कॅरियर

(19/Aug/2017)

जेनेटिक इंजीनियरिंग

संजय गोस्वामी
 
विज्ञान की एक अत्याधुनिक शाखा है। जिसमें सजीव प्राणियों के डीएनए कोड में मौजूद जेनेटिक को अत्याधुनिक तकनीक के जरिए परिवर्तित किया जाता है। यह क्षेत्र बायोटेक्नॉलॉजी के अंतर्गत ही आता है। इन दिनों जेनेटिक इंजीनियर की आवश्यकता इंडिया के साथ-साथ विदेश में तेजी से बढ रही है। मानव स्वास्थ्य की रक्षा के लिए अनुवांशिक इंजीनियरिंग अति महत्वपूर्ण है। लेकिन इसका उपयोग हिंसक या अनैतिक क्रिया के लिए करना गलत है, मोनोक्लोनल एन्टीबाडीज, डी.एन.ए. प्रोब, रिकाबिनेन्ट, वैक्सीन्स, जीन थेरेपी की तकनीक आदि रोग निदान के लिये उपयोगी हैं। कोशिकाओं से विलग किये गये एन्लाइम्स खाद्य संसाधन, पेय सुधार, डिटर्जेन्ट, बायोसेन्सर बनाने में उपयोगी हैं। आणिवक जैविकी की तकनीकों के उपयोग से एन्जाइम्स के अमीनों अम्ल कणों में फेरबदल करके उनके गुणों में सुधार करने के कई प्रयास सफल हुए हैं। जेनेटिक तकनीक के जरिए जींस की सहायता से पेड़-पौधे, जानवर और इंसानों में अच्छे गुणों को विकसित किया जाता है। जेनेटिक तकनीक के द्वारा ही रोग प्रतिरोधक फसलें और सूखे में पैदा हो सकने वाली फसलों का उत्पादन किया जाता है। इसके जरिए पेड़-पौधे और जानवरों में ऐसे गुण विकसित किये जाते हैं, जिसकी मदद से इनके अंदर बीमारियों से लड़ने की प्रतिरोधिक क्षमता विकसित की जाती है। इस तरह के पेड़-पौधे जीएम यानी जेनेटिकली मोडिफाइड फूड के रूप में जाने-जाते हैं। अनुवांशिक इंजीनियर को यह भी देखना चाहिए कि मानव स्वास्थ्य पर या हमारे पर्यावरण पर कोई इसका हानिकारक प्रभाव तो नहीं है।
जेनेटिक इंजीनियरिंग में मानव जीवन के लगभग सभी पहलुओं को प्रभावित किया है। इसके क्रिया क्षेत्र का विस्तार पर्यावरण से लेकर मानव स्वास्थ्य नए नए साँचे, टीके एवं मानव जनन के नियंत्रण तक है। अनुवांशिक इंजीनियरी का विश्व व्यापार में महत्वपूर्ण योगदान है और यह रोजगार, उत्पादन एवं व्यापार में नये-नये अवसर पैदा कर रही है। बायोटेक्नॉलॉजी के क्षेत्र में जेनेटिक इंजीनियरिंग का इस्तेमाल वृहत पैमाने पर होता है, क्योंकि यह इंडस्ट्री फॉर्मास्युटिकल प्रोडक्ट जैसे कि इंसुलीन और दूसरी दवाइयों के लिए एक हद तक जेनेटिक पर ही निर्भर रहती है। आनुवंशिक इंजीनियरिंग से बोनसाई पेड़ बनाये गये हैं ये आनुवंशिक रूप से बौने पौधे को छोटे पात्र में उगाकर परिपक्व बना दिया जाता है। बोनसाई छोटे पात्रों में सजावटी वृक्षों या झाडि़यों को उगाने की एक कला है जिसमें उनकी वृद्धि को बाधित कर दिया जाता है। पौधा उगाने की इस विशेष पद्धति में ट्रे जैसे कम ऊँचाई के गमले या किसी अन्य पात्र में पौधे को उगाया जाता है इस तरह जैव विविधता के संरक्षण एवं सतत विकास में अनुवांशिक इंजीनियरी का महत्वपूर्ण योगदान है। जेनेटिक इंजीनियरिंग में सूक्ष्मजीवों, खमीर, बैक्टीरिया, का उपयोग खाद्य, कार्बोहाइड्रेट पॉलिमर, जैव रसायन (जैसे अमीनो एसिड), पनीर, दही, बियर, वाइन का उत्पादन करने के लिए इस्तेमाल किया गया है। फसलों की अनेक प्रमुख चुनौतियाँ हैं, जैसे- कन्द फसलों की भारी एवं विकारी प्रकृति, फसल तैयार होने तक लगने वाला लंबा समय, वानस्पतिक प्रजनन व फैला व प्रवृत्ति तथा आनुवंशिक गुणों