तकनीकी

(20/May/2015)

डिजिटल तकनीक द्वारा विज्ञान संचार

 

मनोज पटैरिया

सांख्य्ा (डिजिटल) माध्य्ाम को लेकर भी अनेक तरह की आशंकाएं हैं  क्य्ाा इससे पहले से ही प्रचलित जन संचार माध्य्ामों की लोकप्रिय्ाता कम होगी! पिछले अनुभवों से य्ाह प्रतीत होता है कि कोई भी माध्य्ाम केवल इस वजह से कि वह नय्ाा है पहले से मौजूद माध्य्ाम को प्रतिस्थापित नहीं कर सकता है। इसके अतिरिक्त हमारी विविधतापूर्ण सामाजिक आर्थिक संस्कृति में हमें अधिक प्रभावशाली और अधिक व्य्ाापक रूप से संचार के लिए सभी माध्य्ामों की साथµसाथ आवश्य्ाकता होती है।
सांख्य्ा (डिजिटल तकनीक) प्रौद्योगिकी ने विश्व भर में संचार क्रांति ला दी है और य्ाह तेजी से मानव गतिविधिय्ाों के लगभग हर क्षेत्र्ा में व्य्ााप्त होती जा रही है चाहे वह अनुसंधान एवं विकास का क्षेत्र्ा हो य्ाा कृषि, उद्योग, व्य्ाापार, शिक्षा, स्वास्थ्य्ा और चिकित्सा का य्ाा फिर मनोरंजन ही क्य्ाों न हो। नय्ाी सांख्य्ा प्रौद्योगिकी के आविर्भाव के फलस्वरूप सूचना की पैठ अपेक्षाकृत आसान हो गय्ाी है। इस प्रौद्योगिकी ने एक पूर्ण विकसित संचार माध्य्ाम को जन्म दिय्ाा है जिसे सांख्य्ा माध्य्ाम के नाम से जाना जाता है। सांख्य्ा माध्य्ाम में विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार की महान संभावनाएं हैं।
देश के कोने-कोने में वैज्ञानिक सूचनाओं के प्रचार प्रसार के उद्देश्य्ा से आम जनता के बीच विज्ञान संचार के लिए विभिन्न संचार माध्य्ामों का उपय्ाोग किय्ाा गय्ाा है। इन जन संचार माध्य्ामों में मुद्रित (समाचार पत्र्ा, पत्र्ािकाएं, पुस्तकें आदि); इलेक्ट्रॉनिक (रेडिय्ाो और टेलीविजन); लोक (नुक्कड़, नाटक, कठपुतली, लोकगीत, आदि) और पारस्परिक सम्पर्क/भागीदारी (संगोष्ठिय्ाां, कायर््ाशालाएं, प्रदर्शिनी, संग्रहालय्ा आदि) जैसे माध्य्ाम शामिल हैं। नए सांख्य्ा माध्य्ाम के आविर्भाव ने संचार के नए परिदृश्य्ा खोल दिए हैं और चुटकिय्ाों में पहुंचे विविधता तथा सूचना की गुणवत्ता के रूप में सभी संचार माध्य्ामों को पीछे छोड़ दिय्ाा है।
हालांकि सभी माध्य्ामों की अपनी अच्छाइय्ााँ और बुराइय्ााँ होती हैं। जब टेेलीविजन का आगमन हुआ तो लोग इससे बहुत ही उत्तेजित थे क्य्ाोंकि य्ाह भी माना जा रहा था कि टेलीविजन के आगमन से रेडिय्ाो की पकड़ पूरी तरह समाप्त हो जाएगी। परन्तु बहुत सारे उपग्रह, टीवी चैनलों के आ जाने के बाद भी रेडिय्ाो की लोकप्रिय्ाता कम नहीं हुई है। इस तरह सांख्य्ा माध्य्ाम को लेकर भी अनेक तरह की आशंकाएं हैं क्य्ाा इससे पहले से ही प्रचलित जन संचार माध्य्ाम की लोकप्रिय्ाता प्रभावित होगी? पिछले अनुभवों से य्ाह प्रतीत होता है कि कोई भी माध्य्ाम केवल इस वजह से कि वह नय्ाा है पहले से मौजूद माध्य्ाम को प्रतिस्थापित नहीं कर सकता है। इसके अतिरिक्त हमारी विविधतापूर्ण सामाजिकµआर्थिक संस्कृति में हमें अधिक प्रभावशाली और अधिक व्य्ाापक रूप से संचार के लिए सभी माध्य्ामों की साथµसाथ आवश्य्ाकता होती है। नए उभरकर सामने आ रहे सांख्य्ा माध्य्ाम में निहित अपार संभावनाओं को देखते हुए य्ाह आशा की जा रही है कि अन्य्ा माध्य्ामों को अधिक सूचनाप्रद, अधिक आधुनिकतम, अधिक सशक्त बनाने तथा लक्षित वर्गों के श्रोताओं / पाठकों/दर्शकों को बेहतर सेवा प्रदान करने के लिए निश्चित ही य्ाह माध्य्ाम, दूसरे अन्य्ा माध्य्ामों के लिए सम्पूरक साबित होगा।
