कॅरियर

(26/May/2018)

अपराध विज्ञान

संजय गोस्वामी
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
 
जिस समय मानव समाज की रचना हुई अर्थात मनुष्य ने अपना समाजिक संगठन प्रारंभ किया, उसी समय से उसने अपने संगठन की रक्षा के लिए नैतिक, सामाजिक आदेश बनाए। उन आदेशो का पालन मनुष्य का ‘धर्म’ बतलाया गया। किंतु, जिस समय से मानव समाज बना है, उसी समय से उसके आदेशों के विरुद्ध काम करनेवाल भी पैदा हो गए है और जब तक मनुष्य प्रवृति ही न बदल जाए, ऐसे आपराधिक व्यवहार के व्यक्ति बराबर होते रहेंगे। आज के दौर में अपराध दिनोंदिन बढ़ते ही जा रहे हैं। ऐसे में अपराधों की छानबीन के क्षेत्र अपराध विज्ञान में कॅरियर की प्रबल संभावनाएं भी बढ़ रही हैं। अपराध विज्ञान (ब्तपउपदवसवहल) के अन्तर्गत अपराध के प्रति समाज के रवैया, अपराध के कारण, अपराध के परिणाम, अपराध के प्रकार एवं अपराध की रोकथाम का अध्ययन किया जाता है। अगर आप अपराध की जांच-पड़ताल में रूचि रखते हैं तो आपके लिए अपराध विज्ञान बेहतर कॅरियर ऑप्शन हो सकता है। कार्यक्षेत्र का प्रमुख काम है घटना स्थल से अपराधी के खिलाफ सबूत जुटाने में जाँच दल की मदद करना। साथ ही, अपराध से संबंधित परिस्थितियों का अध्ययन करना, अपराध करने का कारण तथा समाज पर इसका प्रभाव जानना इनके कार्यक्षेत्र के अंतर्गत आता है। यह एक ऐसा कॅरियर विकल्प हैं जो तेजी से लोकप्रिय हो रहा है। क्रिमिनोलॉजिस्ट वैज्ञानिक समाज को अपराध से बचाने में मदद भी करता है। अपराध विज्ञान  एक अप्लाइड साइंस है। साथ ही एमएससी और पीएचडी स्तर दोनों पर विज्ञान शिक्षण और स्नातकोत्तर अध्ययन में अपराधियों का पता लगाने के लिए  इसमें वैज्ञानिक सिद्धांतों व तकनीक का प्रयोग किया जाता है। इस कार्य में सहायक होते हैं अपराध स्थल से मिले साक्ष्य। आधुनिकता के साथ अपराध के तरीके बढ़े हैं, तो छानबीन के नया वैज्ञानिक तरीके भी ईजाद हुए हैं।
सभ्यता के विकास के क्रम में भी यद्यपि सभी देशों में संभावित दोषियों के प्रति दोषों के गंभीर परिणाम और दंडयातनाओं का भय उपस्थित करने के लिय कठोर अवरोधक दंड दिए जाते रहे हैं, पर कभी-कभी सुधारात्मक प्रवृत्तियाँ भी उठती रही हैं। अपराध विज्ञानी या का कार्यक्षेत्र लगातार विस्तृत होता जा रहा है। किसी भी तरह की अपराधिक घटना घटने पर पुलिस अपराध विज्ञानी की सहायता लेती है।