में सुधार लाने में जेनेटिक इंजीनियर का महत्वपूर्ण योगदान है। जेनेटिक इंजीनियरिंग द्वारा जीव के स्टेम कोशिकाओं को संशोधित किया गया है, इन विधियों से मानव स्टेम कोशिकाओं में डीएनए और प्रोटीन विकसित करने की प्रक्रिया चिकित्सा में सुधार लाने पर ध्यान दिया जाएगा। जेनेटिक इंजीनियरिंग के अनुसंधान परियोजना से मरीजों के लिए व्यक्तिगत दवाओं को विकसित करने के लिए एवं स्टेम सेल बनाने के लिए डॉक्टर स्टेम सेल इंजीनियरिंग पाठ्यक्रमों से सक्षम है। जेनेटिक इंजीनियरिंग का कमाल कुछ वर्ष पहले ही दुनिया देख चुकी है, जब इयान विल्मुट और उनके सहयोगी रोसलिनने जेनेटिक तरीके से भेड़ का बच्चा, डोली (५ जुलाई १९९६-१४ फरवरी २००३) तैयार किया था। यह हुबहु भेड़ की जेनेटिक कॉपी थी। इसके बाद २६ दिसम्बर २००३ ईवनाम की पहली क्लोन बालिका को एक अमेरिकी दम्पत्ति का कुलचिराग बन चुकी है। मानव क्लोन की पक्षघर संस्था क्लोन एड ने दावा किया है कि तीसरा क्लोन मानव एक जापानी दम्पत्ति के वहाँ जन्म ले चुका है। मानव क्लोन व पशु क्लोन के बाद अब क्लोन से पेड़ तैयार किए जाने लगे हैं। सफेदेवपोपलर में कई सालों से गठिया बीमारी का तोड़ निकालने में जुटे कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय केअनुवांशिक इंजीनियरी विभाग ने अब क्लोन से इसका विकल्प ढूंढ लिया है। कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय के सोंठी में स्थित रिसर्च सेंटर में अच्छी वैरायटी के पेड़ों के क्लोन बनाए जा रहे हैं। रिसच लैब में ये क्लोन टिशूक्लचर से तैयार किए जा रहे हैं।
जेनेटिक इंजीनियरिंग में सूक्ष्म जीव विज्ञान, स्पोन्टेनियस जेनेरेशन, बायोस्टैटिक, बायोजेंसिस, किण्डवन, बीमारियों के जीवाणु का सिद्धांत, सूक्ष्म जीव विविधता - प्रोकेरियोट्स एवं यूकेरियोट्स, माइक्रोएल्गी, माइक्रोफंगी, प्रोटोजोआ, बैक्टीरिया एवं वाइरस, बैक्टीरिया का आकार, व्यवस्था संरचना, की बाहरी दीवार की संरचना, फलैजिला, पिलाई, कैप्सूल, सीथ, प्रोस्थीतिका एवं स्टाक जीन को पता लगाने के लिए किया जाता है। जेनेटिक तकनीक के जरिए वैज्ञानिकों ने ‘बीओनिक पत्ती’ विकसित की है जो किसानों को अपना खुद का उर्वरक उत्पादन करने में मदद कर सकता है और भारत जैसे विकासशील देशों में फसल उत्पादन को बढ़ाकर खाद्य संकट को टालने की क्षमता रखता है। जेनेटिक इंजीनियरिंग में कोशिका जीव विज्ञान, अंतः स्त्रावी विज्ञान, जननजीव विज्ञान, प्रतिरक्षा विज्ञान, विकासात्मक जीवविज्ञान, तुलनात्मक शरीर क्रिया विज्ञान, विकिरण जीव विज्ञान, कालक्रम जीव विज्ञान, सूक्ष्मजीव विज्ञान, भेषज विज्ञान, विष विज्ञान तथा अन्य जैविक क्षेत्र जिसमें उपकरण तथा प्रणाली विज्ञान भी सम्मिलित हैं, जैविक प्रणालियों की कार्य प्रणालियों को अर्न्तदृष्टि प्रदान करते हुए उनके परिवर्तन अथवा कुशल प्रयोग से संबंधित प्रयोग किया जाता है। उच्च जीवों, मानव तथा चिकित्सीय प्रकृति से संबंधित अध्ययन को इस अनुसंधान पत्रिका में प्रकाशित नहीं किया जाता। अगली हरित क्रांति में योगदान देने के लिए शोधकर्ता उर्वरक को बनाने के लिए कृत्रिम पत्ती का निर्माण कर रहे हैं। कृत्रिम पत्ती एक ऐसी सामग्री है जो धूप में रखे जाने पर पानी को हाइड्रोजन और ऑक्सीजन में जोड़े कर अलग अलग करते हुए प्राकृतिक पत्ती की नकल प्रस्तुत करता है।
