तकनीकी

(22/May/2015)

इंटरनेट के जाल में

निशा राठौर

इंटरनेट एक ऐसा जाल है जो लगभग दुनिया के हर हिस्से में फैल चुका है और जहाँ नहीं है वहां लाने की निरंतर कोशिश की जा रही है। दूरियाँ नजदीकियों में तबदील होती जा रही हैं। लगभग अस्सी प्रतिशत कार्य इंटरनेट के द्वारा किये जा रहे हैं। ऑनलाइन शॉपिंग, बैंक का लेन-देन, बात-चीत, ऑनलाईन पढ़ाई, ऑनलाइन डाक्टरों से वार्तालाप और न जाने कितने सारे कार्य ऑनलाइन हो।
यह सच है कि इंटरनेट से सचमुच हमारा कार्य बहुत आसान और सुदृढ़ हो गया। घंटों का कार्य सेकंड़ों में हो जाता है। पूरी दुनिया हमारे कम्प्यूटर, मोबाइल और लैपटॉप में समा गयी है। हम एक बंद कमरे में बैठ कर पूरी दुनिया की सैर कर सकते हैं। लाखों लोगों से एक साथ बात कर सकते हैं, मनचाही चीजों की खरीदारी कर सकते हैं। लेकिन यह भी सच है कि आये दिन लाखों लोग धोखा-धड़ी, धनचोरी की शिकायत दर्ज कराते हैं जो इंटरनेट से जुड़ी होती है अर्थात जिस गति से इंटरनेट का इस्तेमाल बढ़ रहा है उसी गति से साइबर क्राइम भी बढ़ रहा है।
आज एटीएम एक ऑनलाइन लेन-देन की सबसे मशहूर तरीका बन चुका है। 24 घंटे आप पैसे निकाल सकते हैं, आपको बैंक जाने की जरूरत नहीं पड़ती। लेकिन अब कुछ लोग आपके एटीएम का क्लोन बना लेते है और आपका पासवर्ड चुरा लेते हैं और आपके खाते से पैसा चुरा लेते हैं। क्लोन का मतलब होता है एक दूसरा एटीएम बनाना जो मूल एटीएम के जैसा ही होता है। अगर आप अपने एटीएम कार्ड को ध्यान से देखेंगे तो पायेंगे उस पर एक काली पट्टी लगी होती है। उस काली पट्टी के नीचे आपकी और बैंक की गुप्त जानकारी छिपी होती है। साइबर अपराधी आपकी जानकारी चुराकर क्लोन बना लेते हैं और फिर आपका पैसा गायब हो जाता है। एटीएम कार्ड के ऊपर चार अंकों का एक नम्बर होता है जिसे सीवीवी नम्बर कहते है। इसका उपयोग आनलाइन खरीदारी के लिए किया जा सकता है। इन धोखा-धड़ी से बचने के लिए बैंक अब चिप लगा हुआ एटीएम कार्ड जारी कर रहे हैं, जिसका क्लोन बनाना संभव नहीं है। इसके लिए आपको पुराना कार्ड बैंक को लौटाना होगा और फिर आपको नया एटीएम कार्ड प्रदान किया जायेगा।
इंटरनेट बैंकिंग का चलन दिनों दिन बढ़ता जा रहा है अर्थात मोबाइल रिचार्ज, डिश टीवी रिचार्ज, टिकट बुकिंग, खरीददरी और ढेर सारे कार्यों में हम इंटरनेट बैंकिंग का प्रयोग कर सकते हैं। लेकिन सायबर अपराधी यहां भी अपना हाथ साफ कर लेते हैं। वे फिशिग का तरीका अपनाते हैं अर्थात वे नकली बेवसाइट बनाते हैं जो बिलकुल बैंक की वेबसाइट की तरह दिखता है आप जैसे ही अपना लॉगिन आईडी और पासवर्ड एंटर करते हैं वे इसे चुरा लेते हैं और फिर वे आपके खाते से पैसा ट्रांसफर कर लेते हैं। इंटरनेट का इस्तेमाल करने के लिए जब हम साइबर कैफे या किसी अन्य व्यक्ति का लैपटॉप का उपयोग करते है कुछ लोग एक सॉफ्टवेयर इंस्टाल करके रखते हैं जिसका नाम है की-लॉगर। यह सॉफ्टवेयर आपके द्वारा टाइप किये गये सारी जानकारी स्टोर कर लेता है जिससे आपका यूजरनेम और पासवर्ड चुराया जा सकता है।
