कॅरियर

(16/Dec/2014)

पर्यावरण अभियांत्रिकी में अवसर

 
संजय गोस्वामी
 
 
संपूर्ण विष्व में पर्यावरण प्रदूषण जिस तेजी से बढ़ रहा है उसे कम करने की दिशा में आए दिन नए शोध और विकास कार्य होते रहते हैं। यही वजह है कि इस दिशा में कार्य कर रहे एन्वायरमेंटल इंजीनियर्स की मांग न सिर्फ देश में, बल्कि विदेश में भी काफी बढ़ रही है। एन्वायरमेंटल इंजीनियर्स विज्ञान और इंजीनियरिंग के तरीकों को मिला-जुलाकर पर्यावरण सुधारने का कार्य करते हैं, ताकि लोगों को पीने के लिए स्वच्छ पानी, सांस लेने के लिए प्रदूषण रहित हवा और अनाज आदि पैदा करने के लिए उपजाऊ भूमि मिल सके। पिछले कुछ दशकों में इस क्षेत्र में संभावनाएं और भी बढ़ी हैं। अब इस क्षेत्र के प्रोफेशन्स की मांग कैमिकल, जियोलॉजिकल, पेट्रोलियम और माइनिंग सेक्टर्स से जुड़ी कंपनियों में भी हैं। एक प्रशिक्षित एन्वायरमेंटल इंजीनियर से यह अपेक्षा की जाती है कि वह वेस्ट मैनेजमेंट सिस्टम को इस तरह डिजाइन, कन्सट्रक्ट और मेंटेन करंे, ताकि ग्रामीण और शहरी इलाकों में रहने वाले लोग स्वस्थ जीवन जी सकें। संपूर्ण विष्व में पर्यावरण प्रदूषण जिस तेजी से बढ़ रहा है उसे कम करने की दिशा में आए दिन नए शोध और विकास कार्य होते रहते हैं। यही वजह है कि इस दिशा में कार्य कर रहे एन्वायरमेंटल इंजीनियर्स की मांग न सिर्फ देश में, बल्कि विदेश में भी काफी बढ़ रही है।

पर्यावरण वैज्ञानिक के लिए कुछ विशिष्ट कर्तव्य हैं:

- मिट्टी, तलछट, भूजल और अन्य मीडिया संदूषण की प्रकृति और सीमा की जांच।

- मिट्टी बोरिंग उपकरण,  परीक्षण गड्ढे खुदाई के माध्यम से मिट्टी अन्वेषण ।

- एन्वायरमेंटल मूल्यांकन और संशोधनों के लिए आवश्यकताओं को निर्धारित करने के लिए स्थानीय, राज्य और सरकारी हवा नियमों को लागू और तकनीकी सहायता सेवाओं।

- हवा, पानी, अपशिष्ट, संघीय सुविधाओं, सुधारात्मक कार्रवाई, खनन, जीव विज्ञान और अन्य पर्यावरण कार्यक्रमों के संबंध में कार्यक्रम अनुसंधान, योजना और विकास, अनुमति, अनुपालन की निगरानी, निरीक्षण-प्रवर्तन, एन्वायरमेंटल सेवाओं का प्रदर्शन।

- बजट प्रबंधन, योजना बनाम बजट का मूल्यांकन, लागत नियंत्रण क्षमता का विश्लेषण।

- रिपोर्ट लिखने, सबसे अधिक लागत प्रभावी तरीके से बंद करने की ओर परियोजनाओं को स्थानांतरित करने की योजना का विकास और लागू करने के लिए प्रभावी तरीके।