जेने क्लोनिंग के लिए मोलेकुलर टूल्स विषय के अंतर्गत आणविक विशेषताओं पर आधारित चिकित्सा निदान तथा आण्विक उपकरण को प्रोटीन संसाधन प्रबंधन हेतु कुछ महत्वपूर्ण बिंदु एंजाइम-परिचय और प्रकार उदाहरणों, मेथिलिकेशन प्रकृति बंध एंजाइमों की संवेदनशीलता, डीसीएम और सीपीजी मिथाइलैस, प्रकृति बंध एंजाइमों की स्टार गतिविधि, लेगेज-एक्वोलीडीएनएलेगेज, टी४ डीएनएलेगेज, टी४ आरएनएलिगेज, पोलीयनक्लियोटिडकिनाज, फॉस्फेटस, डीएनए और आरएनएपोलीमरेज़, रिवर्सट्रांस्क्रिप्टेज़, टर्मिनल ट्रांससेर, डीएनएसेस-एक्सोन्यूकेलीज प्, एक्सोन्यूक्सेलस प्प्प्, मूँगबीननुकलेज, आरएनसीएस-आरएनसीआई, आरएनसीए, आरएनएसएएच, टॉपोइसोमारेस आदि उपविषय का अध्ययन किया जाता है।
जेने क्लोनिंग के लिए वेक्टर विषय के अंतर्गत क्लोनिंग वैक्टर, प्लाज्मिड बायोलॉजी, प्लास्मिड वैक्टर आदि उपविषय का अध्ययन किया जाता है। क्लोनिंग तकनीकों के अंतर्गत वृक्ष क्लोनिंग टॉपओ पीसीआर क्लोनिंग जीनएर्ट जीन संश्लेषण, पोलीमरेज़चेन प्रतिक्रिया (पीसीआर) एक वैज्ञानिक तकनीक है विकृति, एनीलिंग, और विस्तार पीसीआर की जांच और निदान में उपयोगी है बीमारियों की बढ़ती संख्या गुणात्मक पीसीआर का इस्तेमाल मानव जीन, बैक्टीरिया और वायरस के जीन को पता लगाने के लिए किया जाता है।
शरीर में उपस्थित अरबों-खरबों कोशिकाओं के क्रियाकलाप डीएनए द्वारा निश्चित किये जाते है। फोरेंसिक विज्ञान के क्षेत्र में जेनेटिक फिंगरप्रिंटिंग, डीएनए फिंगर प्रिंटिंग तकनीक का उपयोग आपराधिक मामलों की गुत्थियां सुलझाने के लिए किया जाता है। विकास मूलक प्रक्रियाओं के लिए प्राकृतिक चयन, आनुवांशिक झुकाव, उत्परिवर्तन और जीन-प्रवाह के प्रभाव में युग्म-विकल्पी आवृत्ति वितरण और परिवर्तन का अध्ययन जनसंख्या आनुवांशिकी कहलाता है। इसमें जनसंख्या उप-विभाजन तथा जनसंख्या संरचना के कारकों पर भी ध्यान दिया जाता है। जनसंख्या आनुवंशिकी सहित जीन थेरेपी (रोगाणु लाइन और दैहिक), क्लोनिंग, जेनेटिक इंजीनियरिंग  कैंसर के इलाज (जीन थेरेपी का एक रूप), भ्रूण में गड़बड़ी का उपयोगी सुधार, मानव जीनोम परियोजना, मानव आनुवंशिक जैव विविधता परियोजना, पूर्व आरोपण आनुवंशिक निदान, आदि कोशिकाओं से संबंधित विषय हैं कृषि से संबंधित विषय में जीएम खाद्य फसलों, जीएम फाइबर फसलों, जीएम पेड़, जीएम मैदान (जैसे अलग-अलग रंग की घास), प्लांट जीनोमिक शोध (जैसे एराबिडोप्सिस), जीएम पौधों/टीके, जैव ईंधन, प्लास्टिक उत्पादन पेड़, मानव दवा में प्रोटीन (जैसे इंसुलिन),जीएम खाद्य फसल, कीट प्रतिरोधी जीएम खाद्य/फाइबर फसलों और पेड़ के संरक्षण एवं सतत विकास में जेनेटिक इंजीनियरिंग का महत्वपूर्ण योगदान है। 
छात्र आमतौर पर जेनेटिक इंजीनियरिंग/बायोटेक्नॉलॉजी/जीवविज्ञान में डिग्री प्राप्त करते हैं और उनके लिये जेनेटिक इंजीनियरिंग में बीटेक, एमएससी/एमटेक या पीएचडी का कोर्स है। अधिकांश विश्वविद्यालय में जैनेटिक इंजीनियरिंग या जैवविज्ञान जैसे व्यापक क्षेत्र में विशेषज्ञता के रूप में जेनेटिक इंजीनियर को शोध परियोजनाओं के लिए आनुवंशिक इंजीनियरिंग में विशेषज्ञ होते हैं। यह सभी स्तरों पर विशेषज्ञता प्रदान करते है।
 

