विशेष

(21/May/2018)

अक्षय ऊर्जा का उपयोग विश्व विकास के लिए हो

- स्टीफन हॉकिंग

 

खगोल वैज्ञानिक और सैद्धांतिक भौतिकशास्त्री स्टीफन हॉकिंग की ख्याति और उनसे लोगों का जुड़ाव इतना अधिक था कि १४ मार्च २०१८ को उनके निधन के बाद पूरी दुनिया स्तब्ध रह गई। हर किसी ने एक व्यक्तिगत क्षति जैसा महसूस किया। आइंस्टाइन के बाद स्टीफन हॉकिंग दूसरे ऐसे महान वैज्ञानिक रहे जिनसे पूरी दुनिया के लोग इस कदर मुग्ध थे। विज्ञान की जानकारी का प्रसार हो तो दुनिया के सभी अंधविश्वास, भ्रांतियां और पाखंड समाप्त हो जाएं। इसके लिए शिक्षा के साथ विज्ञान संचार की अहम भूमिका होती है। वैज्ञानिक अगर विज्ञान का लोकप्रियकरण करंे तो यह सोने पे सुहागा जैसी बात होती है। भारत में यश पाल, नार्लीकर और कलाम तथा अन्य देशों में फ्रेड हायल, रिचर्ड फाइनमैन, कार्ल सागन के अलावा स्टीफन हॉकिंग ऐसे वैज्ञानिकों के सशक्त उदाहरण हैं जिन्होंने वैज्ञानिक रहते हुए विज्ञान संचारक की भूमिका का सफल निर्वहन किया। हॉकिंग अपने जीवन काल में स्वयं इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि लोगों को विज्ञान की जानकारी देना वे अपना कर्तव्य समझते हैं। एक कुशल वैज्ञानिक और विज्ञान संचारक के रूप में हॉकिंग ने विभिन्न अवसरों पर पूछे गए सवालों के बेहद रोचक जवाब दिए हैं। यहाँ पर ऐसे ही कुछ सवालों और उन पर हॉकिंग के जवाबों के भावार्थ प्रामाणिक स्रोत के साथ प्रस्तुत किए जा रहे हंै -  

क्या कभी ब्रह्मांड का अंत होगा? अगर हां तो उसके बाद क्या होगा?
खगोलीय प्रेक्षण से यह ज्ञात हुआ है कि हमारे ब्रह्मांड का लगातार विस्तार हो रहा है और यह विस्तार (फैलाव) दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा है। ब्रह्मांड यूं ही हमेशा फैलता रहेगा और अंधेरे तथा रिक्त स्थानों को जन्म देता रहेगा। ब्रह्मांड की उत्पत्ति बिग बैंग घटना से हुई लेकिन इसका कोई भी अंत नहीं है। हमारे सबके मन में यह जिज्ञासा उठती है कि बिग बैंग से पहले क्या था। तो इसका जवाब यह है कि जिस तरह दक्षिणी ध्रुव के पास पहुंचने पर दक्षिण दिशा लुप्त हो जाती है, उसी तरह बिग बैंग से पहले कुछ नहीं था। दरअसल बिग बैंग एक शुरुआत है और यह बात स्वाभाविक है कि शुरुआत से पहले कुछ नहीं होता। 

पृथ्वी पर क्या मानव सभ्यता का अस्तित्व लंबे समय तक बरकरार रहेगा? 
आने वाले समय में क्या मनुष्य अंतरिक्ष में अपनी बस्ती बसाएगा?
पृथ्वी पर हमें अपने अस्तित्व को तब तक बचाए रखना होगा जब तक कि अंतरिक्ष के किसी उपयुक्त पिंड पर हम मानव कॉलोनी न बसा लें। दूसरी ओर यह भी एक विकट चुनौती है कि हमारे आस-पास पृथ्वी जैसी माकूल जगह नहीं है। इसलिए ग्लोबल वार्मिंग एवं नाभिकीय युद्ध जैसे खतरों से घिरी हमारी धरती और मानव जाति के वजूद को बचाए रखने के लिए दूसरे अंतरिक्ष पिंड की तलाश करना बेहद जरूरी है। अभी इसमें काफी समय है। उससे पहले हमें प्रेम, शांति और सौहृार्द बनाए रखने के साथ पर्यावरण को बचाने की हर संभव कोशिश करनी होगी। 