बीसवीं शताब्दी ने पारंपरिक संचार माध्य्ामों को आधुनिक संचार माध्य्ामों में बदलते हुए देखा है। लोक माध्य्ामों, मुद्रण और लेखन माध्य्ाम से कुछ कदम आगे रेडिय्ाो, टेलीविजन और उपग्रह समर्थित संचार तथा दूर संचार ने, संचार के क्षेत्र्ा में मूलतः क्रांति ला दी है। प्रारंभ में निर्वात नली ने संचार साधनों के लिए मुख्य्ा प्रौद्योगिकी के लिए आधार प्रदान किय्ाा। इसके पश्चात् अगले चरण के रूप में एकीकृत परिपथ आए, जिसने आगे चल कर सांख्य्ा प्रौद्योगिकी की वृद्धि में सहाय्ाता की। अब इक्कीसवीं सदी का उषाकाल तीव्रगामी, बहुआय्ाामी और बहुउद्देशीय्ा सांख्य्ा प्रौद्योगिकी के आगमन का साक्षी है।
सांख्य्ा प्रौद्योगिकी सूचना को विद्युतीय्ा स्पन्दन की उपस्थिति अथवा अनुपस्थिति के रूप में निरूपित करती है। सांख्य्ा संकेत अधिक खरे होते हैं और सांख्य्ा तकनीक ठोस अवस्था इलेक्ट्रॉनिकी तथा कम्प्य्ाूटर जनित सूचना के लिए बहुत उपय्ाुक्त होती है। अधिकांशतः सांख्य्ा नेटवर्क को सीधे घरों और व्य्ाावसाय्ािक केन्द्रों तक तेज गति से सांख्य्ा (अंकीय्ा) संकेतों को पहुंचाने के लिए एक माध्य्ाम की आवश्य्ाकता होती है। गत दिनों के तांबे के तार और य्ाांत्र्ािकीय्ा स्विचिंग रिले को एक ही प्रकार के संकेत जैसे टेलीफोन काल, टेलीग्राम अथवा टेलेक्स संदेश के वाहन के लिए बनाय्ाा गय्ाा था। परन्तु आज के उच्च क्षमता वाले प्रकाशीय्ा तन्तु और परिष्कृत सांख्य्ा कम्प्य्ाूटर आवाज, लिखावट अथवा आकृतिय्ाों को कम्प्य्ाूटर जनित सांख्य्ा संकेतों में बदल कर संचारित कर सकते हैं।
संचार की इस प्रणाली में संकेत शून्य्ा (0) अथवा एक (1) संख्य्ााओं के रूप में आते हैं इसीलिए इन्हें सांख्य्ा कहते हैं। शून्य्ा संकेतों की अनुपस्थिति और एक संकेतों की उपस्थिति का द्योतक है। इसमें कमजोर अथवा क्षीण संकेतों जैसी कोई बात नहीं है य्ाा तो संख्य्ाा 1 के रूप में पूर्ण संकेत होगा अथवा 0 संख्य्ाा के रूप में कोई संकेत नहीं होगा। इससे पाठ्य्ा सामग्री, ऑडिय्ाो (श्रव्य्ा) अथवा वीडिय्ाो (दृश्य्ा)µ(स्थिर अथवा गतिशील) के रूप में निरूपित करती है। इसीलिए इसमें स्पार्क, तड़ित, आदि अनेक कारकों से व्य्ावधान पड़ता है। जबकि सांख्य्ा संचार में संख्य्ााई रूप से संचारित सूचनाएं/आंकड़े इन व्य्ावधानों से मुक्त रहते हुए पूर्ण और ठीक.ठीक रूप में पहुंचते हैं।
सांख्य्ा प्रौद्योगिकी से लैस संचार माध्य्ाम को सांख्य्ा माध्य्ाम के रूप में जाना जा सकता है। कम्प्य्ाूटर से जुड़ी हुई सूचना प्रणाली संचार का अनूठा माध्य्ाम हो गय्ाी है। कम्प्य्ाूटर, डिस्केट्स, सीडीµरोम, मल्टीमीडिय्ाा, इलेक्ट्रॉनिक प्रकाशन, इन्टरनेट, आनµलाइन पत्र्ािकाएं, ईµमेल, होम पेज, बुलेटिन बोर्ड प्रणाली, डिजिटल वीडिय्ाो डिस्क, आदि लोगों के बीच अधिक से अधिक लोकप्रिय्ा होती जा रही है और नय्ाी उभर कर सामने आ रही है। सांख्य्ा माध्य्ाम की संकल्पना जो पूर्ण विकसित संचार माध्य्ाम का रूप ले रही है कम्प्य्ाूटर विज्ञान और प्रकाशीय्ा तन्तु विज्ञान के क्षेत्र्ा में हो रही नय्ाी प्रगति ने इस संचार क्रांति को संभव कर दिय्ाा है। इसने विश्व को और अधिक समीप लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस क्षेत्र्ा में हो रही हर तरह की प्रगति का विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के संचार में प्रभावपूर्ण ढंग से उपय्ाोग किय्ाा जा सकता है। आइए विज्ञान संचार/लोकप्रिय्ाता के क्षेत्र्ा में सांख्य्ा माध्य्ाम के उपय्ाोग की विभिन्न संभावनाओं पर एक नजर डालें।
