तकनीकी

(04/Apr/2015)

रोबोट का रोचक संसार

प्रेमचन्द्र श्रीवास्तव

रोबोट का आविष्कार वास्तव में इस दृष्टि से किया गया कि ऐसे खतरनाक काम जो मनुष्य के लिए दुष्कर प्रतीत होते हैं, रोबोट आसान कर देंगे। अब तो तरह तरह के नए रोबोट बनाये जा रहे हैं जो मानवोपयोगी तो हैं ही अत्यंत रोचक भी हैं। उदाहरण के लिए ‘फूड क्रिटिक रोबोट’, ‘औसत विद्यार्थियों से कुशाग्र बुद्धि वाले रोबोट’, ‘बर्ड-रोबोट’, ‘चीता-रोबोट’, ‘पेंगुइन-रोबोट’, ‘बिल्ली रोबोट’,‘किरोबो’, ‘मांसपेशियों बाले रोबोट’, ‘रे-रोबोट’, ‘पर्सनल रोबोट-2’ और ‘आकार परिवर्तित करने वाला रोबोट’। रोबोट के नाना प्रकार , उनके संसार और उनके कार्य की विविधता हमें हैरत और रोमांच से भर देती है।

थाईलैंड के बाहर के देशों में थाईलैण्ड जैसा सुस्वादु भोजन न मिलने के कारण थाईलैण्ड के पूर्व प्रधानमंत्री यिंवलक शिंतवात्रा के मस्तिष्क में एक विचार कौंधा कि क्यों न एक ऐसी मशीन बनाई जाये जो थाईलैण्ड के वास्तविक ‘डिशेज’ की गुणवत्ता की जाँच कर सके। उनका विचार विचारों तक ही सीमित नहीं रहा वरन् उन्होंने एक फूड रोबोट का ही निर्माण कर डाला। वैसे इन दिनों कम्प्यूटर द्वारा भोजन की जाँच आम हो चुकी है और फूड रोबो इसकी अगली कड़ी है। पहले प्रायः ऐसा होता रहा था कि थाईफूड वास्तविक है या नहीं इसकी जाँच का कोई उचित तरीका नहीं था। विदेशी रेस्त्रां थाई फूड के नाम पर थाईफूड जैसा कुछ भी परोस देते थे। इससे चिंतित होकर उन्होंने (पूर्व प्रधानमंत्री ने) कैबिनेट की मीटिंग भी की। एक सैनिक विद्रोह से उनको अपनी सत्ता से हाथ धोना पड़ा किन्तु उनकी भोजन से संबंधित तत्कालीन सोच आज भी विदेशी राजनीति का हिस्सा बना हुआ है। पिछले दिनों बैंकाक के एक होटल में रात्रिभोजन के दौरान इस तथ्य का खुलासा किया गया कि क्यों न थाईलैण्ड के भोजन की गुणवत्ता के मानकीकरण के लिए रोबोट का इस्तेमाल किया जाये। राजनायिकों और संभ्रांत लोगों को यह देखने के लिए आमंत्रित किया गया कि वैज्ञानिक रूप से मशीन किस प्रकार थाईलेैण्ड की गुणवत्ता का मूल्यांकन कर सका है। उदाहरण के लिए थाई कुइसीन एक भली भाँति तैयार किए गए ‘ग्रीन करी’ ;ळतममद बनततलद्ध और एक नकली त्रुटिपूर्ण थाई बेसिल, करी पेस्ट और ताजे कोकोनट क्रीम के उचित मिश्रण में अंतर कर सके।
फूड रोबोट में दस सेंसर्स लगे हैं जो भोजन का भोजन का ‘केमिकल सिगनेचर’ तैयार करे हैं। इस केमिकल सिगनेचर की गोल्ड स्टैंडर्ड रेसिपी से तुलना की जाती है। गोल्ड स्टैण्डर्ड रेसिपी को स्वाद के 120 पारखी विशेषज्ञों ने प्रमाणित किया है। रोबोट में थाई डिश की सुगंध/महक जाँचने के लिए इलेक्ट्रॉनिक नोज (नाक) है जो 16 गैस सेंसरों की बदौलत काम करती है और एक इलेक्ट्रॉनिक टंग (जीभ) है जो खट्टे, मीठे, नमक, मसालों की जाँच करती है। फूड क्रिटिक रोबोट इनटेलिजेन्ट (बुद्धिमान/विचक्षण बुद्धि) रोबोट भोजन के स्वाद और सुगंध की सेंसर तकनीक के द्वारा जाँच कर सकता है। 67 मिलियन जनसंख्या वाले देश थाईलैंड में थाईडिश पकाने के विषय में 67 मिलियन विचार हो सकते हैं। फिर भी एक विचार पर सभी सहमत हैं कि निम्नकोटि का थाई फूड सभी के लिए अत्यधिक चिंता का विषय है। थाईलैण्ड की ‘नेशनल इन्नोवेशन एजेंसी’ थाई फूड के सुस्वाद होने के कार्यक्रम की इंचार्ज (कार्यप्रमुख) भी हैं। प्रबंधक सुरा-एस सुपाचट्टुरट के अनुसार 1 मिलियन डॉलर ($द्ध बजट का एक तिहाई डिसेज को सुस्वादु बनाने और ($द्ध 1 लाख डेलिशस मशीन को विकसित करने के लिए आवंटित किया गया है। उपरोक्त कार्यक्रम से आशा बलवती होती है कि निकट भविष्य में ‘फूड क्रिटिक रोबोटों’ की सहायता से विदेशों में थाई फूड की निश्चित रूप से गुणवत्ता में सुधार होगा। 

