आईसेक्ट विश्वविद्यालय समाचार

(16/Sep/2017)

प्रसिद्ध वैज्ञानिक डॉ. जयंत सहस्रबुद्धे का व्याख्यान

भारतीय विज्ञान परंपरा में विवेकानंद के विचारों का बहुत महत्व है। विवेकानंद वैज्ञानिक दृष्टि से संपन्न विचारक थे। अपने विश्व भ्रमण के दौरान उन्होंने निकोला टेस्ला समेत कई वैज्ञानिकों के साथ अपने विचार साझा किए। पदार्थ और ऊर्जा के आपसी संबंधों पर विवेकानंद ने जो राय टेस्ला के साथ चर्चा में साझा की थी। उसे आज इस गणितीय सूत्र (म्त्रउब२) आईंस्टाइन का प्रसिद्ध समीकरण के रूप में जानते हैं। इससे  जाहिर है कि भारतीय विचार दर्शन परंपरा विज्ञान के क्षेत्र में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका का भी निर्वाह कर रही थी। 
उक्त उद्गार आईसेक्ट विश्वविद्यालय के विज्ञान और संचार केन्द्र द्वारा आयोजित तृतीय विज्ञान व्याख्यान माला के अंतर्गत विज्ञान भारती के संगठन सचिव डॉ। जयंत सहस्त्रबुद्धे ने व्यक्त किए। उन्होंने विवेकानंद के शिकागो में सर्वधर्म परिषद में (१९ सितंबर, १८९३) को दिए गए ऐतिहासिक भाषण के कई अनछुए पहलुओं पर भी प्रकाश डाला और यह स्थापित किया कि किस तरह विवेकानंद एक उद्भट विद्वान होने के साथ-साथ वैज्ञानिक चेतना से संपन्न व्यक्तित्व थे। उन्होंने यह भी बताया कि भारतीय संगीत का सर्वश्रेष्ठ माना जाने वाला ग्रंथ संगीत कल्पतरु विवेकानंद ने मात्र २२ वर्ष की आयु में रचा। विवेकानंद अच्छे गायक भी थे। 
इस अवसर पर आईसेक्ट विश्वविद्यालय केे कुलाधिपति संतोष चौबे ने कहा कि भारतीय विज्ञान परंपरा से जुड़ा हुआ है। उन्होंने डॉ। जयंत सहस्त्रबुद्धे के बहुआयामी व्यक्तित्व और विज्ञान प्रसार कार्यों में उनकी भूमिका की सराहना की। आईसेक्ट विश्वविद्यालय द्वारा विज्ञान प्रसार केन्द्र के माध्यम से नियमित रूप से प्रकाशित विज्ञान साहित्य और विविध गतिविधियों की जानकारी डॉ। जयंत सहस्त्रबुद्धे को दी। 
इस अवसर पर आईसेक्ट विश्वविद्यालय की विज्ञान पत्रिका ‘‘इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए’’ और शोध पत्रिका के नये अंक ‘‘शोधायतन’’ का विमोचन भी किया गया। इस अवसर पर डॉ। जयंत सहस्त्रबुद्धे ने आईसेक्ट विश्वविद्यालय के विज्ञान प्रसार केन्द्र के निदेशक राग तेलंग से भी चर्चा की और उन्हें मार्गदर्शन दिया। 
कार्यक्रम में आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.ए.के.ग्वाल ने स्वागत भाषण दिया साथ ही विश्वविद्यालय की गतिविधियों की जानकारी दी। विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ। विजय सिंह ने आभार प्रदर्शन करते हुए कहा कि शीघ्र ही विश्वविद्यालय विज्ञान भारती के साथ स्टूडेंट चैप्टर का शुभारंभ करेगा। उन्होंने बताया कि आईसेक्ट विश्वविद्यालय की विज्ञान व्याख्यान माला शृंखला में पूर्व में अध्यात्म गुरु डॉ.एच.आर.नागेन्द्र, कुलाधिपति स्वामी विवेकानंद योग अनुसंधान संस्थान, बैंगलोर और प्रसिद्ध वैज्ञानिक प्रो.के.आई.वसु ने भी अपने व्याख्यान दिए हैं। विश्वविद्यालय भविष्य में भी इस प्रकार के व्याख्यान आयोजित करता रहेगा। इस अवसर पर आईसेक्ट विश्वविद्यालय रांची के कुलपति डॉ। आर.एन। यादव, डॉ। सी.वी। रामन विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ। आर.पी। दुबे और आईसेक्ट से अमिताभ सक्सेना विशेष रूप से उपस्थित थे। 
 