मुख्य विषय 

जेनेटिक इंजीनियरिंग में मुख्य विषय के रूप में जेनेटिक स्क्रीनिंग, जीन की प्रकृति, एक जीन एक एंजाइम हाइपोथिसिस, जीन-प्रोटीन संबंध, अनुवांशिक संरचना, जीन एवं प्रोटीन की कोलिनरिटी, इंडूसिबल एवं कांस्टीट्यूटिव आपरेशन। डीएनए का मेनीपुलेशन- ताप द्वारा डीएनए का डिनेचुरेशन, कांप्लीमेंटरी स्ट्रैन्डसकारि एसोसियेशन, रेस्ट्रिक्शन एन्जाइम रिकांबीनेंट डी.एन.ए. तकनीकी एवं संघटन, वेक्टर्स, क्लोनिंग की स्ट्रेटेजीस, क्लोन जींस की पहचान, रिकांबीनेंट डीएनए तकनीक का उपयोग, पीसीआर तकनीक आदि उपविषय का अध्ययन किया जाता है। 
बीटेक जेनेटिक इंजीनियरिंग में मुख्य रूप से अध्ययन किया जाता है-
  • जेने क्लोनिंग के लिए मोलेकुलर टूल्स
  • जेने क्लोनिंग के लिए वेक्टर
  • क्लोनिंग तकनीके
  • जीन ग्रंथों का निर्माण
  • रिमांबिनेंट प्रोटीन की अभिव्यक्ति