जापानी रोबोट विज्ञानियों को एक ऐसे कुशाग्र बुद्धि वाले रोबोट को बनाने में सफलता मिल गई है जो औसत बुद्धि वाले छात्र और छात्राओं की तुलना में उनसे अधिक बुद्धि का प्रदर्शन करने में सक्षम है। इस तथ्य का खुलासा तब हुआ जब जापान के एक कॉलेज की हाईस्कूल प्रवेश परीक्षा में औसत बुद्धि वाले विद्यार्थियों की तुलना में रोबोट ने अच्छा प्रदर्शन किया। ‘टो-रोबो’ नामक यह वास्तव में कृत्रिम तीव्र बुद्धि सॉफ्टवेयर (आर्टिफीशियल इन्टेलीजेन्स सॉफ्टवेयर) है। यह प्रवेश परीक्षा अंग्रेज़ी विषय की थी और तो और, पिछले 12 वर्षों में इस रोबोट ने अपने स्कोर को दोगुना करके प्रदर्शित किया है। इस रोबोट को बनाने वाले शोधकर्ताओं को आशा है कि निकट भविष्य में शीघ्र ही यह रोबोट टोकियो विश्वविद्यालय की प्रवेश परीक्षा में भी सफल प्रदर्शन करेगा। टोकियो यूनिवर्सिटी जापान की सर्वाधिक प्रतिष्ठित यूनिवर्सिटी है। जापान में हाईस्कूल में अंग्रेज़ी सेक्शन में जापानी विद्यार्थियों का औसत स्कोर 93ण्1 था जबकि इसी सेक्शन में रोबो का स्कोर 95 था।  जापान की इस रोबोट को विकसित कर रही कम्पनी का नाम ‘निप्पोन टेलीग्राफ एंड टेलीफोन’ है। इस प्रोजेक्ट पर 2011 में कार्य का प्रारंभ हुआ था। बनाने वाले का निश्चित मत है कि ये रोबोट मनुष्यों के कार्य में पूरक की भूमिका निभायेंगे और जापान को उत्तरोत्तर प्रगति पथ पर ले जाने की महत्वपूर्ण भूमिका निभायेंगे। जापान का यह कदम निश्चित रूप से स्वागत योग्य है । 