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस 

२१ जून को ‘विश्व योग दिवस’ बड़े पैमाने पर विश्व भर में मनाया गया, इसी तारतम्य में आईसेक्ट विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना, पैरामेडिकल एवं नर्सिंग विभाग के द्वारा ‘‘विश्व योग दिवस’’ विश्वविद्यालय परिसर में मनाया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद जी को पुष्प्प अर्पण कर किया गया। 
विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित योग दिवस कार्यक्रम में कुशीनगर उत्तर प्रदेश से आए हुए विशेष अतिथि योग प्रशिक्षक नंदलाल विश्वकर्मा ने विद्यार्थियों एवं फैकल्टी को योगाभ्यास करवाया। उन्होंने ॐ शब्द की गहनता को समझाते हुए दैनिक जीवन में प्रयोग होने वाले आसन पर प्रकाश डाला और बताया कि इन आसन को व्यक्ति दैनिक जीवन में सरलता से अपना कर विभिन्न रोगों से मुक्ति पा सकता है। इन आसनों का उपयोग बड़ी सरलता से नंदलाल जी के सानिध्य में सभी छात्र-छात्राओं एवं फैकल्टी को करवाया गया। 
विश्वविद्यालय के योग विभाग से डॉ। मनोज शर्मा द्वारा सूर्य नमस्कार के साथ कार्यक्रम का अंत किया गया। इस अवसर पर राष्ट्रीय सेवा योजना अधिकारी डॉ। जया शर्मा, डॉ। रेखा गुप्ता, पैरामेडिकल विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ। सी.पी। मिश्रा सहित छात्र-छात्राओं एवं फैकल्टी ने बड़ी संख्या में भाग लिया। कार्यक्रम के अंत के कुछ समय उपरांत सभी योग अभ्यर्थियों को फलों के जूस का वितरण किया गया। 
आईसेक्ट विश्वविद्यालय के योग विभाग मंे सर्टिफिकेट, डिप्लोमा, पी.जी। डिप्लोमा, बी.एस.सी, एम.एस.सी। पाठ्यक्रम संचालित किये जा रहे हैं। विश्वविद्यालय अपने छात्र-छात्राओं को नियमित रुप से योग को अपने जीवनशैली में शामिल करने के लिए पे्ररित कर रहा है जिससे कि छात्रों का बौद्धिक व मानसिक विकास होगा और वे अपने पथ पर निरंतर अग्रसर रहेंगे।
 

जर्नल यू.जी.सी। की सूची में शामिल

आईसेक्ट विश्वविद्यालय की बड़ी उपलब्धि है कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यू.जी.सी.) ने विश्वविद्यालय के दो जर्नल अनुसंधान और शोधायतन को अपनी अनुमोदित सूची में शामिल किया है। आईसेक्ट विश्वविद्यालय पिछले ५ वर्षो से दो जर्नल अनुसंधान और शोधायतन का प्रकाशन कर रहा है। अनुसंधान विज्ञान, प्रौद्योगिकी व प्रबंधन व शोधायतन वाणिज्य, कला, शिक्षा, समाजशास्त्र तथा मानव विकास पर अर्धवार्षिक जर्नल है। यू.जी.सी। ने हाल ही में ३५००० शोध पत्रिकाओं की सूची जारी की है जिसमें प्रकाशित शोधपत्रों का उच्च शिक्षा के दृष्टिकोण से मान्यता दी जाएगी। 
शोध पत्रिकाओं के मुख्य संपादक प्रो.वी.के.वर्मा ने बताया कि आईसेक्ट विश्वविद्यालय संभवतः प्रदेश का पहला विश्वविद्यालय है जिसमें उपलब्ध सभी विषयों पर शोध पत्रिकाओं का प्रकाशन होता है। अनुसंधान व शोधायतन में प्रकाशित शोधपत्र का स्तर प्रमाणिक है। पी.एचडी। कर रहे विद्यार्थियों के शोधपत्र इन शोध पत्रिकाओं में प्रकाशित होने पर मान्य रहेंगे। शोधपत्रों का समय-समय पर विशेष अंक भी निकाला जाता है। विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ.ए.के.ग्वाल ने कहा कि विश्वविद्यालय शोध की गुणवत्ता पर विशेष रूप से ध्यान दे रहा है। कुलसचिव डॉ। विजय सिंह ने इस उपलब्धि पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय प्रतिबद्ध है कि विद्यार्थियों को अपने विकास के लिये बेहतर अवसर मिलें। विश्वविद्यालय को भारत सरकार की एन.आई.आर.एफ। रैकिंग में स्थान प्राप्त हुआ है। 
 

