तकनीकी समाचार

(01/Oct/2014)

इंटरनेट की सबसे धीमी स्पीड भारत में 

एक नई रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इंटरनेट की स्पीड दुनिया में सबसे स्लो है। इंटरनेट कॉन्टेंट डिलिवरी नेटवर्क, अकामाई की हालिया तिमाही रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इंटरनेट कनेक्शन की औसत स्पीड 1.7 एमबीपीएस है। भारत की इस मामले में 118वीं रैंकिंग है और वह थाईलैंड, इंडोनेशिया, फिलीपींस और वियतनाम से भी पीछे है। अकामाई की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में इंटरनेट की स्पीड में हर तिमाही में 8.4 फीसदी की दर से इजाफा हो रहा है, जबकि सालाना बढ़ोत्तरी 24 फीसदी है। अकामाई इस रिपोर्ट में उन यूजर्स को शामिल करती है जो 4 एमबीपीएस या इससे अधिक की स्पीड हासिल कर पा रहे है।रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत में महज 0.7 फीसदी इंटरनेट यूजर ही 10 एमबीपीएस से ज्यादा की स्पीड से इंटरनेट यूज करते हैं, जबकि 4.9 फीसदी यूजर 4 एमबीपीएस या इससे अधिक की स्पीड से इसे यूज करते हैं, अकामाई 10 एमबीपीएस की स्पीड को हाई ब्रॉडबैंड के तौर पर गिनती है। यह नंबर तिमाही से तिमाही 39 फीसदी की दर से और सालाना से सालाना 7.6 फीसदी की दर से बढ़ रही है। वहीं, इंटरनेट की ग्लोबल औसत स्पीड 3.9 एमबीपीएस और सबसे ज्यादा औसत कनेक्शन स्पीड 21.2 एमबीपीएस है। जबकि भारत में औसत सबसे ज्यादा कनेक्शन स्पीड 12 एमबीपीएस है। 

 इंटरनेट यूजर को मिलगा तोहफा

गूगल सर्च इंजन हर बार की तरह इस बार भी अपने यूजर्स को एक तोहफा देने जा रहा है। गूगल ने पैनजूरा स्टार्टप के साथ मिलकर अपने यूजर्स को एक साल के लिए 2 टीबी तक की फ्री क्लाउड स्टोरेज देने का करार किया है लेकिन इस फ्री क्लाउड स्टोरेज को पाने के लिए यूजर्स को पैनजूरा से क्लाउड गेटवे सॉफ्टवेयर डाउनलोड करना होगा। इस ऑफर में गूगल अपने यूजर्स को पैनजूरा के साथ ऑफर की गई फ्री क्लाउड स्टोरेज सिर्फ एक लोकेशन से यूज करने की एक्सेज देता है लेकिन अगर यूजर्स अलग&अलग लोकेशन से क्लाउड स्टोरेज का इस्तेमाल करना चाहता है तो उन्हें पैनजूरा को इसके लिए पे करना होगा लेकिन गूगल तब भी अपने यूजर्स के लिए इसकी कोई कीमत वसूल नहीं करेगा।

गूगल क्लाउड प्लेटफार्म के मुताबिक ग्राहकों के लिए कुछ नया करने का एक तरीका है, खासतौर पर तब जब कि पहले उन्हें क्लाउड स्टोरेज को लेकर कुछ खास अनुभव नहीं रहा हो। मार्च में गूगल ने अपनी क्लाउड स्टोरेज डिवाइस के लिए मिनीमम पेड प्लान का ऑफर किया था। फिलहाल गूगल 100 टीबी स्टोरेज के लिए 120 रुपये महीने वसूलता है जबकि 1 टीबी स्टोरेज के लिए 600 रुपए चार्ज करता है। 10 टीबी स्टोरेज के लिए गूगल 6000 रुपए चार्ज करता है। अमेजन की बात की जाए तो एक टीबी स्टोरज के लिए यह 7100 रुपए प्रतिवर्ष का चार्ज करता है जबकि माइक्रोसॉफ्ट 100 जीबी की वन ड्राइव के लिए लगभग 3000 रुपए चार्ज करती है। पैनजूरा कैलिफोर्निया की कंपनी है जो खुद का क्लाउड गेटवे सॉफ्टवेयर उपलब्ध कराती है।        