आजकल मल्टीमीडिय्ाा शब्द ने अत्य्ााधिक महत्व और एक नय्ाा अर्थ अर्जित कर लिय्ाा है। पहले इसे मुद्रण, लोक, रेडिय्ाो, टेलीविजन आदि जैसे संचार के विभिन्न माध्य्ामों के संय्ाोजन के रूप में जाना जाता था। परन्तु इसका नय्ाा अर्थ पूर्ण रूप से अलग है। अब मल्टीमीडिय्ाा एक कम्प्य्ाूटर से जुड़ी हुई प्रणाली है जो पाठन सामग्री, श्रव्य्ा और दृश्य्ा (स्थिर और गतिशील) के रूप में सूचना प्रदान करने में मदद करती है। य्ाह दो तरफा संचार भी प्रदान करती है। पारस्परिक विचार विमर्शी मल्टीमीडिय्ाा पैकेज भी उपलब्ध हैं। य्ादि हम परिकलन और संचार की प्रवृत्तिय्ाों को मिला दें तो हमें कम्प्य्ाूटर प्रणाली द्वारा पारंपरिक रूप से संचालित की जाने वाली पाठ्य्ा सामग्री के स्थान पर मल्टीमीडिय्ाा सूचनाओं के भण्डार, संसाधन और संचरण के साधन उपलब्ध हो जाते हैं। रंगीन चित्र्ा, ध्वनि और दृश्य्ाों सहित मल्टीमीडिय्ाा में मनोरंजन और पठन की सुविधा सहित य्ाह काफी प्रभावशाली भी है। उपय्ाोगकर्ताओं को निःसन्देह मल्टीमीडिय्ाा प्रारूप में सूचनाएं दी जा सकती हैं। भविष्य्ा में मल्टीमीडिय्ाा सूचनाओं की मांग की काफी संभावना है।
कम्पैक्ट डिस्क (सीडी) सांख्य्ा संचार के इस खूबसूरत संसार की एक और प्रणाली है। एक छोटी सी डिस्क में हजारों पृष्ठ भंडारित किए जा सकते हैं। आजकल अनेकों किताबें, विश्वकोष, प्रकाशन, सीडी पर उपलब्ध हैं जिन्हें कम्प्य्ाूटर स्क्रीन पर य्ाा तो पाठन सामग्री के रूप में अथवा मल्टीमीडिय्ाा के रूप में पढ़ा जा सकता है।
सूचनाओं से लबालब इस डिस्क को सीडी रोम य्ाानि काम्पैक्ट डिस्क रीड ओनली मेमोरी कहते हैं। आधुनिक संचार के इस माध्य्ाम का उपय्ाोग करने पर धन तथा भंडारण स्थान µ दोनों की बचत की जा सकती है। जिनकी भारी भारी प्रकाशनों के लिए जरूरत पड़ा करती थी।
इन्टरनेट विश्वभर में फैले हुए असंख्य्ा कम्प्य्ाूटरों के नेटवर्कस का नेटवर्क हैं। इसके केन्द्र में कोर कम्प्य्ाूटर प्रणालिय्ाों से निर्मित एक संय्ाुक्त सृष्टि है। य्ाह किसी को भी पता नहीं है कि इस कम्प्य्ाूटर जाल से कितने कम्प्य्ाूटर जुड़े हुए हैं। कोई 30 वर्ष पूर्व अमेरिकी रक्षा विभाग ने सैन्य्ा अनुसंधानकर्ताओं को एक दूसरे के संपर्क में रखने के उद्देश्य्ा से एक प्रय्ाोग को तौर पर ऐसे प्रथम कम्प्य्ाूटर नेटवर्क की रचना की थी और इन्टरनेट विश्वभर में करोड़ों उपय्ाोगकर्ताओं को एक दूसरे से जोड़ता है। चुटकिय्ाों में वांछित सूचनाओं तक पहुंच की इस ‘ऑनलाइन’ सुविधा ने संचार के नए परिदृश्य्ा खोल दिए हैं। इन्टरनेट को संक्षेप में नेट अथवा वेब भी कहा जाता है तथा नेटवर्कों के विशाल तानेबाने की प्रकृति के कारण इसे वर्ल्ड वाइड वेब अर्थात् विश्व व्य्ाापी जाल के नाम से भी जाना जाता है।
