विज्ञान समाचार

(02/Feb/2015)

हाथ बनेगा स्मार्टफोन!

भला क्या ऐसा भी हो सकता है कि आपके फोन पर आने वाला कोई भी मैसेज, ईमेल आप अपने हाथ पर ही पढ़कर उसका रिप्लाई भी कर सकें। इसके साथ ही वॉयस कॉल भी अटेंड कर सकें। जी हां, अब ऐसा हो सकता है क्योंकि एक ऐसी रिस्ट बैंड आ चुकी है जो आपके हाथ को ऐसी टचस्क्रीन में बदलने में सक्षम है और स्मार्टफोन और टेबलेट से किए जाने वाले सारे काम आप अपने हाथ की स्किन पर ही कर सकते हैं। यह अनोखी रिस्ट बैंड सीक्रेट ब्रेस्लेट नाम से आई है। लगभग 6 महीनों की कड़ी मेहनत से बनाई गई यह रिस्ट बैंड एक प्रोजेक्टर तथा 8 प्रोक्सिमिट सेंसर के जरिए यह कमाल करती है जिससे आपके हाथ स्किन अपने आप टचस्क्रीन में बदल जाती है। इसे एक ट्विस्ट ऑफर दी रिस्ट के तहत एक्टिवेट करना होता है। इसके बाद यह पहनने वाले व्यक्ति के हाथ पर एक टचस्क्रिीन बना देती है। सीक्रेट ब्रेस्लेट रिस्ट बैंड वाय-फाय, ब्लूटुथ तथा माइक्रोयूएसबी के जरिए एंड्रॉयड स्मार्टफोन और टेबलेट से कनेक्ट हो जाती है। फिर यूजर के स्मार्टफोन अथवा टेबलेट पर आने वाले किसी भी मैसेज, ईमेल अथवा फोन कॉल की हर जानकारी यूजर अपने हाथ पर ही देख सकता है। इतना ही नहीं बल्कि अपनी उंगलियों की सहायता से ई-मेल और मैसेज को ऊपर-नीचे, आगे-पीछे तथा छोटा-बड़ा करके भी देख सकते हैं। इस रिस्ट बैंड को 16 जीबी और 32 जीबी इंटरनल मेमोरी के साथ लाया गया है जिसके तहत किसी भी डेटा को इसमें सेव किया जा सकता है। जल्द ही यह डिवाइस मार्केट में लगभग 25 हजार रूपए कीमत के साथ मिलने लगेगी।

पैसे ही नहीं, अब एटीएम से दवाएं भी निकलेंगी

रुपये के बाद अब दवाइयों के लिए भी हेल्थ एटीएम होगा। भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में हेल्थ एटीएम का सपना जल्द ही साकार होगा, क्योंकि कुछ राज्य सरकारें सरकारी-निजी भागीदारी के माध्यम से इस तरह के हेल्थ एटीएम स्थापित करने पर विचार कर रही हैं। स्वास्थ्य क्षेत्र में काम करने वाला गैर सरकारी संगठन विश फाउंडेशन जल्द ही राजस्थान में एक परियोजना की शुरुआत करेगा, जिसके माध्यम से देश भर में राज्य सरकारों की साझेदारी में हेल्थ एटीएम लगाया जाएगा। विश फाउंडेशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी  सौमित्र घोष ने कहा कि राजस्थान में परियोजना की शुरुआत जनवरी में होगी। ओडिशा और मध्यप्रदेश में ऐसी ही शुरुआत के लिए बातचीत अंतिम चरण में है। उन्होंने कहा कि हमें लगता है कि प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा देश की महत्वपूर्ण कड़ी है। हमारे पास स्वास्थ्य सेवा के लिए काम करने वाले अन्वेषकों का डेटा बेस है, जिनके विचारों को प्रयोगशाला में पूरी तरह से परीक्षण के बाद लागू किया जाएगा। घोष ने कहा कि पहल के तहत सर्वप्रथम सरकारों से बातचीच करना, उनकी जरूरतों की पहचान करना, उसके बाद उनकी मांग के मुताबिक नवप्रवर्तन से उन्हें अवगत कराना है। सरकारी और निजी क्षेत्र के 200 से अधिक लोगों ने स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में नवाचारों को लाने पर चर्चा की। इस पहल का उद्देश्य गरीबों को कम लागत वाले विशेष तौर पर डिजाइन किए गए ग्लूकोमीटर्स, यूरिन एनालाइजर, दूरसंचार से जुड़े हेल्थ एटीएम और अन्य उपकरणों का फायदा दिलाना है।