बर्ड रोबोट लंदन से प्राप्त एक सूचना के अनुसार एक डच डिज़ाइनर ने एक ऐसे रोबोट की डिज़ाइन बना दी है जो देखने में बिल्कुल चिड़ियों के समान है। ये ‘रोबोटिक बर्डड्स’ चिड़ियों की भाँति आसमान में उड़ती हैं। इसके लिए रिमोट कंट्रोल की आवश्यकता होती है। हम सभी जानते हैं कि चिड़ियाँ देखने में खूबसूरत होती हैं और ये रोबोट भी खूबसूरत दिखते हैं। ये ‘रोबबर्ड्स’ वास्तव में क्लियर फ्लाइट सोल्यूशन्स इन द नीदरलैण्ड्स में  निको निजेनहल्स ;छपरमदीनसेद्ध के मस्तिष्क की उपज हैं। यह उपद्रवी या चोट करने वाले चिड़ियों के आधिक्य से होने वाली क्षति में अड़चन पैदा करते हैं। ‘रोब बर्ड्स’ उड़ने के लिए अपने पंखों को फड़फड़ाते हैं, इससे वे अनोखे रूप से वास्तविक चिड़ियों के समान होते हैं। जैसा कि पहले कहा गया है चिड़ियाँ खूबसूरत और आकर्षक होती हैं, किन्तु उड़ते हुए वायुयानों को क्षतिग्रस्त करने वाली होती हैं अतएव सुरक्षा के लिए ख़तरनाक होती हैं। बर्ड रोबोट को बनाने वालों का मानना है कि ये रोबोट ‘पर्यावरण मित्र’ ;म्दअपतवदउमदजंस तिपमदकसलद्ध होने के नाते वास्तविक चिड़ियों से संबंधित समस्याओं के समाधान के रूप में उपयोगी हैं और चिड़ियों द्वारा वायुयानों को दुर्घटनाग्रस्त होने से बचाने में निश्चित रूप से कारगर सिद्ध होंगे। 
अभी तक मानव आकृति से मिलते जुलते मानवोपयोगी रोबोट बनाये जा रहे थे और बनाये भी जा रहे हैं, पर चौंकिए नहीं अब रोबोट विज्ञानी रोबो-चीता, रोबो-बिल्ली और रोबो-पेंगुइनों को बनाने में भी सफलता प्राप्त कर चुके हैं। मानव द्वारा निर्मित रोबो-चीता अब वास्तविक चीते से टक्कर ले सकता है। इस रोबो-चीता की डिज़ाइन वास्तविक चीते जैसी ही है। इसकी विशेषता यह है कि यह रोबो असली चीते जैसी छलांग भी लगा सकता है। इस रोबो-चीते को बनाकर अमेरिका की ‘मेसायुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी’ के शोधार्थियों ने कमाल ही कर दिया है। उन्होंने इस रोबो-चीते का सबसे आधुनिकतम प्रारूप प्रस्तुत किया है। इंडोर ट्रैक पर इसकी गति 10 मील प्रति घंटा है, किन्तु वैज्ञानिक आशावान हैं कि भविष्य में इसकी दौड़ने की गति 30 मील प्रतिघंटा अर्थात् तीन गुनी हो जायेगी। इस रोबो-चीते की विशेषता यह है कि यह अन्य चीतों की तरह भारी भरकम और सुस्त नहीं है। यह चुस्त, गतिशील और स्थिर है। एक सूचना के अनुसार शिकागो में आयोजित होने वाली ‘इण्टरनेशनल कान्फ्रेंस ऑन इंटेलीजेंट रोबोट एंड सिस्टम’ के अवसर पर इस रोबो-चीते के प्रदर्शन की बात भी कही गई थी। यह अभी भविष्य के गर्त में है कि रोबो-चीते से किस तरह के काम लिए जायेंगे। पर जो कुछ हो रहा है वह मानवता के हित में ही होगा। 

