विज्ञान समाचार

(09/Jan/2015)

पेट्रोल कारों को पीछे छोड़ देंगी इलेक्ट्रिक कारें

अब एक ऐसी बैटरी आ चुकी है जिसके दम पर इलेक्ट्रिक कारें पेट्रोल और डीजल कारों को तगड़ी टक्कर देती हुई नजर आएंगी। वैज्ञानिकों ने एक ऐसी अनोखी लीथियम बैटरी को विकसित किया है जिसे इलेक्ट्रिक कारों में लगाते ही उनकी संचालन क्षमता 3 गुना तक बढ़ जाएगी। इस बैटरी के अगले साल तक वृहद पैमाने पर उत्पादन होने की उम्मीद है। इसकी एक और खास बात ये है इस बैटरी को लगाने के बाद कार के रख-रखाव पर होने वाला खर्च भी घट सकता है। मेसाचुसेट्स इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नॉलॉजी (एमआईटी) के वैज्ञानिकों द्वारा विकसित यह बैटरी एक बड़े दायरे में तापमान को बर्दाश्त कर सकती है। आइरिश टाइम्स के मुताबिक एमआईटी के किचाओ के अनुसार इससे लैपटॉप और स्मार्टफोन दोगुने अधिक समय तक चल पाएंगे। किचाओ ने बैटरी का विकास पूर्व प्रोफेसर और बैटरी विशेषज्ञ डोनाल्ड सैडोवे के साथ मिलकर किया है। अभी इलेक्ट्रिक कारों में जिस बैटरी का इस्तेमाल होता है, वह जल्दी गर्म हो जाती है और यदि कार रोक कर उसे ठंडा न किया जाए, तो उसमें आग पकड़ लेती है। नई बैटरी वर्तमान बैटरी से करीब 20 फीसदी सस्ती हो सकती है। हू ने उम्मीद जताई है कि 2016 की पहली छमाही तक इस बैटरी का उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक श्रेणी में उत्पादन होने लगेगा और दूसरी छमाही में इलेक्ट्रिक कारों में उपयोग होने लगेगा।

हाइड्रोजन से चलेगी, किराये पर मिलेगी

हालांकि हाइड्रोजन ईंधन से चलने वाली इस इलेक्ट्रिक कार पर अभी वेल्स में काम चल ही रहा है लेकिन यह किसी कार्बन डाइऑक्साइड फ्री व्हीकल से कई मामलों में ज्यादा लगती है। रिवरसिम्पल के फ़ाउंडर और पेशे से इंजीनियर ह्यूगो के अनुसार पिछले सौ सालों में कम्बस्टन इंजन के लिए डिजाइन की गई गाड़ियों में हाइड्रोजन ईंधन का सिस्टम फिट किए जाने की कोशिश की जाती रही लेकिन हमने हाइड्रोज़न फ़्यूल को ध्यान में रखते हुए ये कार डिजाइन की है। इस तकनीक में गाड़ी के पिछले हिस्से में रखे गए एक टैंक से कम्प्रेस्ड हाइड्रोजन कार के अगले भाग में रखे फ्यूल सेल तक जाती है। यह फ्यूल सेल कम्प्रेस्ड हाइड्रोजन को बिजली में बदल देती है। इस बिजली से कार के चारों मोटर चलते हैं। ये मोटर कार के चारों पहियों के साथ जुड़े हुए हैं। इस तकनीक की वजह से रिवरसिंपल को गाड़ी में गियरबॉक्स लगाने की झंझट से छुटकारा मिल गया।

अब ड्राइवर डैशबोर्ड पर लगे बटनस् को दबाकर गाड़ी को आगे, पीछे या न्यूट्रल में कर सकता है। इस गाड़ी में चक्कों को छोड़कर घूमने वाली और कोई चीज नहीं है। इस गाड़ी में धातु से धातु के संपर्क वाली कोई बात नहीं है। किसी तरह के लुब्रीकेंट की जरूरत भी नहीं है। ह्यूगो स्पॉवर्स की ये कार ब्रेक लगाने पर भी बिजली पैदा कर सकती है जिसे स्टोर करके रखा जाना है। हालांकि इस कार का अंतिम डिजाइन अभी तय नहीं है लेकिन इसके प्रोटोटाइप का वजन 520 किलो है। स्पॉवर्स का दावा है कि 12 फुट लंबी ये कार ज़ीरो से 50 किलोमीटर प्रति मील की रफ्तार पकड़ने में आठ सेकंड का वक्त लेगी और फुल टैंक होने पर यह 300 किलोमीटर का सफर तय करेगी।

इसकी जगह पर उपभोक्ताओं से एक मासिक फीस ली जाएगी जो कि कंपनी को दिए जाने वाले किराए की तरह होगा। इसमें कार का बीमा, फ़्यूल और नियमित मेंटेनेंस शामिल हैं। हालांकि इस तरह के बिजनेस मॉडल पर पहले भी काम किया जा चुका है। हुंडई ने टक्सन इलेक्ट्रिक एसयूवी को अमरीका में तीन साल के लिए 499 डॉलर प्रति महीने के किराये पर देने की पेशकश की थी जिसमें फ़्यूल और रखरखाव दोनों ही शामिल थे। अनुमान है कि रिवरसिंपल का किराया 720 डॉलर प्रति महीने के करीब तय किया जा सकता है लेकिन स्पॉवर्स को लगता है कि उपभोक्ताओं के रुझान के मुताबिक यह बदल सकता है और इससे वैकल्पिक ईंधन के लिए बुनियादी ढांचा तैयार करने में सहूलियत हो सकती है। स्पावर्स के अनुसार हमने महज एक कार नहीं बनाई बल्कि एक समाधान तैयार किया है। यह एक ऐसा बिज़नेस मॉडल है जो 21वीं सदी की जरूरतों के मुताबिक फिट बैठता है। यह कार 2017 के मध्य तक सड़कों पर उतारी जा सकती है।

