों में कहेंए तो यह श्ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैचश् कचराघर अमेरिका के पश्चिमी तट और एशिया के मध्य उत्तरी प्रशांत महासागर के बीचोंबीच घूमता हुआ प्लास्टिक का एक विशाल पिण्ड है। मोटे तौर पर यह 135 से 155 डिग्री पश्चिम और 35 से 42 डिग्री उत्तर के बीच के क्षेत्र में स्थित है। इसे श्ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैचश्ए श्द पेसिफिक ट्रैश जायरश् और श्पैसिफिक ट्रैश वोरटेक्सश् भी कहा जाता है।
मौसम वैज्ञानिकों और भूवैज्ञानिकों का मानना है कि उत्तर प्रशांत उच्च क्षेत्र में हवा विशेष रूप से समुद्र की सतह से नीचे जाते हुए जब जलमग्न होने लगती हैए तब इससे वहां वायुमंडलीय दबाव उच्च और तापमान शुष्क गर्म हो जाता है। ऐसा होने से वहाँ आमतौर पर मौसम ठीक रहता हैए लेकिन उच्च दबाव वाला यह क्षेत्र अर्ध.स्थायी स्थिति में बना रहता हैए जो समुद्र के नीचे की गति को प्रभावित करता है। उच्च दबाव वाली हवाएँ अपेक्षाकृत हल्की होती हैं और उत्तरी गोलार्ध में खुले समुद्र के ऊपर दक्षिणावर्त बहती हैं। इसके परिणाम स्वरूप समुद्रों और महासागर में तैरने वाले प्लास्टिक और अन्य मलबे उत्तरी प्रशांत उच्च के शांत आंतरिक क्षेत्र में बह जाते हैंए जहाँ मलबा महासागरीय और वायुमंडलीय बलों के कारण फँस जाता है और आसपास के जल की तुलना में उसकी सांद्रता उच्च हो जाती है। इस क्षेत्र को एक महासागरीय रेगिस्तान की संज्ञा दी जा सकती हैए जो छोटे छोटे पादपप्लवकों से भरा हैए साथ ही बहुत कम संख्या में कुछ बड़ी मछलियाँ या स्तनपायी भी हैं। बड़ी मछलियों और शीतल हवा की कमी के कारणए मछुआरे और नाविक शायद ही कभी जायर से होकर समुद्रीयात्रा करते हैं। धीरे धीरे महासागर में मिलने वाले ऐसे उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र को श्कचरा पैचश् नाम दे दिया गया है। हालांकि संबंधित संचयित समुद्री मलबे में उपस्थित सटीक सामग्रीए क्षेत्र का आकार और स्थिति अभी भी निर्धारित कर पाना वैज्ञानिकों के लिए कठिन बना हुआ है।
प्रशांत महासागर के दूसरी तरफ भी जापान के दक्षिण.पूर्वी तट पर एक और तथाकथित श्कचरा पैचएश् या समुद्री मलबे का क्षेत्र बन गया है। कहा जाता है कि वर्ष 2011 में आई सूनामी के मलबे के बहने से इसका निमाण हुआ था। हालांकि इसके बारे में काफी कम जानकारी है और इस पर अध्ययन भी कम हुए हैं। इसे पश्चिमी प्रशांत कचरा पैच नाम दिया गया है। समुद्री शोधकर्ताओं का मानना है कि कुरोशियो एक्सटेंशन नामक महासागरीय धारा के दक्षिण.पूर्व में मिलने वाला यह कचरा पैच वास्तव में एक छोटे पुनःपरिसंचरण दक्षिणावर्ती घूर्णित जल वाला जायर क्षेत्र हैए जो एक समुद्री भँवर के जैसा है।
देखा जाए तो वैज्ञानिकों ने 1980 के दशक के उत्तरार्ध से ही दुनिया के महासागरों में प्लास्टिक और अन्य मलबे की बढ़ती समस्या के बारे में अपनी चिंता प्रकट करना शुरु कर दिया था। परंतु ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैच की तरफ दुनिया का ध्यान आकर्षित करवाने का श्रेय केप्टन चार्ल्स मूर को जाता है। केप्टन चार्ल्स मूर विश्व के जानेमाने अमेरिकी समुद्र विज्ञानी और सेलबोट रेसिंग के कप्तान हैं। पहली बार वर्ष 1997 में ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैच की खोज केप्टन मूर ने ही की थी। यह बात उस समय की है जब 1997 की गर्मियों में द्विवार्षिक ट्रांसपेसिफिक रेस में भाग लेने के बाद केप्टन चार्ल्स मूर अपने घर कैलिफोर्निया जाने के लिए जहाज पर हवाई से रवाना हुए। उन्होंने उत्तरी प्रशांत उपोष्णकटिबंधीय जायर से होकर जाने वाला एक शॉर्टकट रास्ता चुनाए सामान्य तौर पर उस रास्ते पर कोई जहाज नहीं जाते थे। उस रास्ते पर केप्टन चार्ल्स मूर ने महसूस किया कि उनका जहाज समुद्र पर से नहीं बल्कि प्लास्टिक के बने किसी सूप पर तैरते हुए गुज़र रहा है। उस दौरान जहाज में बैठे सभी लोगों को ठोकरों जैसे झटके लगने का अनुभव भी हुआ। तब मूर ने समुद्र विज्ञानी कर्टिस एबेसेमेयर को इस बारे में पूरी जानकारी दी। कर्टिस की गिनती उन जाने माने समुद्र वैज्ञानिकों में आती हैए जो महासागरीय धाराओं के विशेषज्ञ हैं और रबर डक बाथ खिलौने और टेनिस जूतों जैसी छोटी छोटी वस्तुओं से लेकर बड़े.