इस सारे सप्तक को साइबरस्पेस के नाम से जाना जाता है। इस शब्द को सर्वप्रथम एक विज्ञान कथा लेखक विलिय्ाम गिबसन ने गढ़ा था। साइबर स्पेस शब्द साइबरनेटिक्स से उत्पन्न हुआ है। साइबरनेटिक्स का अर्थ है जीवों द्वारा विशिष्ट अथवा बढ़े हुए निय्ांत्र्ाित कायर््ा सम्पन्न करने के लिए य्ाान्त्र्ािक अथवा स्वचालित य्ाुक्तिय्ाों के साथ जीवों के संय्ाोजन का विज्ञान। अतः साइबरस्पेस एक अभिव्य्ाक्ति है जो एक इलेक्ट्रॉनिक विश्व में कायर््ारत मनुष्य्ाों का वर्णन करती है जहां वे मोडेम द्वारा सांख्य्ा संबंधों के माध्य्ाम से, स्थानीय्ा क्षेत्र्ा नेटवर्क, व्य्ाापक क्षेत्र्ा नेटवर्क, टेलीफोन तारों, प्रकाशीय्ा तन्तुओं, संचार उपग्रहों, आदि के माध्य्ाम से आंकड़ों/संकेतों को संचारित करके संचार तथा दूर की य्ाुक्तिय्ाों के निय्ांत्र्ाण के लिए कम्प्य्ाूटर का उपय्ाोग करते हैं। मोडेम, निय्ांत्र्ाण अथवा अनिय्ांत्र्ाण के लिए एक इलेक्ट्रॉनिकी य्ाुक्ति है जो कम्प्य्ाूटर तथा टेलीफोन लाइन के बीच एक सम्पर्क साधन के रूप में काम आती है। स्थानीय्ा क्षेत्र्ा नेटवर्क सीमित भौगोलिक क्षेत्र्ा में फैले हुए कम्प्य्ाूटरों तथा अन्य्ा कम्प्य्ाूटर उपकरणों जैसे प्रिन्टर्स और मोडेम का एक तानाबाना है जो संचार संपर्क तथा नेटवर्क सॉफ्टवेय्ार से जुड़े रहते हैं ताकि किसी भी उपकरण के लिए नेटवर्क के किसी भी कम्प्य्ाूटर से परस्पर संबंध स्थापित करना सम्भव हो सके। इन्टरनेट को व्य्ाापक क्षेत्र्ा नेटवर्क के नाम से जाना जाता है। प्रकाशीय्ा तन्तु बाल के समान पतले तन्तु होते हैं जिनसे होकर एक समय्ा में हजारों संकेत जाते हैं। य्ाह संख्य्ाा माध्य्ाम की बैंडविड्थ पर निर्भर करती है। किसी माध्य्ाम की सूचना वहन क्षमता को बैंडविड्थ कहते हैं जिसे आमतौर पर बाइट्स प्रति सेकण्ड के रूप में मापा जाता है। बाइट एक बानइरी संख्य्ाा आंकड़ों की इकाई होती है जिसे आमतौर पर 0 अथवा 1 के रूप में प्रस्तुत किय्ाा जाता है। बाइट्स परमाणुओं से भिन्न होती हैं इसलिए अलग प्रकार के निय्ामों का पालन करती हैं। य्ो भारहीन होती हैं आसानी से तथा त्र्ाुटिहीन रूप से इनकी प्रतिकृति तैय्ाार की जा सकती है और लगभग प्रकाश की गति से इन्हें एक स्थान से दूसरे स्थान तक ले जाय्ाा जा सकता है। साइबरस्पेस के माध्य्ाम से सामान्य्ातय्ाा 5 करोड़ बाइट्स प्रति सेकण्ड तक की गति से सूचना का बहाव होता है और शीघ्र ही य्ाह गति 2 अरब बाइट्स प्रति सेकण्ड से भी अधिक हो जाएगी। इस तरह से पठन सामग्री ऑडिय्ाो और ग्राफिक्स आदि के रूप में वांछित सूचना/आंकड़ों को द्रुत गति से परिशुद्ध रूप में एक स्थान तक भेजना संभव होगा।
इस रोमांचक तथा अत्य्ाधिक क्षमता वाले माध्य्ाम में विज्ञान संचार के क्षेत्र्ा में काफी अधिक अवसर हैं। आजकल विभिन्न वैज्ञानिक विषय्ाों पर जानकारी प्राप्त करने के लिए अनेक स्थान (साइट) उपलब्ध हैं। विभिन्न संस्थानों के अपने विशिष्ट पतों के साथ इन्टरनेट पर होम पेज मौजूद हैं जैसे इन्टरनेट पर आईसेक्ट के होम पेज का पता है। हाइपर टैक्स्ट ट्रांसमिशन प्रोटोकॉल एक कमाण्ड है जिससे लिखित सामग्री को ऑनलाइन संचारित किय्ाा जा सकता है। होम पेज इन्टरनेट पर किसी संस्थान अथवा व्य्ाक्ति की साइट का स्थान होता है जहाँ उस संस्थान अथवा व्य्ाक्ति के बारे में विभिन्न प्रकार की सूचनाएं उपलब्ध रहती हैं जैसे उनका विवरण, उत्पादों तथा सेवाओं की जानकारी आदि। इसे वेब पेज के नाम से भी जाना जाता है। कुछ साइट पारस्परिक सूचना आदान प्रदान वाली होती हैं जिसमें आप प्रश्न पूछकर उनके उत्तर प्राप्त कर सकते हैं, खेल सकते हैं, पहेलिय्ाां हल कर सकते हैं तथा सीधे बातचीत एवं ई-मेल के माध्य्ाम से