सबसे नन्हा उड़नेवाला रोबोट

अमरीकी वैज्ञानिकों ने कीट के आकार का उड़ने वाला एक रोबोट बनाया है। यह रोबोट कीट की तरह फुर्तीला, चालाक और तेज है। यह कीट रोबोट कार्बन फाइबर से बनाया गया है। इसका वजन एक ग्राम से भी कम है। अमरीकी वैज्ञानिकों द्वारा ईज़ाद किए गए इस कीट रोबोट के पास ख़ास सुपर फास्ट इलेक्ट्रॉनिक मांसपेशियां हैं। ये मांसपेशियां इसके पंखों को गति और ताक़त देती हैं। इसको बनाने वाले हार्वर्ड विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों का कहना है कि इस तरह के नन्हें रोबोट का इस्तेमाल बचाव कार्यों के लिए बखूबी किया जा सकता है। उदाहरण के लिए ये कीट रोबोट ढही हुई इमारत के मलबों के बीच के छोटे-छोटे बेहद अंदरुनी हिस्सों में आ-जा सकते हैं। इस कीट रोबोट को डॉ. रॉबर्ट वूड के नेतृत्व में हार्वर्ड विश्वविद्यालय के डॉ. केविन मा और उनकी टीम ने बनाया है। इस टीम का दावा है कि उन्होंने दुनिया का सबसे छोटा उड़ने वाला रोबोट बनाया है। किसी इमारत के ध्वस्त होने पर उसके मलबों में दबे जिंदा लोगों का पता लगाने और उनको बचाने के लिए कीट रोबोट का उपयोग किया जा सकता है। वैज्ञानिकों के अनुसार कीट के आकार के इस रोबोट में कीट-पतंगों जैसी गजब की फुर्ती है। अपनी इसी फुर्ती के कारण ही यह किसी भी तरह के गंभीर प्रहार से आराम से बच निकलने में कामयाब हो जाता है। कीट रोबोट की ये चुस्ती काफी हद तक उसके पंखों की गति के कारण संभव हो पाती है। बेहद तीव्र गति से उड़ते हुए यह रोबोट अपनी उड़ान को संतुलित रख सकता है। हवा में मंडराने या दुश्मन की ओर से किए गए अचानक हमले से निपटने में इसके पंख इसकी मदद करते हैं। किसी भी जीते जागते कीट की तरह ही इस कीट रोबोट के पंख भी एक सेकेण्ड में 120 बार फड़फड़ाते हैं। शोधकर्ताओं ने पंख को गति देने के लिए पीजोइलेक्ट्रिक नाम के एक खास तरह का पदार्थ इस्तेमाल किया है। वोल्टेज देने पर यह फैलता-सिकुड़ता है। बहुत तेजी से वोल्टेज घटाने-बढ़ाने से यह वैसे ही काम करता है जैसे कोई कीट अपनी नन्हीं मांसपेशियों का इस्तेमाल करते हुए अपने पंखों को तेज़ी से फड़फड़ाता हैं। यह रोबोट किसी भी दूसरे कीट की तरह उड़ने में फुर्तीला और चुस्त है। इस शोध का मुख्य लक्ष्य किसी उपयोगी रोबोट को बनाने से ज्यादा यह समझना था कि कोई कीट किस तरह से उड़ता है। इस तरह के उड़ने वाले रोबोट का इस्तेमाल कई तरीके से किया जा सकता है। रोबोट का इस्तेमाल आपदा वाली स्थितियों में कर सकते हैं। जब कोई इमारत गिरती है तो उसके मलबों में दबे जिंदा लोगों का पता लगाने और उनको बचाने के लिए कीट रोबोट का उपयोग कर सकते हैं। इनका इस्तेमाल पर्यावरण की निगरानी के लिए भी किया जा सकता है। इन्हें रिहायशी इलाकों में खास रसायनों या अन्य कारकों का पता लगाने के लिए भेजा जा सकता है।

ये सॉफ्टवेयर डाला तो कभी खराब  नहीं होगा आपका कम्प्यूटर

 अक्सर देखा जाता है कि कम्प्यूटर चाहे नया हो पुराना उसमें कुछ न कुछ खराबी आए दिन आती रहती है, लेकिन अब इस समस्या का समाधान हो चुका है। अब एक ऐसा सॉफ्टवेयर आ चुका है जिसे कम्प्यूटर में इंस्टॉल करने के बाद वो कभी खराब ही नहीं होगा। इस सॉफ्टवेयर को यूएस स्थित यूनिवर्सिटी ऑफ उटाह के कम्प्यूटर वैज्ञानिकों ने मिलकर बनाया है। इसे ए3 अथवा एडवांस्ड अडोप्टिव एप्लीकेशन नाम दिया गया है। ए3 कंप्यूटर सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर में आने वाले वायरस और मालवेयर अपने आप पहचान लेता है। इतना ही बल्कि वो इन्हें अपने आप खत्म भी कर देता है। इसके अलावा यह सॉफ्टवेयर कम्प्यूटर में अपने-आप होने वाले डेमेज्ड को भी अपने आप ठीक करता रहता है। हालांकि फिलहाल इस सॉफ्टवेयर को बिजनेस कम्प्यूटर्स के लिए ही लाया जा रहा है, लेकिन कुछ समय बाद इसे होम कम्प्यूटर्स के लिए लाया जाएगा।