छह हजार में आएगा 4जी  

ऐपल और सैमसंग जैसी मोबाइल फोन बनाने वाली दिग्गज कंपनियों को मात देने के लिए चीन की स्मार्टफोन निर्माता हुआवेई अगले साल तक भारत में 100 डॉलर यानी 6000 रूपये में 4जी स्मार्टफोन पेश करने की योजना बना रही है। फिलहाल कंपनी खुदरा कारोबार के जरिये काफी कम मात्रा में मोबाइल फोन की बिक्री करती है। हुआवेई टेलीकम्युनिकेशंस (इंडिया) के मुख्य कार्याधिकारी काई लिकुन के अनुसार, 'सस्ते स्मार्टफोन बनाने के लिए कंपनी ने अपना चिपसेट विकसित किया है जो हर प्रकार की तकनीक और स्पेक्ट्रम पर काम कर सकता है। इसके अलावा हम खुदरा क्षेत्र में मोबाइल फोन की बिक्री पर भी जोर देंगे जिसकी शुरुआत हमने दो साल पहले सीमित मात्रा में की थी। वर्ष 2017 तक हमारा लक्ष्य भारत में डिवाइस करोबार 60 करोड़ डॉलर तक करने का है जिसमें स्मार्टफोन और डाटा डोंगल भी शामिल हैं।` कंपनी का लक्ष्य वर्ष 2017 तक भारतीय इकाई से 2 अरब डॉलर की कमाई करने का है क्योंकि भारतीय दूरसंचार सेवा प्रदाताओं ने कुछ सालों तक चुप्पी साधे रहने के बाद एक बार फिर से अपनी नेटवर्क क्षमता बढ़ाने के लिए निवेश करना शुरू कर दिया है। वर्ष 2013 में इस कंपनी का कुल राजस्व 80 करोड़ डॉलर का था।

कम कीमत पर 4जी डिवाइस पेश करने का कदम कुछ महीनों के भीतर अगले साल तक रिलायंस जियो, भारती ऐयरटेल और वोडाफोन जैसी कंपनियों द्वारा बाजार में पेश किए जाने वाले टलटीई 4जी की बिक्री को तेजी देने के लिए उठाया गया है। फिलहाल 4जी डिवाइसों की कीमत 20,000 रुपये है। टेलीकॉम नेटवर्क उपकरण बनाने वाली दुनिया की दूसरी कंपनी हुआवेई डिवास कारोबार पर भी ध्यान दे रही है। कंपनी इस दिशा में इसलिए भी विचार कर रही है क्योंकि दक्षिण कोरिया की कंपनी सैमसंग टेलीकॉम नेटवर्क उपकरण क्षेत्र में प्रवेश करने जा रही है। कंपनी को इस साल 10 लाख से भी ज्यादा मोबाइल फोन बेचने की उम्मीद है और लिकुन का कहना है कि एक बार बिक्री बढ़ने के बाद कंपनी अपना निर्माण संयंत्र स्थापित करने के बारे में भी विचार कर सकती है। हालांकि हुआवेई ने भारत में अपना निर्माण आधार बढ़ाने में हो रही देरी को लेकर चिंताएं भी व्यक्त कीं। लिकुन ने कहा कि कंपनी ने भारत में सभी प्रकार के नेटवर्क उपकरण बनाने के लिए इलीमेंट मैनेजमेंट सिस्टम का लाइसेंस हासिल करने के लिए आवेदन किया था। हालांकि पिछले 7&8 महीनों से सरकार की ओर से कोई समर्थन नहीं मिला है। कंपनी बेंगलूर के अपने शोध एवं विकास केन्द में 30 करोड़ डॉलर निवेश करने की योजना बना रही है, पिछले तीन साल के दौरान 15 करोड़ डॉलर निवेश कर चुकी है। उन्होंने कहा, 'हमें उम्मीद है कि नई सरकार निर्माण इकाई स्थापित करने के लिहाज से अपना समर्थन हमें देगी।' 

बाय - बाय कर जाएगा 'ऑर्कुट'!