दक्षिणी ध्रुव अंटार्कटिक में पाये जाने वाले पेंगुइन अत्यंत सीधे, शर्मीले होते हैं और मनुष्यों को देखकर कुछ डर से जाते हैं। वे मनुष्यों से दूर भागने के कारण ही पेंगुइनों पर शोध करने वाले उनके स्वभाव, स्वास्थ्य और दबाव स्तर स्ट्रेस आदि के विषय में अधिक जानकारी नहीं जुटा पा रहे हैं। उपरोक्त समस्याओं को ध्यान में रखते हुए फ्रांस के स्ट्रासबर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानियों ने एक अनोखे तरीके का पता लगाने में सफल हो गए हैं। शोधार्थियों ने दल के नेता वेवन ले माहो के निर्देशन में एक रोबो-पेंगुूइन तैयार करने में सफलता प्राप्त कर ली है । इस रोबो-पेंगुइन के फर का रंग स्लेटी और पंखों का रंग काला,सफेद होता है। यह रोबो पेंगुइन धीरे से वास्तविक पेंगुइनों के बीच में पहुँच जाता है और वह भी वास्तविक पेंगुइनों को बिना कोई तकलीफ पहंुचाये हुए। रोबो पेंगुइनों में लगे रेडियो टैग के माध्यम से असली पेंगुइनों के स्वभाव,स्वास्थ्य और स्ट्रेसस्तर की जानकारियों के संकेत देते हैं, जिनसे विज्ञानी पेगुइनों के संबंध में उपरोक्त जानकारियाँ प्राप्त कर ले रहे हैं। इस शोध से अन्य चिड़ियों और प्राणियों के विषय में उन्हीं जैसे रोबोटो के द्वारा उनके अध्ययन की सुविधा जुटा सकेंगे। 

वाशिंगटन से प्राप्त एक समाचार के अनुसार विज्ञान इस दिशा में प्रयासरत हैं कि रोबोट को कैसे विल्लियों जैसे सहज बना दिए जायें। हम सभी ने देखा है कि बिल्लियाँ जब कूद फाँद करती हैं तो सदैव अपने पंजों पर ही गिरती हैं। बिल्लियों के कूदने के बाद अपने पंजों पर ही गिरने की इसी कला को विज्ञानी रोबोटों में भी विकसित करना चाहते हैं। जार्जिया में स्थित ‘टेक स्कूल ऑफ़ इंटरएक्टिव कम्प्यूटिंग’ में शोधार्थी बिल्ली के कूदने और उछलने की कला पर कार्यरत हैं। यहॉँ एक तथ्य का उल्लेख करना समीचीन होगा कि मनुष्यों को कूदने या उछलने की ‘लैंडिंग’ की ‘ट्रेनिंग’ देनी पड़ती है पर बिल्लियाँ बिना किसी ट्रेनिंग के इस कला में माहिर होती हैं। यदि बिल्ली रोबोटों में इस कला को विकसित करने में सफलता प्राप्त हो गई तो ऐसे रोबोटों से ढेर सारे काम लेने में सुविधा हो जायेगी । 