चुनौतियाँ 

युवाओं का इस फील्ड के प्रति रुझान बढ़ा है। वर्तमान में अपराध सभ्य समाज के लिए नित नई चुनौतियाँ पेश कर रहा है। कई बार सबूतों के अभाव, ठीक प्रकार से अन्वेषण न होना और कम समय में ही सबूत के नष्ट हो जाने के कारण अपराधी बच निकलने में कामयाब हो जाते हैं। अपराध से निपटने और शातिर अपराधियों द्वारा किए जाने वाले अपराध की गुत्थियों को सुलझाने के नए तौर-तरीके सामने आते रहे हैं। अब इस क्षेत्र में भी विशेषज्ञों का सहारा लिया जाने लगा है। इन विशेषज्ञों को अपराध विज्ञानी के नाम से जाना जाता है और वह अपराध से जुड़ी गुत्थियों को सुलझाने में पुलिस की सहायता करते हैं। यह वह शाखा है जिसके अतर्गत सामाजिक समस्याओँ अथवा समाज को विघटित दशाओं का अध्ययन किया जाता है, क्रिमिनोलॉजी अपराध का वैज्ञानिक अध्ययन है, अपराध स्थल जांच, फोरेंसिक प्रयोगशालाओं, तकनीकी प्रबंधन, परामर्श, अनुसंधान और विकास या मीडिया और जनता की सेवा में एक बेहतर कॅरियर है। अपराध विज्ञान में अध्ययन के कई क्षेत्र हैं अंगुलि छाप, अव्यक्त छाप, कम्प्यूटेशनल आपराधिकी, साइबर अपराध(जांच में सोशल नेटवर्क वेबसाइटों का उपयोग), मोटे तौर पर अपराध विज्ञान मानव आदतों, क्रियाओं और इरादों का अध्ययन है। यह जीव विज्ञान, मनोविज्ञान, सामाजिक कार्य, मानव संसाधन, अर्थशास्त्र, समाजशास्त्र और संगठनात्मक व्यवहार के क्षेत्र में फैला हुआ है। जो जीव विज्ञान, सांख्यिकी, मनोविज्ञान, मनोचिकित्सा, अर्थशास्त्र और नृविज्ञान सहित अपराध विज्ञान के क्षेत्र में उपयोग किया जाता है।

अध्ययन

अपराध विज्ञान, फोरेंसिक  विज्ञान का एक उप-समूह है इसमें कई उप विषय भी शामिल हैं
  • बायोक्रीमिनोलॉजी : आपराधिक व्यवहार के जैविक आधार का अध्ययन
  • नारीवादी अपराध : महिलाओं और अपराधों का अध्ययन
  • आपराधिक विज्ञान : अपराध का पता लगाने का अध्ययन
  • बायोक्रिमिनोलॉजी : आपराधिक व्यवहार के जैविक आधार का अध्ययन
  • नारीवादी अपराध : महिलाओं और अपराधों का अध्ययन
  • आपराधिक विज्ञान : अपराध का पता लगाने का अध्ययन
  • चालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (।थ्प्ै) का अध्ययन
  • अपराध की जांच के लिए स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी का अध्ययन
  • अपराधियों की जांच के लिए डीएनए फिंगर प्रिंटिंग
  • जेल सिस्टम का अध्ययन

अपराधियों की जाँच के लिए डीएनए प्रोफाइलिंग

अपराधियों तक पहुंचने के लिए संदिग्ध लोंगों से पूछताछ घटना से संबंधित सबूतों की जांच परख रक्त के नमूनों की जांच या फिर फिंगर प्रिंट्स के द्वारा अपराधी तक पहुँचने की जटिल एवं श्रमसाध्य लेकिन अनिश्चित विधाएं अब तक के परंपरागत तरीके थे। ऐसे में डीएनए फिंगर प्रिंटिंग की विधा है। जिसमें इसके कारणों, कानून प्रवर्तन द्वारा प्रतिक्रियाएं, और रोकथाम के तरीकों शामिल हैं। यह समाजशास्त्र का उप-समूह है, जो सामाजिक व्यवहार का वैज्ञानिक अध्ययन है। अत्याचार प्रायः इसलिए घटित होते हैं, क्योंकि मनुष्य इसके कुछ सामान्य आधार नहीं तलाशते।  क्रिमिनोलॉजी विज्ञानी व्यक्तियों में उस सामान्य आधार का पता लगाने और व्यक्तिगत आवश्यकता तथा अन्यों के साथ उनके संबंधों के अभाव तथा उनमें कमियों का पता लगाने पर कार्य करते हैं। परंपरागत संगठित अपराधों में अवैध शराब का धंधा, अपहरण, जबरन वसूली, डकैती, लूट, ब्लैकमेल, माफिया आदि का व्यवसाय शामिल किया जाता है। गैर-पारंपरिक अथवा आधुनिक संगठित अपराधों में मनी लॉन्ड्रिंग, जाली नोटों का वितरण, हवाला कारोबार, साइबर अपराध, मानव तस्करी, हथियारों एवं मादक पदार्थों की तस्करी आदि को शामिल किया जाता है। इस क्षेत्र में एक क्रांतिकारी कदम के रूप में सामने आई है। इस विधा द्वारा बच्चे तथा मातापिता के संबंधों की संदिग्धता को दूर करने से ले कर अपराधियों की सटीक पहचानय् सभी कुछ आसानी से किया जा सकता है। डीएनए फिंगर प्रिंटिंग के नाम से लोकप्रिय इस विधा का फिंगर अथार्त् उंगलियों से कुछ भी लेनादेना नहीं है। चूंकि उंगलियों के छाप का उपयोग व्यक्तिय् विशेषकर अपराधियों की पहचान के रूप में बहुत पहले से किया जाता रहा हैय् अतः उसी तर्ज पर इस विधा को भी ‘डीएनए फिंगर प्रिटिंग’ का नाम दे दिया गया। वास्तव में इसे केवल ‘डीएनए टाइपिंग’ (क्छ। ज्लचपदह) या फिर ‘डीएनए प्रोफाइलिंग’ (क्छ। च्तवपिसपदह) ही कहना चाहिए। 