गूगल की पहली सोशल नेटवर्किंग साइट 'ऑर्कुट` जल्द ही सोशल नेटवर्किंग की दुनिया को बाय&बाय कर देगी। सोशल नेटवर्किंग साइट 'ऑर्कुट` के लॉन्च होने के दस साल बाद गूगल इसे सितंबर में बंद करने जा रहा है। गूगल के अनुसार भारत और ब्राजील में सबसे ज्यादा प्रसिद्ध 'ऑर्कुट` को 30 सितंबर को बंद कर दिया जाएगा। सोशल नेटवर्किंग साइट की दुनिया में फेसबुक जैसे प्रतिद्वंद्वी के आने से 'ऑर्कुट` ने दुनिया के दूसरे हिस्सों में अपनी चमक खो दी। दोस्तों के बीच पोस्ट और क्रैप को लोकप्रिय बनाने वाले 'ऑर्कुट` ने कभी भी अपने उपयोगकर्ताओं की संख्या का खुलासा नहीं किया। हालांकि अपनी वेबसाइट के अनुसार, 'ऑर्कुट` के 50.6 प्रतिशत उपयोगकर्ता ब्राजील से थे। तो दूसरी ओर 20.44 प्रतिशत उपयोगकर्ता भारत से थे। जबकि अमेरिका में 17.78 प्रतिशत और पाकिस्तान में 0.86 प्रतिशत 'ऑर्कुट` के उपयोगकर्ता थे। सोशल नेटवर्किंग साइट की दुनिया में 'ऑर्कुट` का उदय 2004 में हुआ था, जबकि इसी साल फेसबुक की स्थापना हुई। लेकिन आज सोशल नेटवर्किंग की दुनिया में फेसबुक के 1.28 अरब उपयोगकर्ता है। 

 हिंदी डोमेन नाम का षुभारंभ

15 अगस्त यानी स्वतंत्रता दिवस से आप वेब ब्राउज़र पर हिंदी (देवनागरी) में वेबसाइट का नाम लिखकर उसे देख सकेंगे। डिपार्टमेंट ऑफ इन्फर्मेशन टेक्नॉलॉजी एंड इलेक्ट्रॉनिक्स (क्मपजल्) स्वतंत्रता दिवस के दिन हिंदी लैंग्वेज डोमेन नाम लॉन्च करने वाला है, जिससे ग्रामीण और दूर&दराज के इलाकों में इंटरनेट की पहुंच को बढ़ावा मिलेगा। सरकार की तरफ से हिंदी में इंटरनेशनल डोमेन नेम्स (प्क्छे) लागू किए जाने के बाद पीएमओ की वेबसाइट (चउपदकपंण्दपबण्पद) को देवनागरी में (प्रधानमंत्री.भारत) लिखा जा सकता है।

नेशनल इंटरनेट एक्सचेंज ऑफ इंडिया (छप्ग्प्) के चीफ एग्ज़ेक्युटिव गोविंद के अनुसार 'इस स्वतंत्रता दिवस पर .ठींतंज को देवनागरी क्रिप्ट में लॉन्च करने का प्रस्ताव है।श् छप्ग्प् और ब्&क्।ब् (सेंटर फॉर डिवेलपमेंट ऑफ अडवांस्ड कंप्यूटिंग) जैसी कई सरकारी एजेंसियों के साथ .भारत कंट्री कोड टॉप लेवल डोमेन का काम नीतिगत स्तर पर पूरा किया जा चुका है।

आपके अनुसार 'इंटरनेट एक ग्लोबल रिसोर्स है और देश के सामाजिक&आर्थिक विकास में इसकी अहम भूमिका है। इस कदम से देश के करीब 50 करोड़ हिंदी भाषी लोगों को फायदा पहुंचेगा।` इससे उन लोगों को ज्यादा फायदा होगा, जिनकी पहली भाषा हिंदी है और जो इंग्लिश अक्षरों का इस्तेमाल करते हुए इंटरनेट नहीं चला सकते। इसके बाद बंगाली, पंजाबी, गुजराती, तमिल और उर्दू जैसी कई भाषाओं में इसे लाने की सरकार की योजना है।

सरकार.भारत और शिक्षा.भारत को केवल सरकारी और शैक्षिक संस्थानों के लिए रखा गया है। राज्यों और केंौ शासित प्रदेशों .भारत डोमेन के तहत अपने&अपने नाम रजिस्टर कराने को कहा गया है।