- आंतरिक और बाहरी दोनों ग्राहकों के साथ बातचीत करने के लिए संचार कौशल का उपयोग।

वेतन

राज्य स्तरीय पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड्स और एन्वायरमेंटल इंजीनियर्स केंद्र के साथ काम करने का अवसर मिलता है। स्टेट पाल्यूशन कंट्रोल बोर्ड के साथ काम कर रहे प्रशिक्षितों को 30 से 50 हजार रुपए तक का वेतन मिल सकता है। वहीं एन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग में एमटेक कर चुके छात्र इस क्षेत्र में 60.70 हजार रुपए तक कमा सकते हैं। बात करें इस क्षेत्र में बड़े स्तर पर होने वाले शोध कार्यों की बात करें तो इसमें 80.90 हजार रुपए तक कमाए जा सकते हैं। अगर आप एक अच्छे रिसर्चर हैं तो भाभा परमाणु अनुसंधान केंद्र, इसरो, डीआरडीओ, पर्यावरण विभाग, आईसीआरए जैसे प्रतिष्ठित संस्थान के साथ जुड़ने का मौका भी आपको मिल सकता है।

शैक्षणिक योग्यता

शैक्षणिक स्तर पर पर्यावरण अभियांत्रिकी स्नातक और स्नातकोतर और शोध तीनों स्तरों पर उपलब्ध है। एन्वायरनमेंटल साइंस में बीएससी तीन वर्षीय स्नातक कोर्स है, वहीं एन्वायरमेंट इंजीनियरिंग में एम-एससी दो साल का स्नातकोतर कोर्स है। इस कोर्स को करने के लिए फिजिक्स, कैमिस्ट्री और बायोलॉजी में हायर सेकेण्डरी उत्तीर्ण पास छात्र एन्वायरमेंटल साइंस में बी-एससी कर सकते हैं। इसी प्रकार एन्वायरमेंटल इंजीनियरिंग में एमएससी करने के लिए छात्र का एन्वायरमेंटल साइंस में बी-एससी होना अनिवार्य है। इस क्षेत्र में स्नातक और स्नातकोत्तर कैमिकल, बायोलॉजिकल, थर्मल, रेडियोएक्टिव और यहां तक कि मैकेनिकल इंजीनियरिंग में क्वालिफाइड छात्रों के लिए भारत में एन्वायरमेंटल इंजीनियिंग के क्षेत्र में काफी स्कोप है। इसके अलावा प्रोसेस इंजीनियरिंग, एन्वायरमेंटल केमिस्ट्री, वॉटर एंड सीवेज ट्रीटमेंट, वेस्ट रिडक्शन मैनेजमेंट, पॉल्यूशन प्रीवेन्शन आदि क्षेत्रों के प्रोफेशनल्श की भी यहां काफी मांग है। गैर सरकारी संस्थाएं और कई सरकारी विभाग भी हरित विकास की दिशा में कार्य कर रहे हैं। शोध से जुड़े कार्यक्रम में भी इस क्षेत्र के प्रोफशनल्श की मांग न सिर्फ देश में, बल्कि विदेश में भी काफी बढ़ रही है। टीचिंग, रिसर्च कंसलटेंट साइंटिस्ट के तौर पर आप इस क्षेत्र में अपना कॅरिअर संवार सकते हैं।

प्रमुख संस्थान

- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई
- भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, कानपुर
- एचबीटीआई, कानपुर
- वी जी टी इंजीनियरिंग संस्थान, मुंबई
- पर्यावरण अध्ययन संकाय, कोचीन विष्वविद्यालय, कोचीन
- वानिकी विभाग, वन्य जीवन और पर्यावरण विज्ञान, गुरु घासीदास विष्वविद्यालय, बिलासपुर
- भारतीय खनिज विद्यापीठ (आईएसएम-धनबाद), धनबाद
- पर्यावरण अध्ययन, स्कूल ऑफ जादवपुर विष्वविद्यालय , कोलकाता
- पर्यावरण अध्ययन, स्कूल ऑफ दिल्ली विष्वविद्यालय , दिल्ली
- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना 
- राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान ,रायपुर
-  पर्यावरण अध्ययन संकाय ,बीएचयू , वाराणसी
 
 
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