दूरदराज के व्य्ाक्ति से विचारविमर्श कर सकते हैं। विभिन्न संस्थान जो एक किसी बड़े संगठन के अन्तर्गत आते हैं वे इन्टरनेट के माध्य्ाम से एक दूसरे से जुड़े रहते हैं चाहे वे भौगोलिक रूप से दूरदराज के क्षेत्र्ाों में स्थित हों। इन्टरनेट एक व्य्ाापक क्षेत्र्ा नेटवर्क के भीतर अनेक छोटे नेटवर्क मुहैय्ाा कराता  है। कोई भी व्य्ाक्ति अपने कम्प्य्ाूटर पर कमांड देकर दूरदराज के क्षेत्र्ा में रखे हुए कम्प्य्ाूटर पर कायर््ा कर सकता है। टेलनेट एक कमांड है जिसकी सहाय्ाता से कोई भी व्य्ाक्ति किसी दूसरी कम्प्य्ाूटर प्रणाली से जुड़कर उसका उसी प्रकार उपय्ाोग कर सकता है मानों वह उसके सामने बैठा हो। य्ादि आप इन्टरनेट पर किसी अन्य्ा कम्प्य्ाूटर से कोई फाइल प्राप्त करना चाहते हैं तो आप बेनाम एफटीपी का उपय्ाोग कर सकते हैं जिसका मतलब है फाइल ट्रांसफर प्रोटोकॉल।
य्ाहाँ हार्डवेय्ार भाग के बारे में विस्तार से बताने की आवश्य्ाकता नहीं है केवल उसकी झ्ालक भर उसके बारे में आम जानकारी और प्रय्ाुक्त आम शब्दावलिय्ाों की जानकारी देने के लिए पयर््ााप्त होगी। जैसा कि ऊपर बताय्ाा जा चुका है कि इन्टरनेट अनेक प्रणालिय्ाों से विभिन्न सम्पर्कों द्वारा जुड़ा होता है। सेतु दो स्थानीय्ा क्षेत्र्ा नेटवर्क खण्डों के बीच परिवहन संपर्क प्रदान करता है चाहे वे एक ही स्थान अथवा दूरदराज के स्थान में स्थित हों। य्ाह सेतु एक स्थानीय्ा क्षेत्र्ा नेटवर्क को दो अथवा अधिक खण्डों में विभाजित कर देता है जिससे सूचना य्ााताय्ाात का समग्र बहाव घट जाता है। रूटर स्थानीय्ा अथवा दूरदराज के स्थानीय्ा क्षेत्र्ा नेटवर्क को आपस में जोड़ देते हैं। वे एक खण्ड के भीतर आंकड़ों को पृथक् करते हैं अथवा उन्हें दूसरे खण्ड तक अग्रसारित कर देते हैं। सेतु एक सम्पर्क के उस पार केवल एक खण्ड तक अग्रसारित करने का काम कर सकते हैं। परन्तु रूटर दो से अधिक खण्डों को एक दूसरे से जोड़ सकते हैं। आमतौर पर नेटवर्क संय्ाोजन के लिए हब का इस्तेमाल किय्ाा जाता है जो किसी नेटवर्क के प्रबंधन और निय्ांत्र्ाण के लिए केन्द्रीय्ा बिन्दु का काम करते हैं। य्ाह एक संवेदनशील बिन्दु होता है क्य्ाोंकि सारी सूचना परिवहन हब से होकर ही गुजरती है वहां त्र्ाुटिय्ाों को खोजा जा सकता है तथा सूचना निकाली जा सकती हैं। हबों को अधिक नेटवर्क क्षमता प्रदान करने के लिए किसी भवन की ईटों के समान आपस में जोड़ा जा सकता है। गेटवेज स्थानीय्ा क्षेत्र्ा नेटवर्क वर्क स्टेशनों को मेजबान कम्प्य्ाूटर द्वारा प्रदान किए संसाधनों तक पहुंचने की अनुमति देता है। य्ाह मेजबान किसी दूरदराज के स्थान में हो सकता है जिस तक पहुंचने के लिए वाइड एरिय्ाा नेटवर्क सम्पर्क की आवश्य्ाकता हो सकती है।
आजकल हमे भारी भारी किताबों को ढोने की आवश्य्ाकता नहीं हैं। अनेकों प्रकाशन जैसे विश्वकोष पुस्तकें, जर्नल और पत्र्ािकाएं कम्प्य्ाूटर डिस्केट फ्लो अथवा सीडीµरोम के रूप में उपलब्ध हैं जिन्हें कम्प्य्ाूटर पर पढ़ा जा सकता है। य्ाहां तक कि अनेक प्रकाशन इन्टरनेट पर आनलाइन उपलब्ध हैं। ‘काम-काम’ भारत की पहली आनलाइन लोकप्रिय्ा विज्ञान पत्र्ािका है जो इन्टरनेट और विज्ञान प्रसार बुलेटिन बोर्ड सर्विस पर उपलब्ध है। अनेकों और आनलाइन प्रकाशन तेजी से आ रहे हैं।
