आईसेक्ट विश्वविद्यालय समाचार

(16/Sep/2017)

विज्ञान कथाओं का संचयन सुपरनोवा का रहस्य का विमोचन

 
विज्ञान कथाओं में कथा का तत्व और वैज्ञानिकता का आधार होना चाहिए। विज्ञान कथाएं भविष्य की कथा है। जिसमें कल्पनाशीलता की बहुत जगह है। यह बात आईसेक्ट विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री संतोष चौबे ने हिन्दी की श्रेष्ठ विज्ञान कथाओं का संचयन ‘‘सुपरनोवा का रहस्य’’ के विमोचन पर कही। सुपरनोवा का रहस्य हिन्दी की श्रेष्ठ विज्ञान कथाओं का संचयन है जिसके प्रधान संपादक संतोष चौबे हैं। उन्होंने आगे घोषणा करते हुए कहा है कि विश्वविद्यालय शीघ्र ही विज्ञान लेखकों के लिये पुरस्कार और विज्ञान की फिल्मों की प्रतियोगिता प्रारंभ करेगा। विश्वविद्यालय का प्रयास रहेगा कि भविष्य में विज्ञान लेखकों व हिन्दी साहित्यकारों की संगोष्ठी के माध्यम से विज्ञान कथाओं का प्रचार-प्रसार किया जाए।  
इसके उपरांत ‘‘विज्ञान गल्पः संभावना और चुनौतियां’’ का व्याख्यान प्रसिद्ध विज्ञान संचारक देवेन्द्र मेवाड़ी द्वारा दिया गया। अपने व्याख्यान में उन्होंने विज्ञान कथाओं के वैश्विक इतिहास पर प्रकाश डालते हुए इस विद्या के विकास को रेखांकित किया। उन्होंने अपनी किस्सागोई की शैली में विज्ञान कथाओं के विकास के विभिन्न पड़ावों और प्रसिद्ध विज्ञान कथाकारों की रचनाओं के संबंध में भी रोचक बातें बताईं। उन्होंने कहा कि हमारे देश में विज्ञान कथाओं की बहुत बड़़ी संभावना है और दावा किया की कल की कहानियाँ ‘‘विज्ञान कथाएं’’ ही होंगी। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता विश्वविद्यालय के कुलाधिपति संतोष चौबे ने की। 
बतौर प्रतिभागी देश के प्रसिद्ध विज्ञान संचारक अरविन्द मिश्र, मनीष मोहन गोरे, जाकिर अली, अर्शिया अली और इरफान ह्यूमन ने शिरकत की। विज्ञान प्रसार के विज्ञान संचारक मनीष मोहन गोरे ने विज्ञान कथा के प्रसार के लिये संस्थागत प्रयासों का जिक्र करते हुए कहा कि नेशनल काउंसिल फॉर साइंस एण्ड टेक्नॉलॉजी कम्युनिकेशन (एन.सी.एस.टी.सी.), विज्ञान प्रसार, राज्य विज्ञान व प्रौद्योगिकी काउंसिल वर्कशॉप के द्वारा प्रचार-प्रसार करते आ रहे हैं। आज आवश्यकता इस बात की है विज्ञान कथाओं को युवाओं से जोड़ा जाए। पाठ्यक्रमों में भी इसे शामिल किया जाए। विज्ञान कथाएं इसलिए भी आवश्यक हैं कि यह कथाएं विज्ञान संचार का टूल है। उन्होंने कहा कि ‘‘सुपरनोवा का रहस्य’’ आईसेक्ट विश्वविद्यालय की अनूठी पहल है जो विज्ञान कथाओं के प्रचार-प्रसार में निश्चय ही मील का पत्थर साबित होगी। डॉ। इरफॉन ह्यूमन ने विज्ञान कथा लेखन की संभावनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि पृथ्वी पर जीवन की पहुँच, पृथ्वी पर जल की उत्पत्ति, भविष्य में क्षुद्र ग्रहों की टक्कर पर कथाएँ लिखी जा सकती हैं। इसके उपरांत विज्ञान संचारक अरविन्द मिश्र, जाकिर अली और अर्शिया अली ने भी परिचर्चा में अपने विचार प्रस्तुत किए। 
इस अवसर पर ‘‘दी एक्सट्रा टेर्रेस्ट्रियल (एलियन)’’ पर आधारित शॉर्ट फिल्म ‘‘वी आर नॉट एलोन’’ भी दिखाई गई। यह कार्यक्रम विज्ञान और कला के बीच एक सेतु की तरह रहा जहाँ विज्ञान जैसे जटिल विषय पर कला जैसे सरस माध्यम से बात की गई।