किरोबो एक विशेष प्रकार का रोबोट है। यह विश्व का पहला बोलने वाला रोबोट है। ‘किरोबो’ जापानी भाषा का शब्द है। यह दो शब्दों कियो और रोबो से मिल कर बना है। जापानी भाषा में ‘कियो’ का मतलब है उम्मीद। अतएव ‘किरोबो’ का मतलब हुआ उम्मीद वाला रोबोट। अंतरिक्ष यात्री किरोबो अपने सहयात्री कोइची वाकाटा के वापस पृथ्वी पर आने के बाद से अकेला हो गया है और किरोबो की उदासी का कारण यही अकेलापन है। इस रोबो का निर्माण ‘रोबोट यूनिवर्सिटी ऑफ़ टोकियो’ और जापानी अंतरिक्ष यात्री तोमोकाता ताकाहाशी ने संयुक्त रूप से किया था। इसे वर्ष 2013 के अगस्त में अंतरिक्ष में भेजा गया था यह देखने के लिए कि यह कितने लम्बे समय तक अंतरिक्ष में रहने वाले अंतरिक्ष यात्रियों के लिए भावनात्मक रूप से कितना सहारा बन सकता है। किरोबो का भार मात्र एक किलोग्राम है। यह केवल जापानी भाषा ही बोलता है। किन्तु इसकी जो खासियत है वह यह कि आवाज़ और चेहरा भी पहचानता है। कई तरह की हरकतें कर सकता है और वीडियो रिकॉर्डिंग करने में भी सक्षम है। किरोबो का एक जुड़वा रोबोट ‘मिराटा’ पृथ्वी पर है। ‘मिराटा’ ‘किरोबो’ के अंदर यदि कोई इलेक्ट्रॉनिक गड़बड़ी हो रही है तो उसकी भी निगरानी करता है। किरोबो की डिज़ाइन की बात भी काफी दिलचस्प है क्योंकि इसकी डिज़ाइन प्रसिद्ध कार्टून चरित्र ‘एस्ट्रो बॉय’ से ली गई हैं। इस प्रकार के अंतरिक्ष यात्री,बोलने वाले और कुछ कार्यों का सम्पादन करने वाले रोबोटों से भविष्य में बड़ी आशाएँ हैं। 

मांसपेशियों वाले रोबोट इलिनोय यूनिवर्सिटी के एक प्रोजेक्ट के तहत भारतीय मूल के विज्ञानी राशिद बशीर और उनके दल ने मांसपेशियों वाले नन्हें रोबोट बना कर रोबोट विज्ञान के संसार में तहलका मचा दिया है । इन नए नन्हें रोबोटों को ‘बायो बॉट्स’ मांसपेशी की कोशिकाओं (सेल्स) की शक्ति से चलाया जाता है । ‘बायो बॉट्स’ विद्युतीय तरंगों से नियंत्रित होते हैं। इसकी खूबी के कारण शोधार्थी इसमें काफी दिलचस्पी ले रहे हैं क्योंकि इस पर पूरा नियंत्रण रखा जा सकता है।
विज्ञानी राशिद बशीर का कहना है कि किसी भी जैविक मशीन को कोशिकाओं से चलाया जा सकता है। इस नन्हें रोबोट का बनना जीवविज्ञान और अभियांत्रिकी-दोनों विज्ञानों के गठजोड़ से संभव हुआ है। अभी तो राशिद बशीर मात्र एक सेंटीमीटर के बायो बॉट्स थ्रीडी पिंटर की मदद और हाइड्रोर्जेल्स से बनाने में सफल हुए हैं। यदि ऐसे और बड़े-बड़ंे रोबोटों को बनाना संभव हो गया तो रोबोट विज्ञान और उसके माध्यम से चिकित्सा विज्ञान में तो क्रांति ही आ जावेगी। भविष्य उज्ज्वल है। 

बढ़ती मानव जनसंख्या के साथ कारों की संख्या भी तेज़ी से बढ़ती जा रही है। दुनिया के लगभग सभी देशों में कारों की पार्किंग की समस्या बढ़ती जा रही है। लोग अपनी सुविधा को ध्यान में रखते हुए कारों को ऐसी जगहों में खड़ा कर देते हैं, जिससे अन्य लोगों को असुविधा होती है। रोबो विज्ञानियों में इस समस्या का समाधान ढूॅँढ़ निकाला है। वर्तमान में ही क्या पार्किंग सदैव समस्या रही है। किन्तु अब एक ऐसा रोबोट तैयार कर लिया गया है जो आपकी कार को उठाकर मनचाही जगह पर पार्क (खड़ी) कर देगा। जर्मनी के हजलडॉर्क एअरपोर्ट पर एक प्रयोग प्रारंभ किया गया है जो इस विशेष रोबोट से संबंधित है। प्रायः लोग एअरपोर्ट के गेट पर कार छोड़ देते हैं। ‘रे-रोबोट’ नामक यह रोबोट गाड़ी को उठाकर पार्किंग स्थल में खड़ी कर देता है। यह पूरी प्रणाली एअरपोर्ट के फ्लाइट डाटा से संलग्न रहती है। इस प्रणाली में यात्री की यात्रा की जानकारी भी उपलब्ध रहती है। यदि किसी बदलाव की आवश्यकता हो तो ‘एप’ में जाकर किया जा सकता है। किन्तु यह सुविधा फ्री (निःशुल्क) नहीं है। इसके लिए एअरपोर्ट अधिकारी को चार यूरो प्रतिघंटा देना पड़ता है।  