विश्व भर में अनेकों संस्थानों द्वारा वैज्ञानिक विषय्ाों पर अनेक आंकड़ा संग्रह विकसित किए गए हैं। देश इस समय्ा विभिन्न नेटवर्कों के माध्य्ाम से बड़े पैमाने पर नेटवर्किंग के मार्ग पर अग्रसर है। राविप्रौसंप ने राष्ट्रीय्ा सूचना विज्ञान केन्द्र के सहय्ाोग से विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार सॉफ्टवेय्ार, हार्डवेय्ार और मानव संसाधन पर एकीकृत राष्ट्रीय्ा आंकड़ा संग्रह विकसित करने के लिए एक प्रय्ाोगिक प्राय्ाोजना प्रारंभ की है। प्रय्ाोगिक अवस्था में इस आंकड़ा संग्रह में दिल्ली और हरिय्ााणा को शामिल किय्ाा गय्ाा है। इसे पूरे देश में विस्तारित किय्ाा जा सकता है। वैज्ञानिक और औद्योगिक अनुसंधान परिषद् ने प्रेस को परिषद् की प्रय्ाोगशालाओं में हो रहे विभिन्न अनुसंधान एवं विकास कायर््ाों के बारे में जानकारी उपलब्ध कराने के लिए एक त्वरित सूचना सेवा (क्विक एक्सेस इन्फार्मेशन सर्विस) प्रारंभ की है। इसके अतिरिक्त पयर््ाावरण सूचना प्रणाली से पयर््ाावरण संबंधी विषय्ाों पर और कृषि सूचना प्रणाली से कृषि संबंधी विषय्ाों पर सूचनाएं प्राप्त की जा सकती हैं। विज्ञान प्रसार की विप्रिस सेवा से विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी से जुड़े विभिन्न विषय्ाों पर सूचनाएं प्राप्त की जा सकती हैं।
सांख्य्ा माध्य्ाम द्वारा शैक्षिक और विज्ञान संचार के उद्देश्य्ा से इसके उपय्ाोग की अपार संभावनाएं निहित हैं। हमारे दैनंदिन जीवन में कम्प्य्ाूटर जनित चित्र्ाों को अधिक संख्य्ाा में देखा जा सकता है। जैसे टेलीविजन पर (प्रतीक चिन्हों), व्य्ाावसाय्ािक विज्ञापनों में नाचते हुए फलों और दंत मंजन के ट्य्ाूब, फैंटेसी धारावाहिकों में आश्चयर््ाजनक प्रतिकृतिय्ाों के रूप में। कम्प्य्ाूटर की सहाय्ाता से तैय्ाार डिजाइनों, सजीव तसवीरों, ग्राफिक्स को तैय्ाार करने के लिए अनेक प्रकार की गणितीय्ा तकनीकों अथवा एलगोरिथ्म का विकास किय्ाा गय्ाा है। इसकी सहाय्ाता से त्र्ािविम (3 डी) आकृतिय्ाां भी बनाई जा सकती हैं।
इन्हें तैय्ाार करने के लिए नन्हें नन्हें बिन्दुओं से एक कम्प्य्ाूटर स्क्रीन की रचना की जाती है। य्ो बिन्दु किसी साइनबोर्ड पर लगे हुए बिजली के बल्ब के समान काम करते हैं। प्रत्य्ोक सूक्ष्म बिन्दु अथवा पिक्सेल को एक बल्ब की तरह बहुत तेजी से जलाय्ाा बुझ्ााय्ाा जा सकता है (एक सेकण्ड में दर्जनों बार) और स्क्रीन एक कैनवास तथा प्रकाश रंग का काम करता है। इस प्रकार पिक्चर ट्य्ाूब की चमकती हुई सतह पर कम्प्य्ाूटर एक प्रतिबिम्ब की रचना करता है। आपको बहुत ही रोमांच से भरपूर विज्ञान कथा फिल्म ‘जुरैसिक पार्क’ के बारे में य्ााद होगा जिसे देखने के लिए न केवल शहरी बल्कि अर्द्धशहरी तथा ग्रामीण क्षेत्र्ाों से भारी भीड़ उमड़ पड़ती थी। ‘जुरैसिक पार्क’ के डाय्ानासोर कम्प्य्ाूटर द्वारा तैय्ाार किए गए थे जो केवल सांख्य्ा प्रौद्योगिकी की सहाय्ाता से ही सम्भव हो पाय्ाा था। कम्प्य्ाूटर ग्राफिक्स का प्रय्ाोग करके विभिन्न प्रकार की कार्टून फिल्में बनाई जा रही हैं और उन्हें टेलीविजन पर दिखाय्ाा जा रहा है। वास्तविक य्ाथार्थता में चीजों को जिस तरह वे य्ाथार्थ रूप में पाई जाती हैं उसी रूप में प्रस्तुत करने की अपार संभावनाएं होती हैं। वास्तविक य्ाथार्थता हमें एक पूरी तरह से दूसरी दुनिय्ाा में ले जाती है। जहां हम अन्तरिक्ष में जाए बिना ही सागर की लहरों पर खेलते हुए महसूस कर सकते हैं। कम्प्य्ाूटर की सहाय्ाता से होने वाले पठन/शिक्षण अनुभव बहुत ही प्रभावशाली और रोचक साबित हो रहे हैं।