रिसर्च मेथेडोलॉजी कार्यशाला संपन्न

आईसेक्ट विश्वविद्यालय में दो दिवसीय रिसर्च मेथेडोलॉजी विषय पर कार्यशाला ‘‘ज्ञानोदय’’ का आयोजन किया गया। इस दो दिवसीय वर्कशाप में शोध के लिये विभिन्न सॉफ्टवेयर जैसे एसपीएसएस (स्टेस्टिकल सॉफ्टवेयर फॉर डाटा एनालिसिस), मैट लैब, आर सॉफ्टवेयर की उपयोगिता पर विस्तार से जानकारी दी गई। क्वालिटेटिव रिसर्च मेथड्स पर विशेष सत्र रखा गया। प्रतिभागियों को वर्कशाप में थ्योरी और प्रैक्टिकल सत्रों के माध्यम से जानकारी दी गई। एसपीएसएस व मैट लैब पर प्रैक्टिकल सत्र रखे गए। जिससे प्रतिभागियों को इन सॉफ्टवेयर के संबंध में आधारभूत जानकारी प्राप्त हुई। इस वर्कशाप में प्रदेश के २०० से अधिक प्रतिभागियों ने पार्टीसिपेट किया।
इस कार्यशाला में बतौर विषय विशेषज्ञ डॉ। आशीष चांडोक, फैकल्टी इलेक्ट्रानिक्स एण्ड कम्युनिकेशन विभाग, शासकीय इंजीनियरिंग कॉलेज भरतपुर, राजस्थान एवं डॉ। अनिशा सत्संगी, सहायक प्राध्यापक, कॉमर्स विभाग, डीईआई डीम्ड विश्वविद्यालय आगरा ने प्रतिभागियों को जानकारियां दी। इससे पूर्व शुभारंभ सत्र में की-नोट स्पीकर दयालबाग इंस्टीट्यूट आगरा के डॉ। एल। एन। कोहली ने अपने उद्बोधन में शोध और कॉस्ट एनालिसिस पर रोचक चर्चा की। आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो.ए.के.ग्वाल ने रिसर्च मेथेडोलॉजी एण्ड राइटिंग ऑफ ए रिसर्च पेपर पर अपना प्रेजेंटेशन दिया। जिसमें उन्होंने बताया कि अंतर्राष्ट्रीय जर्नलों में अच्छा रिसर्च पेपर प्रकाशित करने के लिये किन-किन बिन्दुओं पर ध्यान देना चाहिए। आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कोर ग्रुप के समन्वयक प्रो। वी। के वर्मा ने प्रतिभागियों को रिसर्च व रिसर्च की विधियों के संदर्भ में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि शोध के लिये समस्याओं का चयन इस तरह करना चाहिए कि उसके सामाजिक सरोकार भी रहे।
समापन अवसर पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ। विजय सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय में शोध पर विशेष रूप से जोर दिया जा रहा है। विश्वविद्यालय समय-समय पर इस तरह के आयोजन कराता रहता है। उन्होंने उल्लेख किया कि हाल ही में विश्वविद्यालय के दो जर्नल ‘‘शोधायतन’’ और ‘‘अनुसंधान’’ को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) ने अपनी अनुमोदित सूची में शामिल किया है। इस अवसर पर यू.जी। एवं पी.जी। छात्राओं द्वारा बनाई गई पत्रिका होराईजन (अर्द्धवार्षिक पत्रिका) के पहले अंक का विमोचन किया गया। इस पत्रिका का उद्देश्य छात्र-छात्राओं के बीच शोध पत्रों को लिखने की रूचि को विकसित करना है। वर्कशाप की को-ऑडिनेटर डॉ। दीप्ती महेश्वरी, डीन, कॉमर्स डिपार्टमेंट और डॉ। संगीता जौहरी, एचओडी मैनेजमेंट डिपार्टमेंट थीं।