कॅरियर 

अपराध के क्षेत्र में होने वाले कई महत्वपूर्ण केसेज से संबंधित वास्तविक आपराधी को पकड़ने के लिए प्रशिक्षित अपराध विज्ञानी तथा एक्सपर्टस की आवश्यकता बढ़ रही है। जो वैज्ञानिक सिद्वान्तों के आधार पर अपराध की जांच करती है। इसमें घटना स्थल से एकत्रित किए गए साक्ष्यों को नवीनतम तकनीकों के इस्तेमाल से प्रमाणों में बदला जाता है, ताकि अदालत में इन्हें सबूत के तौर पर पेश किया जा सके। वास्तव में अपराध विज्ञान अदालत या कानूनी सुनवाई के दौरान प्रयोग किया जाने वाला विज्ञान है। जो उम्मीदवार अपराध विज्ञान के क्षेत्र में कॅरियर बनाना चाहते है, उनके लिए है मेडिकल साइंस एंड लॉ ज्ञान आवश्यक है अपराध विज्ञान मेडिकल साइंस की एक विशिष्ट श्रेणी है अपराध विज्ञान द्वारा आपराधिक घटना स्थल से सूत्र एकत्रित कर आधुनिक तकनीक के द्वारा प्रमाणितकर साक्ष्य के रूप में अपराधियों को न्यायालय में प्रस्तुत किया जाता है। सबूत के के आधार पर अपराधियों को सजा मिलती है इस प्रकार करियर की दृष्टि से बढ़ते आपराधिक मामलों ने कुशल क्रिमिनोलॉजी वैज्ञानिक का महत्व बढ़ा दिया है। खोजबीन के नए तरीकों और विश्लेषण की आधुनिक तकनीकों ने भी इस कार्यक्षेत्र को आकर्षक बनाया है। एक अपराध विज्ञानी अपराध से संबंध रखने वाले पीडि़त और घटना स्थल से प्राप्त सभी सबूतों का विश्लेषण करता है और संदिग्ध के पास पाए गए प्रमाणों से उसका मिलान कर अदालत के सामने अपना विशेषज्ञ साक्ष्य प्रस्तुत करता है। इन साक्ष्यों के अंतर्गत फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में जेनेटिक फिंगरप्रिंटिंग, खून के धब्बे, लार, अन्य शारीरिक द्रव, बाल, फिगरप्रिंट, फुटवियर, विस्फोटक, ऊतकों के नमूने आदि, से संबंधित विषय आते है। अपराध के बाद की जांच के लिए रक्त, ब्लड ग्रुप तथा अन्य शारीरिक द्रव्यों का अध्ययन करते है। इसमें शिकार की पहचान से जुडे तथ्यों जैसे- लिंग, उम्र, स्वास्थ्य स्तर, पैतृक पृष्ठभूमि और मृत्यु के कारण की जांच शामिल होती है। अपराध विज्ञान साइंटिस्ट अवैध दवाओं के उपयोग, चोरी और बरामद किए गए मोटर वाहनों की जांच, अपराधियों की धर पकड़ हेतु आधुनिक तकनीक, आगजनी के मामलों में इस्तेमाल किए गए ज्वलनशील पदार्थों, विस्फोटक तथा चलाई गई गोली के अवशेषों और सूक्ष्म साक्ष्यों का अध्ययन करते हंै। अपराध विज्ञानी  दांतों के अवशेषों, काटने के निशानों का विश्लेषण और चोट का निर्धारण करने के लिए चेहरे की बनावट की जाँच करके सबूत उपलब्ध करवाते हैं। व्यक्तिगत गुण कानून व्यवस्था पर आस्था और जिज्ञासा, तर्क एवं व्यावहारिक सोच, टीम भावना के साथ काम करना, हर तरह के चुनौती से निपटने के लिए तैयार रहना, दूरदर्शी होना बहुत जरूरी है। योग्य अपराध विज्ञानी कई वैज्ञानिक प्रयोगशालाओं और निजी क्षेत्र के लिए प्रयोगशालाओं में सबूत का विश्लेषण के लिए साइंटिस्ट के रूप में काम करते हैं जहां फोरेंसिक लैब है। 