अपने जीवन काल में आप किस प्रकार की वैज्ञानिक प्रगति या खोज को देखना चाहेंगे?
नाभिकीय संलयन व्यावहारिक तौर पर ऊर्जा का एक विशाल स्रोत है। मैं चाहूँगा कि प्रदूषण और ग्लोबल वार्मिंग के बगैर इस अक्षय ऊर्जा का उपयोग दुनिया के विकास के लिए किया जाए।

आपको क्या लगता है-आपकी शारीरिक सीमाएं आपके वैज्ञानिक अध्ययन में सहायक हैं या बाधक?
यह मेरा दुर्भाग्य है कि मुझे मोटर न्यूरान रोग हो गया लेकिन इसके अलावा जीवन में बाकी सभी चीजों के लिए मैं खुद को भाग्यशाली मानता हूं। सैद्धांतिक भौतिकी में शोध के लिए विकलांगता से कोई गंभीर समस्या नहीं आती है। बाकी कसर मेरी लोकप्रिय विज्ञान पुस्तकें पूरा कर देती हैं।

आप शारीरिक तौर पर गंभीर कठिनाई से जूझते हुए भी एक रॉक स्टार की तरह इतने ढेर सारे व्याख्यान, साक्षात्कार और कार्यक्रमों में हिस्सा लेते हैं, साथ ही थकाऊ यात्राएं भी करते रहते हैं। इतना कुछ आप क्यों करते हैं?
लोगों को विज्ञान के बारे में जानकारी देना मैं अपना कर्तव्य समझता हूं। 

हमारी आकाशगंगा में किसी दूसरे ग्रह या अंतरिक्ष पिंड पर बुद्धिमान प्राणी की मौजूदगी को लेकर आपने जो संभावना जताई है, 
उस विषय में कुछ बताएं।

अगर परग्रही प्राणी (एलियन) हमारी पृथ्वी पर आते हैं तो यह वैसी ही घटना होगी जैसे कि कोलंबस अमेरिका की धरती पर पहली बार पहुंचे थे। तब वहां के स्थानीय लोगों को उनका आना अच्छा नहीं लगा था। आज के आधुनिक एलियन क्या पता बंजारे हों और किसी भी ग्रह पर पहुंचकर वहां आधिपत्य कायम करने की जुगत लगाएं। अब वास्तविक चुनौती यह है कि हम इस बात को वैज्ञानिक ढंग से समझने की कोशिश करें कि एलियन कैसे हो सकते हैं?

आप कहते हैं कि ब्लैक होल का अस्तित्व सूचना के द्वारा बचाया जा सकता है। एक आम आदमी को यह बात आप कैसे समझाएंगे। खास तौर पर माना जैसे कि कोई व्यक्ति अगर ब्लैक होल में गिर रहा हो?
ब्लैक होल में गिरना निआग्रा जलप्रपात के ऊपर से गुजरने जैसा अनुभव है। अगर आप अपना पतवार तेजी से चलाते हैं तो आप इस जलप्रपात में डूबने से अपने को बचा लेते हैं। ब्लैक होल एक चरम रिसाइक्लिंग मशीन जैसा होता है। इसमें जितना कुछ भीतर जाता है, उतना ही बाहर निकलता है।