अवसर

अनुवांशिक इंजीनियरिंग में बीई/बीटेक करने के उपरांत, आप सरकारी संगठनों में वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग एवं जैव प्रौद्योगिकी विभाग, जैसे राष्ट्रीय प्रतिरक्षा संस्थान, राष्ट्रीय कोशिका विज्ञान केन्द्र, डीएनए फिंगरप्रिंट और नैदानिक केन्द्र, राष्ट्रीय मस्तिष्क अनुसंधान केन्द्र, जीवन विज्ञान संस्थान, राष्ट्रीय जैव चिकित्सा जिनोम संस्थान, क्षेत्रीय जैव प्रौद्योगिकी केन्द्र, स्टेम कोशिका विज्ञान और पुनर्प्रजनन चिकित्सा संस्थान, राष्ट्रीय कृषि-खाद्य जैवप्रौद्योगिकी संस्थान, ट्रांसलेशनल स्वास्थ्य विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, राष्ट्रीय पादप जीनोम अनुसंधान संस्थान, राजीव गाँधी जैव प्रौद्योगिकी केन्द्र, नवाचार और अनुप्रयुक्त जैव प्रसंस्करण केन्द्र, राष्ट्रीय पशु जैव प्रौद्योगिकी संस्थान/एजेंसियों में एक वैज्ञानिक के रूप में काम कर सकते हैं।
उद्योग के क्षेत्र जैसे नैनो विज्ञान और नैनो प्रौद्योगिकी, चिकित्सा जैव प्रौद्योगिकी, मानव आनुवंशिकी और जीनोम, संक्रामक, गैर संक्रामक रोग टीका अनुसंधान और निदान, पादप जैव प्रौद्योगिकी, सार्वजनिक स्वास्थ्य खाद्य और पोषण, आईपीआर और जैव सुरक्षा के क्षेत्र में अनुवांशिक इंजीनियर, वैज्ञानिक, सूचना वैज्ञानिक, क्षेत्र परीक्षण प्रबंधक, के रूप में कार्य कर सकते हैं।
विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर या व्याख्याता के रूप में कार्य करते हैं, डिप्लोमाधारियों के लिए प्रयोगशाला सहायक/तकनीशियन, डाटा प्रोसेसर, आदि का पद चिकित्सा संस्थान में है स्नातकोत्तर/पीएचडी धारियों के लिए अनुवांशिक इंजीनियरी एवंजैव प्रौधोगिकी के क्षेत्र में अध्ययन करने के लिए अनुवांशिक इंजीनियर, वैज्ञानिक, शोध सहायक, आणविक जीव विज्ञान के क्षेत्र में अनुवांशिक इंजीनियरी और प्रौद्योगिकी कंपनियों में डॉक्टर, वैज्ञानिक, वैज्ञानिक सहायक आदि पदों पर भर्ती की जाती है। वहीं डिग्री पाठ्यक्रमों में इस क्षेत्र से संबंधित नई तकनीकों के अलावा विभिन्न तरह का प्रशिक्षण कोर्स भी उपलब्ध हैं। यह प्रोफेशन चुनौतियों भरा है। इसलिए इस कॅरियर में आना है, तो चुनौतियों से निपटना आना चाहिए। अच्छी कम्यूनिकेशन स्किल और विश्लेषणात्मक क्षमता होना जरूरी है। इस फील्ड में जाने का इच्छुक नार्मल लाइफ से हटकर सोचने वाला चाहिए। अच्छी तार्किक सोच रखने और हर पहलू पर बारीकी से विचार करने वाले इस कैरियर में आसानी से एडजस्ट हो सकते हैं।
 

योग्यता

इस कोर्स में एंट्री के लिए १२वीं बायोलॉजी, केमिस्ट्री और गणित से पास होना जरूरी है। इस समय अधिकतर यूनिवर्सिटी और इंस्टीटयूट में जेनेटिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई बायोटेक्नॉलॉजी, माइक्रोबायोलॉजी और बायोकेमिस्ट्री में सहायक विषय के रूप में होती है। बायोटेक्नॉलॉजी के अडंर ग्रेजुएट और पोस्ट ग्रेजुएट में जेनेटिक इंजीनियरिंग में स्पेशलाइजेशन कर सकते हैं।
 

कोर्स

  • डिप्लोमा जेनेटिक इंजीनियरिंगमें
  • जेनेटिक इंजीनियरिंग में स्नातकोत्तर डिप्लोमा
  • जेनेटिक इंजीनियरिंग में बीटेक
  • जेनेटिक इंजीनियरिंग में एमएससी
  • जेनेटिक इंजीनियरिंग में एमटेक
  • जेनेटिक इंजीनियरिंग में पीएचडी

प्रवेश परीक्षाएँ

यह एक जैव वैज्ञानिक क्षेत्र है इसलिए इस क्षेत्र में कॅरियर बनाने हेतु बारहवीं (१०़२) तक भौतिकी, रसायन तथा जीव विज्ञान या गणित विषय होना आवश्यक है। अनुवांशिक इंजीनियरी (ळमदमजपब म्दहपदममतपदह) के पाठ्यक्रमों में प्रवेश हेतु प्रवेश परीक्षाएं उत्तीर्ण करनी होती हैं कुछ ऐसे संस्थान भी हैं, जो जेनेटिक इंजीनियर में पोस्ट ग्रेजुएट डिग्री को ऑफर करती है। गे्रजुटए कोर्स, बीई/बीटेक में एंट्री प्रवेश परीक्षा के आधार पर होता है। एमएससीइनजेनेटिक इंजीनियरिंग में एडमिशन के लिए जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी हर साल १२० सीटों के लिए संयुक्त परीक्षा का आयोजन करती है। तकरीबन २० हजार छात्र इस परीक्षा में बैठते हैं। अंको के आधार पर १२० छात्र को जेएनयू परिसर, नयी दिल्ली में एडमिशन दे दिया जाता है। बायोटेक लेबोरेटरी में रिसर्च, एनर्जी और एन्वॉयरनमेंट से संबंधित इंडस्ट्री, एनिमलहसबैंड्री, डेयरीफार्मिंग, मेडिसन आदि में भी रोजगार के खूब मौके हैं।
 