अवसर

क्रिमिनोलॉजी साइंटिस्ट के लिए इंटेलिजेंस ब्यूरो (आईबी), राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी), सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन(सीबीआई), स्टेट पुलिस फोर्स की क्राइम सैल में, केंद्र व राज्य की फोरेंसिक लैब और प्राइवेट डिटेक्टिव एजेंसी में जॉब के अच्छे अवसर हैं। क्रिमिनोलॉजी वैज्ञानिक, सरकारी व निजी कंपनियों, सोशल वेलफेयर डिपार्टमेंट, एनजीओ, रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन, प्राइवेट सिक्योरिटी तथा डिटेक्टिव एजेंसियों में रोजगार प्राप्त कर सकते हैं। इसके अलावा, फोरेंसिक वैज्ञानिक काउंसलर तथा फ्रीलांसर के तौर पर भी कार्य कर सकते हैं। अपराध विज्ञान में वैज्ञानिक सटीक, व्यवस्थित, विस्तृत और निष्पक्ष होना चाहिए।
अपराध विज्ञान में स्नातक की डिग्री कोर्स करने के बाद क्राइम से संबंधित इंटेलिजेंस, लॉ रिफार्म रिसर्चर, कम्युनिटी करेक्शन को ऑर्डिनेटर, ड्रग पॉलिसी एडवाइजर, कंज्यूमर एडवोकेट, इनवायरनमेंट प्रोटेक्शन एनालिस्ट के पद पर कार्य कर सकते हैं। कमाई आज जिस तरह टेक्नॉलॉजी में तेजी से प्रगति हो रही है उसी तेजी से क्राइम भी बढ़ रहा है। दिनोंदिन बढ़ते हुए क्राइम को देखकर विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय तक इस क्षेत्र में ऐसे प्रोफेशनल्स की बहुत जरूरत पड़ेगी। 
क्रिमिनोलॉजी अपराध का एक अंतः विषय विज्ञान है जिसमें नागरिक सास्त्र,आपराधिक न्याय,राजनीति विज्ञान, मनोविज्ञान, अर्थशास्त्र, प्राकृतिक विज्ञान, नृविज्ञान, आपराधिक सिद्धांत, डिजिटल और मल्टीमीडिया विज्ञान, इंजीनियरिंग विज्ञान, न्यायशास्त्र, ओडोंटलजी, पैथोलॉजी/जीवविज्ञान, मनोरोग और व्यवहार विज्ञान, पूछताछ की दस्तावेज, विष विज्ञान आदि के बारे में समझाया जाता है। क्रिमिनोलॉजी कोर्स में अच्छी दृष्टि, अच्छा स्वास्थ्य, फिटनेस होना बहूत जरूरी है अपराध के ज्ञान के सत्यापित सिद्धांतों का एक महत्वपूर्ण विज्ञान है। इनमें जीव विज्ञान, न्यूरोलॉजी, समाजशास्त्र, मनोविज्ञान, मनोरोग विज्ञान, राजनीति विज्ञान और अर्थशास्त्र, कानून, अपराध और उपचार की प्रक्रिया के बारे में बताया जाता है। क्रिमिनोलॉजी वैज्ञानिक, अपराध, आपराधिक व्यवहार को समझ पाने में समाज को मदद करता है और साथ ही आपराधिक व्यवहार का अध्ययन  कर लोंगों को समझाते  है और अपराध रोका जा सकता है।

कोर्स 

इस क्षेत्र में करियर बनाने के लिए बीएससी इन अपराध विज्ञान  में दाखिला ले जा सकते हैं जिसकी अवधि तीन वर्ष है। इसके लिए आर्ट या साइंस में बारहवीं पास होना अनिवार्य है। इसके अलावा पोस्ट ग्रेजुएट, डिग्री या डिप्लोमा इन अपराध विज्ञान  भी कर सकते हैं जिसके लिए आर्ट या साइंस विषय में स्नातक डिग्री आवश्यक है।