बड़े कारगो सामानों के समुद्र में खो जाने की गतिविधियों को भली भांति भांप लेते हैं। केप्टन मूर द्वारा प्रशांत महासागर रास्ते में मिले प्लास्टिक मलबे की बात को गम्भीरता से लेते हुए कर्टिस एबेसेमेयर ने गहन अध्ययन के बाद उस प्रशांत महासागरीय क्षेत्र को श्पूर्वी कचरा पैच ईजीपी घोषित किया। कैप्टन चार्ल्स मूर ने पाया कि जब वे 1998 में ठीक एक साल के बाद फिर उस स्थान से गुजरे तो समुद्री जल में मलबे का घनत्व और विस्तार दोनों बढ़ चुके थे।
ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैचश् की खोज ने कैप्टन चार्ल्स मूर को महासागरीय प्रदूषण से दुनिया को मुक्त करने का एक जीवन ध्येय दे दिया। मूर ने ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैच के बारे में पूरी दुनिया को अवगत कराने के लिए जगह.जगह विभिन्न संस्थानोंए विश्वविद्यालयों और सार्वजनिक स्थलों पर भाषण देने और साथ ही संबंधित कई लेख भी लिखने शुरू किए। उनके 2003 में नैचरल हिस्ट्री नामक पत्रिका में प्रकाशित हुए एक लेख ने तो तहलका मचा दिया था। इस लेख से प्रभावित होकर स्वयं कैप्टन मूर ने कैलिफोर्निया के समुद्रतटीय जल की गुणवत्ता में सुधार के लिए वर्ष 1994 में अपने द्वारा स्थापित अल्गालिता रिसर्च फाउंडेशन नामक संगठन का मिशन ही बदल दिया। इसके बाद से यह रिसर्च फाउण्डेशन लगातार महासागरों में विशेष रूप से ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैच में प्लास्टिक की समस्या के अध्ययन और प्रचार कर रहा है। इसी तरह लॉस एंजिल्स टाइम्स में गारबेज पैच के बारे में 2006 की लेखों की एक शृंखला ने पुलित्जर पुरस्कार जीता और इस समस्या के बारे में सामान्य जागरूकता बढ़ाई। इस मुद्दे पर कैप्टन चार्ल्स मूर ने एक पुस्तक प्लास्टिक ओशन भी लिखी है। यह पुस्तक काफी प्रसिद्ध हुई है और इससे वैज्ञानिकों को ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैच को समझने में बड़ी सहायता मिली है। प्लास्टिक ओशन पुस्तक मानव निर्मित समुद्री मलबे से होने वाली क्षति के प्रभाव और निहितार्थ पर गम्भीर प्रश्न उठाती है। वर्तमान में अटल अवनति के क्षितिज पर खड़े महासागर का सत्य समझाती यह पुस्तक प्लास्टिक युग के इस दौर में महासागरीय परिस्थितियों के पुनर्विचार पर जोर डालती है। यह पुस्तक जागरुक मीडियाध्पत्रकारिताध्खोजी रिपोर्टिंग के लिए दिए जाने वाले नॉटिलस गोल्ड अवार्ड की 2012 की विजेता भी है।
प्रशांत महासागर में निर्मित द ग्रेट पेसिफिक गारबेज पैच के गहन अध्ययनों से एक बात स्पष्टरूप से सामने आई है कि संयुक्त राज्य अमेरिका के पश्चिमी तट और जापान के पूर्वी तट से प्रशांत महासागर में पहुंचने वाले कचरे को ले जाने में उत्तर प्रशांत उपोष्ण. कटिबंधीय जायर में मिलने वाली महासागरीय धाराएं जैसे कैलिफ़ोर्निया धाराए उत्तर विषुवतरेखीय धाराए उत्तर प्रशांत धारा और कुरोशिओ धारा शामिल हैं। इन धाराओं से निर्मित जायर के दक्षिणावर्त घूर्णन के कारण यहाँ प्लास्टिक जैसे ठोस पदार्थ आकर फंस जाते हैं। इस जायर से वास्तव में बड़े.