तनाव से सिजोफ्रेनिया

तनाव को अब आप हल्के में लेना बंद कीजिए, क्योंकि अगर यह स्थायी तौर पर आप पर हावी रहा, तो आपकी प्रतिरक्षा कोशिकाओं में बदलाव कर यह सिजोफ्रेनिया जैसी गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है। एक शोध में यह बात सामने आई है। शोध के लिए शोधकर्ताओं ने ‘माइक्रोग्लिया’ नामक एक खास प्रकार की फैगोसाइट कोशिकाओं पर अपना ध्यान केंद्रित किया। फैगोसाइट्स दरअसल बड़े आकार वाली श्वेत रक्त कणिकाएं हैं, जो रोगाणुओं और अन्य बाहरी कणों को नष्ट करने का काम करती हैं। शोध में यह बात सामने आई है कि सामान्य परिस्थितियों में माइक्रोग्लिया दो तंत्रिका कोशिकाओं की मरम्मत का काम करती हैं, जबकि अगर यह एक बार अत्यधिक सक्रिय हो जाए, तो तंत्रिका कोशिकाओं को नष्ट भी कर सकती हैं, जिसके कारण दिमाग में सूजन हो सकता है। माइक्रोग्लिया के अत्यधिक सक्रिय होने के कारणों में से एक तनाव है, जिसके परिणाम स्वरूप सिजोफ्रेनिया जैसी गंभीर बीमारी का जोखिम बेहद बढ़ जाता है। षोधकर्ताओं ने इस बात का खुलासा किया है कि जो भी व्यक्ति स्थायी तौर पर तनाव की गिरफ्त में है, उसे मानसिक रोग होने का खतरा है। यह अध्ययन विज्ञान की पत्रिका ‘रूबिन’ में प्रकाशित हुआ है।

मोटापे से होता है हर साल पाँच लाख लोगों को कैंसर

विष्व भर में हर साल कैंसर के चार लाख इक्यासी हजार से अधिक मामले मोटापे के कारण ही होते हैं। इंटरनेशनल एजेंसी फॉर रिर्सच ऑन कैंसर के मेलिना अर्नाल्ड की अगुवाई में किए गए एक शोध के अनुसार विकसित देशों में साल 2012 में कैंसर के कुल मामलों में से एक चौथाई मामले जो लगभग एक लाख 18 हजार थे, में इस बीमारी का मुख्य कारण मोटापा था। अपने शोध के लिए डॉ. अर्नाल्ड ने 2012 में 184 देशों में कैंसर और उससे होने वाली मौत के आंकड़ों को इकट्ठा कर एक मॉडल तैयार किया। बढ़ा हुआ बॉडी मास इंडेक्स कैंसर के लिए उत्तरदायी है। अध्ययन से यह भी पता चला कि मोटापे के कारण महिलाओं को कैंसर का खतरा पुरुषों के मुकाबले अधिक होता है। महिलाओं में इससे गर्भाशय और स्तन का कैंसर जबकि पुरुषों में किडनी का कैंसर मोटापे की देन है। डॉ. अर्नाल्ड कहते हैं कि विकसित देशों में महिलाओं में कैंसर के 8 प्रतिशत मामले और पुरुषों में 3 प्रतिशत मामले बढ़े हुए वजन के कारण हैं।