सैलरी

जेनेटिक इंजीनियरिंग में पोस्टग्रेजुएट की डिग्री रखने वाले स्टूडेंट्स को शुरुआती दौर में ३०.५० हजार रुपये प्रतिमाह सैलॅरी मिलने लगती है। यदि आपके पास डॉक्ट्रोरल डिग्री है, तो सैलॅरी ६०.८० हजार रुपये शुरुआती महीनों में हो सकती है। जेनेटिक इंजीनियर के लिए भारत के साथ-साथ विदेश में भी जॉब के अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं। इनके लिए मुख्यत रोजगार के अवसर मेडिकल व फार्मास्युटिकल कंपनी, एग्रीकल्चर सेक्टर, प्राइवेट और सरकारी रिसर्च और डेवलपमेंट सेंटर में होते हैं। टीचिंग को भी कॅरियर ऑप्शन के रूप में आजमाया जा सकता है। जेनेटिक डिग्री कोर्स के लिए भी यहाँ कुछ मुख्य संस्थान में सीटें निश्चित हैं। इसके लिए भी एंट्रेंस टेस्ट में बैठना जरूरी है।
 

मुख्य संस्थान

  • आईसीजीईबी, नई दिल्ली, स जेएनसीएएसआर, बैंगलोर
  • आरजीसीबी, थिरवनंतपुरम, स आईजीआईबी, दिल्ली
  • टीआईएफआर, मुंबई, स आईआईएससी, बैंगलोर
  • एनआईआई, दिल्ली, स आईआईटी जैवप्रौद्योगिकी विभाग
  • एमएसएसआरएफ, चेन्नई, स सीसीएमबी, हैदराबाद
  • एनसीसीएस, पुणे, स भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मुंबई।
  • एसआरएम यूनिवर्सिटी, चेन्नई, स भरत विश्वविद्यालय, चेन्नई
  • आर्यभट्टज्ञान विश्वविद्यालय, पटना, स बनारस हिंदू विश्वविद्यालय, वाराणसी।
  • मुंबई विश्वविद्यालय, मुंबई, स जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली
  • इंडियन एग्रीकल्चरल रिसर्च इंस्टीट्यूट, पूसा, 
  • जेनेटिक मेडिसिन और जीनोमिक विज्ञान संस्थान, कोलकाता, 
  • जेनेटिक इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान, चेन्नई, तमिलनाडु
  • वन जेनेटिक और ट्री ब्रीडिंग संस्थान, कोयंबटूर, तमिलनाडु
  • जेनेटिक इंजीनियरिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट, 
  • एस.आर.एम। विश्वविद्यालय, कांचीपुरम, तमिलनाडु
  • एशिया पैसिफिक इंस्टिट्यूट (।च्प्), पानीपत, 
  • अल्फा इंजीनियरिंग कॉलेज, चेन्नई, तमिलनाडु
  • आर्यभट्ट ज्ञान विश्वविद्यालय, पटना, बिहार
  • प्रौद्योगिकी और प्रबंधन संस्थान (ब्न्ज्ड), भुवनेश्वर
  • देव भूमि इंस्टिट्यूट ,देहरादून, उत्तराखंड
  • सेट जू इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी यूनिवर्सिटी, बंगलौर
  • वासिरेड्डी वेंकटाद्री प्रौद्योगिकी संस्थान गुंटूर, आंध्र प्रदेश
  • श्रीकृष्ण इंजीनियरिंग संस्थान, देहरादून, उत्तराखंड
  • तमिलनाडु एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी, कोयंबटूर
  • राष्ट्रीय आणविक जीव विज्ञान रिसर्च केंद्र,(ब्ैप्त्),हैदराबाद आंध्र प्रदेश
  • नेशनल इंस्टीटयूट ऑफ इम्यूनोलॉजी, नयी दिल्ली
  • सेंटर फॉर डीएनए फिंगर प्रिंट एंड डाइग्नोस्टिक, ब्ब्डठ, हैदराबाद
  • बायोकेमिकल इंजीनियरिंग रिसर्च एंड प्रोसेस डेवलॅपमेंट सेंटर, चंडीगढ़,
  • द इंस्टीटयूट ऑफ जिनोमिक एंड इंटेग्रेटिव बायोलॉजी, दिल्ली
 
goswamisanjay80@yahoo.com