बड़े कचराघरनुमा दो भाग पूर्वी और पश्चिमी गारबेज पैच बनते हैं। जैसा कि लेख के पहले भाग में भी यह स्पष्ट किया गया है कि लोग पूर्वी प्रशांत कचरा पैच को ही श्ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैचश् समझते हैं। जबकि असल में पश्चिमी और पूर्वी प्रशांत कचरा पैच दोनों को सामूहिक रूप से ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैच कहा जाता है। अब यहाँ यह बात बिल्कुल स्पष्ट हो गई है कि पूर्वी प्रशांत कचरा पैच हवाई और कैलिफोर्निया के बीच तैरता हैए जबकि पश्चिमी प्रशांत कचरा पैच जापान के पूर्व और हवाई के पश्चिम में बनता है। इन दोनों महासागरीय कचराघरों में दुनियाभर का कचरा बहता हुआ यहाँ एकत्रित हो रहा है। एक बात और गौर करने की है कि ये दोनों कचरा पैच आपस में एक पतली 6000.मील लंबी धारा से जुड़े हैं जिसे उपोष्णकटिबंधीय अभिसरण क्षेत्र कहा जाता है। शोधों से पता चला है कि इस अभिसरण क्षेत्र में भी बड़ी मात्रा में कचरा  जमा हो रहा है। 
द ग्रेट पेसिफिक गारबेज पैच में जमा हो रहे कचरे में अधिकतर मछली पकड़ने के जाल के टुकड़ेए प्लास्टिक की बोतलेंए हेलमेट और अन्य प्लास्टिक चीज़ें शामिल हैं। कचरा पैच में अधिकांश प्लास्टिक का मलबा भूमि.आधारित स्रोतों से आता है और पारंपरिक प्लास्टिक जैवअपघटित नहीं होने से अपने मूलरूप में ही बना रहता है। यहाँ तक कि वर्तमान में प्रचलित जैवप्लास्टिक भी समुद्री वातावरण में जैवअपघटित नहीं हो पाता है। समुद्री वातावरण में इस जैवप्लास्टिक का केवल प्रकाश अपघटन ही होता है। इससे समय के साथ साथ बायोप्लास्टिक के बड़े टुकड़े छोटे छोटे बारीक टुकड़ों में टूट जाते हैं और कभी कभी उनका रंग भी बदल जाता है। द ग्रेट पेसिफिक गारबेज पैच के आसपास के जल में रहने वाली छोटी.बड़ी सभी मछलियां इन प्लास्टिक टुकड़ों को अपना भोजन समझकर निगल रही हैं। इस तरह प्लास्टिक तेजी से समुद्री खाद्यजाल का एक अनपेक्षित अंग बनता जा रहा है। 
विभिन्न शोधकर्ताओं ने पाया है कि महासागरीय गारबेज पैचों में 80 प्रतिशत भाग प्लास्टिक का हैए जो पूरा का पूरा तटीय भूमिभागों से ही बहकर आ रहा है। जलयानों से भी कुछ मात्रा में मलबा गिरता रहता है। इस तरह महासागरीय कचराघर में लगातार कचरे की मात्रा बढ़ने से इसके आकार और गहराई में उसी अनुपात में परिवर्तन हो रहे हैं। अब इन कचरा पैचों की भयावहता का असर समुद्री जैवविविधता पर स्पष्ट रूप से दिखने लगा है।  पर्यावरणविदों ने सन् 2015 से इस पर चिंता व्यक्त की थी। अतः नीदरलैंड के एक गैर.लाभकारी संगठन ओशन क्लीनअप फाउंडेशन के शोधकर्ताओं के एक दल ने वर्ष 2015 और 2016 में कैलिफोर्निया और हवाई के बीच कचरे के भंवर का सर्वेक्षण किया। साथ ही कचरा पैच के मलबे का जैवरासायनिक प्रेक्षण करना शुरू किया। इसमें द ग्रेट पेसिफिक गारबेज पैच का घनत्व अपेक्षा से बहुत अधिक पाया गया और यह भी ज्ञात हुआ कि इसमें उपस्थित प्लास्टिक प्रदूषकों को अवशोषित करते हैंए जिससे वे समुद्री जीवन के लिए जहरीले हो जाते हैं। वर्ष 2013 में स्थापित ओशन क्लीनअप फाउंडेशन एक ऐसा संगठन है जिसने विश्व के महासागरों से प्रदूषण को दूर करने को अपना दृढ़ उद्देश्य बनाया हुआ है। यह महासागरों से प्लास्टिक प्रदूषण हटाने की तकनीकें निर्मित कर रहा है। इसी साल 2019 की 7 जनवरी को एक समाचार आया कि ग्रेट पैसिफिक गारबेज पैच के अंदर प्रशांत महासागर में तैरते हुए प्लास्टिक को इकट्ठा करने के लिए द ओशन क्लीनअप द्वारा तैनात किए गए कचरा सफाई उपकरण टूट गए हैं। इस तरह की खबरों से कई बार ओशन क्लीनअप के कामों में बाधाएं भी आती हैं। पर सबसे अच्छी बात यह है कि इस तरह के दुनियाभर में काम कर रहे सक्रिय संगठनों के कारण निकट भविष्य में महासागरों में बनते जा रहे कचराघरों से मुक्ति दिलाई जा सकेगी। क्योंकि इस पीड़ा से सिर्फ प्रशांत महासागर ही नहीं गुजर रहा हैए बल्कि अटलांटिक और हिंद महासागरों में भी ऐसे कचराघरों की मौजूदगी प्रमाणित हो चुकी है।


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