भारतीयों के हाथों में गूगल की कमान

हाल तक निकेश अरोड़ा गूगल के चीफ बिजनेस ऑफिसर और सबसे ज्यादा सैलरी पाने वाले एग्जेक्युटिव थे। अब वह कंपनी छोड़कर जा रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद 60 अरब डॉलर की दिग्गज ग्लोबल सर्च कंपनी की कमान तीन भारतीय इंजीनियर्स के हाथों में रहेगी।गूगल को जहां से ताकत मिलती है, वे काम अमित सिंघल, सुंदर पिचाई और श्रीधर रामास्वामी के जिम्मे हैं। ये तीनों सीधे गूगल के को&फाउंडर और सीईओ लैरी पेज को रिपोर्ट करते हैं। वे गूगल के उस ग्रुप का हिस्सा हैं, जिसे एल&टीम यानी 'लैरी की टीम` के नाम से जाना जाता है। इनोवेशन और नए प्रॉडक्ट्स लाने का काम यही तीन लोग करते हैं और कंपनी के 40,000 एंप्लॉयीज में से ज्यादातर उन्हें रिपोर्ट करते हैं। सिंघल, पिचाई और रामास्वामी भी अरोड़ा की तरह वाइस प्रेसिडेंट हैं। वे गूगल के टॉप 8 एग्जेक्युटिव्स वाले ग्रुप का हिस्सा हैं। गूगल के ऐड प्रॉडक्ट्स की इंजीनियरिंग रामास्वामी के जिम्मे है। गूगल की कमाई में विज्ञापन का सबसे बड़ा रोल है। सिंघल सर्च ऑपरेशंस हेड करते हैं और वह 'गूगल फेलो` भी हैं। कंपनी में यह खिताब टॉप साइंटिस्ट्स को ही मिलता है। पिचाई कंपनी के मौजूदा 'हॉट बिजनेसेज`& क्रोम, एंड्रॉयड और एप्स चलाते हैं। उन्हें कभी माइक्रोसॉफ्ट की टॉप पोस्ट का दावेदार माना जाता था। हालांकि इस साल फरवरी में यह पद सत्या नाडेला को मिला। पिचाई को 2013 में ऐंड्रॉयड का जिम्मा सौंपा गया था। ऐंड्रॉयड वह ऑपरेटिंग सिस्टम है, जिस पर दुनिया के 70 पर्सेंट स्मार्टफोन चलते हैं।

गूगल के फाउंडर लैरी पेज ने ब्लूमबर्ग बिजनस वीक को दिए हालिया इंटरव्यू में कहा था, 'पिचाई को टेक्नॉलॉजी की जबरदस्त समझ हैं। नए प्रॉडक्ट्स के बारे में सोचने में उनका जवाब नहीं है। इस तरह का कॉम्बिनेशन बहुत कम लोगों में दिखता है। इसी वजह से वह ग्रेट लीडर हैं। 'गूगल यह जानकारी नहीं देती है कि इन तीनों की सैलरी कितनी है और उन्हें कंपनी के कितने स्टॉक्स सैलरी पैकेज के तौर पर दिए गए हैं।

क्या इन तीनों में से कोई एक किसी दिन गूगल का सीईओ बन सकता है? कुछ लोगों का कहना है कि अरोड़ा के मुकाबले इनमें से किसी एक के सीईओ बनने के चांसेज ज्यादा हैं। माइक्रोसॉफ्ट इंडिया के फॉर्मर चेयरमैन रवि वेंकटेशन ने कहा, 'इनोवेशन पर निर्भर किसी प्रॉडक्ट कंपनी को टेक्नॉलॉजी में महारत रखने वाले बॉस की जरूरत होगी।' ईएमए पार्टनर्स इंटरनेशनल के मैनेजिंग पार्टनर के सुंदरेशन का कहना है कि गूगल जैसी कंपनियों की रीढ़ टेक्नॉलॉजी है। इन तीन भारतीयों के पास वह खूबी है, जो उन्हें गूगल का बॉस बना सकती है। अरोड़ा में यह खूबी नहीं थी।