विकलांग व्य्ाक्तिय्ाों, विशेष रूप से दृष्टि बाधितों के बीच संचार हेतु इससे अतिरिक्त लाभ हैं। विभिन्न विदेशी भाषाओं में बहुभाषी टैक्स्ट टु स्पीच माड्य्ाूल उपलब्ध हैं। हाल में सी-डैक, पुणे ने विभिन्न भारतीय्ा भाषाओं में बहुआय्ाामी वाक् प्रणाली का विकास किय्ाा है। य्ो य्ाुक्तिय्ाां सांकेतिक प्राकृतिक बोलिय्ाों में बोलने वाले खिलौने से लेकर व्य्ाापक मूलपाठ और वाक् प्रणाली तक हो सकती हैं। सी-डैक, पुणे ने एक जिस्ट कार्ड भी विकसित किय्ाा है जिसकी सहाय्ाता से आप कम्प्य्ाूटर पर विभिन्न भाषाओं में काम कर सकते हैं। ‘ई-मेल’ संचार का एक चहेता साधन बन गय्ाा है। प्रत्य्ोक दिन लाखों लोग विश्व के एक कोने से दूसरे कोने तक इलेक्ट्रॉनिक मेल का आदान प्रदान करते हैं। प्रेषक के कम्प्य्ाूटर कुंजी पटल पर बटन दबाकर उसे प्राप्त करने वाले व्य्ाक्ति के कम्प्य्ाूटर तक भेज दिय्ाा जाता है। प्रत्य्ोक व्य्ाक्ति/संस्था की एक विशिष्ट ई-मेल पहचान होती है। सूचना प्रदान करने और उसका उपय्ाोग करने वालों के लिए य्ाह एक ऐसा माध्य्ाम प्रदान करता है जिसमें वितरण लागत घटकर शून्य्ा हो जाती है। कम्प्य्ाूटर संगोष्ठिय्ाों तथा आनµलाइन बातचीत के अतिरिक्त सांख्य्ा माध्य्ाम विचार विमर्श संचार चैनल की सुविधा भी उपलब्ध कराता है। ऑनलाइन बातचीत से अलग अलग महाद्वीपों में बैठे हुए समान रूचि वाले व्य्ाक्तिय्ाों के बीच आपस में संचार की सुविधा प्राप्त होती है। ऑनलाइन बातचीत का अवसर प्रदान करने वाली किसी विशिष्ट साइट खोल कर कोई भी व्य्ाक्ति कुंजी पटल को अथवा माउस की सहाय्ाता से अपने संदेश, प्रश्न, उत्तर, अवलोकन, विचार आदि टाइप करके उसी समय्ा विभिन्न भौगोलिक क्षेत्र्ाों के लोगों के साथ बातचीत करना प्रारंभ कर सकता है। य्ाह बातचीत कम्प्य्ाूटर मानीटर की स्क्रीन पर दिखाई देती है। दो से अधिक व्य्ाक्ति इस बातचीत में भाग ले सकते हैं इस प्रकार य्ाह बातचीत संगोष्ठी का रूप ले लेती है। आनलाइन वैज्ञानिक विचार विमर्श के आय्ाोजन की दृष्टि से इसमें अपार संभावनाएं हैं। इसके साथ ही सांख्य्ा संचार से अन्य्ा बहुत से तरीके सामने आ रहे हैं।
अब य्ाह संभावित माध्य्ाम हमारी दहलीज पर उपलब्ध है जिसमें विज्ञान और प्रौद्योगिकी संचार की अपार संभावनाएं निहित हैं। अब य्ाह हमारी बारी है कि हम देश के कोने कोने में लोगों तक विज्ञान और प्रौद्योगिकी संबंधी सूचनाएं और संदेश पहुंचाने में इसका अधिक से अधिक लाभ उठाएं। आइए हम विज्ञान संचार सांख्य्ा माध्य्ाम का अधिक से अधिक उपय्ाोग करने के उपाय्ा और तरीके ढूंढने का प्रय्ाास करें।
सांख्य्ा माध्य्ाम, सीडीµरोम डिजिटल वीडिय्ाो डिस्क, फ्लॉपी डिस्केट्स में भरी हुई वैज्ञानिक प्रौद्योगिकी सूचनाओं का अथाह सागर हमें उपलब्ध कराता है। य्ो सूचनाएं इंटरनेट पर कभी न समाप्त होने वाली धारा के रूप में हमें उपलब्ध होती हैं। कोई व्य्ाक्ति मूल पाठ, दृश्य्ा तथा श्रव्य्ा के रूप में विभिन्न प्रकार की वैज्ञानिक सूचनाएं प्राप्त कर सकता है। विभिन्न वैज्ञानिक विषय्ाों पर लोकप्रिय्ा विज्ञान लेख, पुस्तकें, पोस्टर आदि के रूप में विभिन्न प्रकार की सॉफ्टवेय्ार सामग्री तैय्ाार करने में इस सूचना का उपय्ाोग किय्ाा