इस प्रकार के धोखा-धड़ी से बचने के लिए बैंक के द्वारा एक विशेष प्रकार के पासवर्ड आपके मोबाइल पर भेजा जाता है, इसे ओ.टी.पी कहते हैं अर्थात वनटाइम पासवर्ड। यह पासवर्ड मात्र एक से दो मिनट के लिए ही मान्य होता है। यह पासवर्ड आपके पंजीकृत मोबाइल नम्बर पर भेजा जाता है, इसके अलावा ‘की-लॉगर’ जैसे सॉफ्टवेयर से बचने के लिए बैंक अपने वेबसाइट पर वर्चुअल की-बोर्ड प्रदान करते हैं। अतः आप जब भी इंटरनेट बैंकिंग का इस्तेमाल किसी साइबर कैफे या अन्य व्यक्ति के कम्प्यूटर या लैपटाप से करें तो हमेशा वर्चुअल की-बोर्ड का इस्तेमाल करें। वर्चुअल की-बोर्ड के द्वारा टाइप किया गया डाटा की-लॉगर जैसे सॉफ्टवेयर स्टोर नहीं कर सकते हैं और इस प्रकार आप सुरक्षित ऑनलाइन बैंकिंग का इस्तेमाल कर सकते हैं। इंटरनेट की दुनिया में हमारी व्यक्तिगत जानकारी बहुत ज्यादा सुरक्षित नहीं होती है। आये दिन हमारा फेसबुक, जी-मेल ट्वीटर एकाउंट हैक हो जाते हैं और फिर हमारे अकाउट से गलत और अपराधिक संदेश का आदान-प्रदान किया जाता है। उदाहरण के लिए आपके अकांउट का इस्तेमाल करके आतंकवादी गतिविधियों का संचालन किया जा सकता है।
हैकर आपकी जानकारी चुराने के लिए हजारों तरीकें लगाते हैं। उदाहरण के लिए वे आपको लॉटरी गिफ्ट या पुरस्कार का विजेता होने का दावा करते हैं। इसके बाद उस मेल में एक लिंक प्रदान करते हैं जिसके जरिए वे आपसे निजी जानकारी प्राप्त करते हैं जैसे आपका नाम, खाता संख्या, पिन कोड इत्यादि। इसके अलावा कुछ ऐसे भी मेल हो सकते हैं जिसके साथ कुछ अटैच फाइलें होती है, जैसे ही आप उस फाइल पर क्लिक करते हैं वह फाइल आपके कम्प्यूटर अथवा लैपटॉप में अपने आप इंस्टाल हो जाती है। यह फाइल आपके कम्प्यूटर में एक गुप्त द्वार का निर्माण करता है, इस गुप्त द्वार के द्वारा हैकर आपके कम्प्यूटर को आसानी से एक्सेस कर सकते हैं।
आप जैसे ही इंटरनेट से कनेक्ट होते हैं, आपका कम्प्यूटर अपने आप हैकर के कंट्रोल में आ जाता है। इस प्रकार से आपके कम्प्यूटर में उपस्थित जानकारी को आसानी से चुराया जा सकता है, आपके महत्वपूर्ण दस्तावेजों को डिलिट किया जा सकता है, आपके ही कम्प्यूटर से किसी को गलत संदेश भेजा जा सकता है और सबसे खतरनाक बात तो यह है कि आपको बिलकुल भी भनक नहीं लग सकती है कि यह सब कैसे हो रहा है। अतः हमेशा किसी अनजान या संदेह भर का ई-मेल को खोलने से परहेज करे और जितनी जल्दी हो उसे डिलीट कर दें। इंटरनेट की दुनिया में जालसाजों की संख्या दिनों-दिन बढ़ती जा रही है। आये दिन बड़ी-बड़ी कंपनियों की वेबसाइट हैक हो जाती हैं और इस कारण उन्हें करोड़ों रूपये का नुकसान उठाना पड़ता है। इंटरनेट की दुनिया में सुरक्षा गार्ड के रूप में यूजरनेम और पासवर्ड ही हमारी जानकारी को अवैध प्रयोग से बचाता है लेकिन अगर यूजरनेम और पासवर्ड ही चोरी हो जाये तो आपका कंट्रोल पूरी तरह समाप्त हो जाता है। अतः जब कभी भी पासवर्ड चुने तो वह यूनिक और कम से कम आठ अंकों का होना चाहिए। पासवर्ड का चयन करते समय बड़ा अक्षर छोटा अक्षर, संख्या तथा स्पेशल चिन्ह का इस्तेमाल करें जिससे आपके पासवर्ड का अनुमान लगाना कठिन हो जाये। जैसे kajal@*#1992 काफी मजबूत पासवर्ड है।
लेकिन कुछ लोग याद रखने के ख्याल से बहुत ही आसान पासवर्ड चुनते है जैसे 123456, 123abc, जन्मदिन, शादी की सालगिरह, मोबाइल नंबर और अन्य सारे। चूंकि ऐसी जानकारी बहुत ही आसानी से प्राप्त की जा सकती है और फिर आपका एकांउट हैक किया जा सकता है। इन बातों के अतिरिक्त हमेशा निजी जानकारी को इंटरनेट पर शेयर ना करें या उसे अपने ई-मेल या अन्य ड्राइव में ना रखें। इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय हमेशा इन बातों को याद रखें-