आप ईश्वर के अस्तित्व में विश्वास नहीं रखते हैं। मगर वहीं दूसरी ओर दुनिया की हर संस्कृति में ईश्वर को सर्वशक्तिमान माना गया है। क्या आपको लगता है कि एक दिन मनुष्य धर्म और ईश्वर का परित्याग कर देगा? इस बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?
ईश्वर का अस्तित्व नहीं है, मैं इसका दावा नहीं करता। मेरी समझ से ईश्वर या भगवान एक ऐसा नाम है जिससे लोग अपने को जोड़कर धरती के सृजन की कल्पना करते हैं। विज्ञान की दृष्टि में सौरमंडल के इस तीसरे ग्रह पर जीवन की मौजूदगी के लिए भौतिक विज्ञान के नियम जिम्मेदार हैं। ब्रह्मांड और हमारी पृथ्वी में हो रही प्राकृतिक घटनाओं को समझने के लिए विज्ञान के नियम पर्याप्त हैं। ईश्वर जैसी सत्ता के भुलावे में हम विज्ञान को नजरअंदाज करते हैं।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से हमें क्यों डरना चाहिए?
एक अनुमान के अनुसार इसकी पूरी संभावना है कि अगले सौ वर्षों में किसी समय आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से कम्प्यूटर मानव पर आधिपत्य स्थापित कर लेंगे। ऐसा होने से पहले हमें यह सुनिश्चित कर लेना होगा कि एआई युक्त कम्प्यूटर के लक्ष्य हमारे लक्ष्यों के समान हों। ऐसा नहीं होने पर ये कम्प्यूटर और रोबोट हमारे ऊपर राज करने लग जाएंगे।

एक जीव जाति के रूप में पृथ्वी पर हम मनुष्यों का क्या भविष्य आप देखते हैं?
मैं सोचता हूं कि ब्रह्मांड में कहीं अन्यत्र अपने रहने की उपयुक्त जगह तलाशने की क्षमता पर हम मनुष्यों का अस्तित्व निर्भर करेगा, क्योंकि इसकी प्रबल संभावना है कि किसी आपदा के चलते हमारी पृथ्वी नष्ट हो जाएगी। इसलिए अंतरिक्ष उड़ान के महत्व को लेकर लोगों में जागरूकता बढ़ाने का मैं प्रयास करता हूं। 

जो लोग व्हीलचेयर का प्रयोग करते हैं, उन्हें अपने जीवन में अनेक तरह की कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। आप अपनी लंबी बीमारी की वजह से लगातार व्हीलचेयर पर रहते हैं और इससे जुड़ी तमाम परेशानियों को महसूस किया है। आपका उन 
लोगों को क्या संदेश है जो व्हीलचेयर इस्तेमाल के लिए बाध्य हैं?

उन सभी डिफरेंटली एबल्ड लोगों को मेरी यही सलाह है कि वे अपनी रूचि का कोई ऐसा काम करें जिसे करने में उनकी शारीरिक अक्षमता आड़े न आती हो। सबसे अहम बात कि अपनी अक्षमता को लेकर मन में कभी पश्चाताप की भावना न लाएं। यह अक्षमता भी एक शक्ति के समान होती है। अगर मैं अपनी बात करूं तो इस कारण से भले मैं चलने फिरने और बात करने में लाचार हूं मगर एक जगह शांत बैठे रहने से मुझे वैज्ञानिक चिंतन और शोध के लिए अथाह समय मिल जाता है। इतना समय शायद सक्रिय होने की दशा में न मिलता। 

mmgore@vigyanprasar.gov.in

स्रोत एवं संदर्भ

1. https://elpais.com/elpais/2015/09/25/inenglish/1443171082_956639.html
2.http://www.iflscience.com/physics/bbc-publishes-text-stephen-hawkings-final-broadcast-interview/
3. http://content.time.com/time/magazine/article/0,9171,2029483,00.html
4. https://www.youtube.com/watch?v=DFiFNtQ59ws
5. http://www.fisica.net/relatividade/stephen_hawking_a_brief_history_of_time.pdf
6. https://www.its.caltech.edu/~kip/index.html/PubScans/VI-42.pdf
7. https://www/stephen_hawking_the_grand_design.pdf