मुख्य विषय 

बीएससी इन अपराध विज्ञान के अंतर्गत विषय, अपराध विज्ञान, जस्टिस, गणित और कम्प्यूटर विज्ञान की एक सम्मिलित शाखा के रूप में माना जाता है और सूचना सिद्धांत (पदवितउंजपवद जीमवतल), कम्प्यूटर सुरक्षा और इंजीनियरिंग से काफी ज्यादा जुड़ा हुआ है। आधुनिक समय में अपराध विज्ञान में मुख्य रूप से जनरल फोरेंसिक विज्ञान क्रिमिनॉलॉजी एंड जस्टिस, क्राइम सीन इनवेस्टिगेशन, पैथोलॉजी एंड मेडिसिन एंथ्रोपोलॉजी, फोरेंसिक डेंटिस्ट्री, क्लीनिकल फोरेंसिक मेडिसिन, फॉरेंसिक ऑडिट, फोरेंसिक कृषि, डीएनए और फिंगर प्रिंट, फोरेंसिक एंटोमोलाजी, फोरेंसिक कूट-लेखन, फोरेंसिक सेरालॉजी, फोरेंसिक केमिस्ट, न्यायिक विधि, मोटर वाहन समन्वय प्रणाली, फोरेंसिक टॉक्सिकॉलॉजी, फोरेंसिक डेंटिस्ट्री फोरेंसिक, माइक्रोस्कोपी, स्कैनिंग, एनएमआर स्पेक्ट्रोस्कोपी, स्पेक्ट्रोस्कोपीय इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोफोटोमेट्री, वाद्य विश्लेषण क्रोमैटोग्राफी आदि विषय का अपराध विज्ञान में  अध्ययन किया जाता है।

प्रमुख शिक्षण संस्थान

  • स गुरु गोबिंद सिंह इंद्रप्रस्थ यूनिवर्सिटी, दिल्ली 
  • इंस्टीट्यूट ऑफ अपराध विज्ञान एंड क्रिमिनोलॉजी, 
  • बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी, बुंदेलखंड
  • अपराध और फॉरेंसिक विज्ञान विभाग, डॉ। हरिसिंह गौर विश्वविद्यालय
  • अपराध विज्ञान और फॉरेन्सिक विज्ञान में अध्ययन विभाग, कर्नाटक विश्वविद्यालय
  • फॉरेन्सिक विज्ञान विभाग, मद्रास विश्वविद्यालय
  • डिपार्टमेंट ऑफ क्रिमिनोलॉजी अपराध विज्ञान, पंजाब यूनिवर्सिटी, पंजाब
  • अपराध विज्ञान विभाग, दिल्ली यूनिवर्सिटी, नई-दिल्ली
  • डॉ भीमराव अंबेडकर यूनिवर्सिटी, आगरा
  • लोकनायक जय प्रकाश नारायण नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ क्रिमिनोलॉजी, नई-दिल्ली
  • आचार्य एन.जी.रंगा कृषि विश्वविद्यालय, (ए.एन.जी.आर.ए.यू.), हैदराबाद, आंध्रप्रदेश
  • कृषि विश्वविद्यालय, उदयपुर
  • फॉरेंसिक साइंस स्कूल, इलाहाबाद
  • सैम हिग्गिनबॉटम कृषि, प्रौद्योगिकी एवं विज्ञान संस्थान,इलाहाबाद, उत्तर प्रदेश
  • इलाहाबाद एग्रिकल्चरल इन्स्टीट्यूट (डीम्ड यूनिवर्सिटी), इलाहाबाद
  • विधान चन्द्र कृषि विश्वविद्यालय (बी.सी.के.वी.वी.), पश्चिम बंगाल
  • पटना विश्वविद्यालय, पटना
  • एमिटी विश्वविद्यालय, नई-दिल्ली
  • आणन्द कृषि विश्वविद्यालय, आणन्द, गुजरात
  • नेशनल लॉ स्कूल, बेंगलुरु
  • राजा एल लॉ कॉलेज, बेलगाम
  • पुणे लॉ कॉलेज, पुणे
 
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