  • हमेशा लेन-देन के लिए URL में Https: देखना ना भूलें, S का मतलब सेक्योर होता है आप जब भी SBI, PNB, BOI तथा अन्य बैंकों के बेवसाइट विजिट करेंगे तो आप पायेंगे कि उनका URL सदैवHttps से शुरू होता है और वहां एक ताले का भी निशान होता है।
  • जब कभी आप लॉगिन करें तो हमेशा वर्चुअल की-बोर्ड का इस्तेमाल करें, यह लॉगिन पेज पर उपलब्ध होता है।
  • कभी भी अनजान ई-मेल अटैचमेंट पर क्लिक ना करें और उस मेल को जितनी शीघ्रता से डिलिट कर सके कर दें।
  • किसी भी लिंक के द्वारा मांगे जाने पर गुप्त जानकारी जैसे आपका नाम, खाता संख्या, एटीएम नं. पिन आदि ना बतायें। क्योंकि इस प्रकार की जानकारी कभी भी किसी भी बैंक के द्वारा नहीं मांगी जाती है।
  • यूजरनेम और पासवर्ड को मोबाइल या डायरी में ना लिखें। यथा शीघ्र इसे याद कर लें, जिससे आपके पासवर्ड की गोपनीयता बरकरार रहेगी।
  • जब भी आप ऑनलाइन खरीदारी करें तो सबसे अच्छा विकल्प है कैश ऑन डिलेवरी अर्थात जब आपका सामान घर आ जाये तभी आप बिल का भुगतान करें।
  • किसी भी प्रकार के ऑफर, गिफ्ट या पुरस्कार वाले मेल पर यकीन ना करें और ना ही उसमें अंकित लिंक को विजिट करें। यह सब फिशिंग का तरीका होता है।

उपर्युक्त लिखी बातों का ध्यान रखकर आप इंटरनेट का सुरक्षित तरीकों से इस्तेमाल कर सकते हैं और सुरक्षित प्रयोग ही आपको बचा सकता है। बहरहाल इंटरनेट को ज्यादा सुरक्षित बनाने के लिए बहुत सारे कार्य किये जा रहे हैं जैसे बायोमेट्रिक, डिजिटल हस्ताक्षर, वॉइस रिकॉगनाइजेशन, फिंगर प्रिंट स्कैन, रेटिना स्कैन, फेस रिडिंग और अन्य सुरक्षित तरीके अपनाये जा रहे हैं। आने वाले दिन में इंटरनेट ज्यादा उपयोगी और सुरक्षित हो जायेगा क्योंकि विश्वसनीयता को बढ़ाने के लिए सुरक्षा बढ़ाना बहुत जरूरी है और अभी इस क्षेत्र में बहुत सारे कार्य किये जा रहे हैं।

nisha.rathore1992@gmail.com