जा सकता है। य्ादि कापी राइटधारक ने समग्री के प्रय्ाोग के लिए छूट दे रखी हो तो ठीक है अन्य्ाथा कापीराइट सामग्री, वीडिय्ाो एवं आडिय्ाो सीडी की कतरन, ग्राफिक आदि का उपय्ाोग करते समय्ा सावधानी अवश्य्ा बरतनी चाहिए। इसे स्वय्ां अपने शब्दों शैली और खोजपत्र्ा तरीके से प्रस्तुत करना चाहिए ताकि कापीराइट निय्ामों का उल्लंघन न हो। सूचना के स्त्र्ाोत को साभार उल्लेख करना एक अच्छी प्रथा है। वांछित वैज्ञानिक विषय्ाों पर विभिन्न प्रकार के मल्टीमीडिय्ाा प्रस्तुतीकरण विकसित करने के लिए ऐसी सूचनाओं का उपय्ाोग किय्ाा जा सकता है। आप सांख्य्ा माध्य्ाम में फोटोग्राफ, रेखाचित्र्ा आदि भी प्राप्त कर सकते हैं। स्वय्ां अपनी सॉफ्टवेय्ार सामग्री विकसित करने में इनका उपय्ाोग किय्ाा जा सकता है जिसे ग्राफिक्स तथा दृश्य्ा सामग्री को शामिल करके दृश्य्ा रूप से और अधिक समृद्ध किय्ाा जा सकता है। आमतौर पर किन्हीं अन्य्ा पारंपरिक स्त्र्ाोतों से ताजे वैज्ञानिक विषय्ाों, जैसे मानव जीनोम को पढ़ पाने जैसी खोज आदि पर जानकारी प्राप्त करना कठिन होता है। ऐसी जानकारी इंटरनेट पर आसानी से प्राप्त की जा सकती है और ताजा जानकारी के आधार पर एक सूचनाप्रद और रोचक लेख रातोंरात तैय्ाार करके व्य्ाापक प्रचार प्रसार के लिए समाचार पत्र्ाों अथवा पत्र्ािकाओं में प्रकाशित किय्ाा जा सकता है। इसी तरह साइबरनेटिक्स पर जानकारी प्राप्त करके उसके आधार पर लोकप्रिय्ा लेख तैय्ाार किय्ाा जा सकता है। सांख्य्ा स्त्र्ाोतों से प्राप्त दृश्य्ा सामग्री का भी विभिन्न वैज्ञानिक विषय्ाों पर वीडिय्ाो/टीवी कायर््ाक्रम तैय्ाार करने में उपय्ाोग किय्ाा जा सकता जा सकती है। इस तरह सांख्य्ा माध्य्ाम अनेक प्रकार की सॉफ्टवेय्ार सामग्री तैय्ाार और विकसित करने में सूचना प्राप्ति का प्रमुख स्त्र्ाोत हो सकते हैं। य्ाह सॉफ्वेय्ार विभिन्न लक्ष्य्ा श्रोताओं की जरूरतों को पूरा कर सकते हैं। विभिन्न वैज्ञानिक विषय्ाों पर सीडी भी तैय्ाार की है। हाल ही में विज्ञान प्रसार ने पूर्ण सूयर््ा ग्रहण (खग्रास) की विभिन्न अवस्थाओं तथा इस खगोलीय्ा घटना के दौरान परिवर्तनशील जलवाय्ाुवीय्ा/पयर््ाावरणीय्ा परिस्थितिय्ाों को प्रदर्शित करने वाली एक सीडी तैय्ाार की है। य्ाह य्ााद रखना जरूरी है कि इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी का प्रामाणिक होना आवश्य्ाक नहीं है इसलिए इंटरनेट से प्राप्त जानकारी को प्राथमिक स्त्र्ाोत से सत्य्ाापित करना आवश्य्ाक है।
य्ाह एक विडम्बना है कि इंटरनेट पर भारतीय्ा वैज्ञानिक विषय्ावस्तु की काफी कमी है (हालांकि अन्य्ा जन संचार माध्य्ामों में भी स्थिति सुखद नहीं है)। नेट पर जो कुछ उपलब्ध है वह आमतौर पर विदेशों में डाली गय्ाी सूचनाएं हैं जो हो सकता है कि हमारी आवश्य्ाकताओं के लिए उपय्ाुक्त न हों। परन्तु स्वय्ां अपनी विषय्ावस्तु के अभाव में हम स्वदेशी जानकारी के स्थान पर विश्व सूचना का उपय्ाोग करने के लिए बाध्य्ा होते हैं। इसलिए इस बात की बहुत जरूरत है कि हम स्वदेशी अनुसंधान एवं विकास गतिविधिय्ाों पर सामग्री विकसित करें ताकि इन्हें विश्वभर में उपलब्ध कराय्ाा जा सके। विज्ञान और प्रौद्योगिकी सूचनाओं की वृद्धि में हम महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकते हैं।


(‘इलेक्ट्रॉनिकी आपके लिए’ जुलाई-अगस्त 2002)