वैसे तो अनेक ऐसे रोबोटों का निर्माण हो चुका है जो अनेक खतरनाक कार्यों को अंजाम देने में माहिर हैं, किन्तु विज्ञानियों को एक ऐसा रोबोट बनाने में सफलता मिल गई है जो आपके गंदे कपड़े धो सकता है। इस रोबोट में अनेक खूबियाँ हैं। यह स्वयं गंदे कपड़ों को ढँूॅढ़ सकता है,इस रोबोट से कपड़ों को पहचानने की क्षमता है। और तो और कपड़ों को धुलने के बाद तह करके उन्हें सही जगहों पर रख भी सकता है । यह रोबोट कैलिफोर्निया यूनिवर्सिटी के शोधार्थियों के मस्तिष्क की उपज है। साफ्टवेयर और हार्डवेयर बनाने वाली रोबोटिक्स रिसर्च लैब विबोगैरज ने इसे निर्मित किया है। इस रोबोट का नाम ‘पर्सनल रोबोट-2’ है और उसका मूल्य दो लाख अस्सी हज़ार (2ए80ए000) डॉलर है। यह रोबोट मानव की आकृति का है। इसकी दो बाहें हैं और सामने की ओर स्क्रीन हेड है। इस रोबोट के निर्माण का कार्य सन् 2010 से चल रहा था जो अब फलीभूत हुआ है। शोधकर्ता सिद्धार्थ श्रीवास्तव और उनके दल ने अपने इस रोबोट पर एक शोधपत्र भी लिखा है जिसमें इस रोबोट को बास्केट से कपड़े निकाल कर वाशिंग मशीन में डालते दिखाया गया है। कपड़े धुलने वाला यह रोबोट है बड़े काम का। आशा की जानी चाहिए कि निकट भविष्य में इन रोबोटो के मूल्य में कमी लाई जायेगी ताकि उपयोग के लिए उपलब्ध हो सके। 

मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ़ टेक्नोलॉजी के वैज्ञानिकों ने एक सर्वथा अनूठे ऐसे रोबोट को बनाने में संलग्न हैं जो अपना आकार परिवर्तित कर सकता है, क्षतिग्रस्त होने पर स्वयं अपनी मरम्मत भी कर लेगा और द्रव अवस्था से ठोस अवस्था में बदल सकेगा। यही नहीं, इस विशेषता के कारण संकरे स्थानों से गुजर कर पुनः अपने वास्तविक आकार में आ जायेगा। जिन्होंने टर्मिनेटर-2: जजमेंट डे’ फिल्म देखा है वे इस रोबोट का अनुमान लगा सकते हैं। शोधार्थियों ने मोम (वैक्स) से एक ऐसे पदार्थ को बना लिया है जो मुलायम और कठोर/सख्त अवस्थाओं में रह सकता है । इस पदार्थ से लगभग उसी तरह का रोबोट बनाया जा सकता था जैसा कि उपरोक्त फिल्म में रूप बदलने वाले टी-1000 रोबोट दिखाये गए हैं। ये रोबोट सस्ते होंगे । लेकिन कार्य में उसी प्रकार दक्ष होंगे जैसा फिल्म में दिखाया गया है । इस रोबोट का विकास एनेट होसल ;।दमजजम भ्वेंसद्ध जो मैसचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नॉलॉजी में मेकैनिकल इंजीनियरिंग और गणित के प्रोफेसर हैं, ने किया हैं। इसका इस्तेमाल विकृत सर्जिकल रोबोटों के पुननिर्माण में किया जायेगा। यह शरीर के भीतर प्रवेश करके घूम कर निर्दिष्ट स्थान पर पहुँच सकेगा, वह भी बिना किसी अंग अथवा रक्तवाहिनियों की माँॅग के। इन रोबोटों को मलबे की खोज अथवा बचाव कार्य के लिए भी प्रयोग में लाया जा सकता है। मलबे में दबा व्यक्ति यदि जीवित है तो उसे भी ये रोबोट बचा सकते हैं। शोधार्थियों ने रोबोट विज्ञान की एक कम्पनी ‘बोस्टन डायनामिक्स’ के साथ भी प्रयोग के लिए बनाए जाने वाले पदार्थ को विकसित करने का कार्य करने के लिए डिफेन्स एडवान्स्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी के तहत केमिकल रोबोट्स प्रोग्राम प्रारंभ किया है। ऐजेंसी की रुचि ऐसे रोबोटों में थी जिनमें संकरे दरारों से होकर भी गुजरने की क्षमता हो और पुनः फैल कर एक दिए हुए क्षेत्र में विचरण कर सकें। लगभग वैसे ही जैसे ऑक्टोपस (समुद्री जीव) अपने शरीर को संकुचित और पुनः फैलाने में सक्षम होता है। यही नहीं, उसमें (रोबोट में) अपने इर्द गिर्द पर दबाव डालने की योग्यता भी हो। क्योंकि आप जेल-0 ;श्रमसस.0द्ध के एक गंेद को जेल-0 की जोड़ तोड़ या हेर फेर से एक वस्तु को नहीं बना सकते हैं। इसका केवल विकृत हो जायेगा । बिना दबाव डाले उस वस्तु को हिला नहीं सकते हैं ऐसा अनीन होसेल का कहना है। किसी मुलायम वस्तु को व्यवस्थित करना अत्यंत कठिन कार्य होता है। यह कहना अत्यधिक दुष्कर होगा कि पदार्थ (जेल-0) किस तरह से गतिशील होगा और किस तरह का आकार यह ग्रहण करेगा। इसलिए शोधार्थियों ने निर्णय लिया कि यह मात्र एक रूप ही यह बना सकता है। इससे एक रूप बदलने वाला रोबोट बनाया जा सकता है जो मुलायम और ठोस में परिवर्तित हो सके। 

एक सिर दो हाथ, दो पैर और पैरों में लाल रंग के फैशनेबल जूते पहने हुए एक ह्यूमैन्वायड रोबोट लास एंजिलीस के अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर जर्मनी की यात्रा के लिए हवाई जहाज पर बैठने आया तो यात्रियों के मध्य थोड़ी हलचल मचनी स्वाभाविक थी। यह घटना दिसम्बर 2014 की हेै। एथीना नामक यह रोबोट हवाई जहाज से यात्रा करने वाला विश्व का ऐसा प्रथम यात्री है जिसने अन्य यात्रियों की भाँति टिकट भी लिया था। इसके पूर्व रोबोटों की हवाई यात्रा मात्र उपकरणों के रूप में ही होती थी। इस महिला रोबोट ने टॉम ब्रैडले इण्टरनेशनल टर्मिनल पर एक नाटकीय दृश्य उपस्थित कर दिया। उसके परिचारकों ने उसे एक व्हील चेयर में फ्रैंकफर्ट का टिकट लेने के लिए लुफ्थान्सा काउन्टर पर धक्का देकर पहँुॅचा दिया था। व्हील चेयर में बैठी एक ‘मानवीय’ आकृति ने अपने रूप की विभिन्नता से सभी को चौका दिया। टेलीविजन के सदस्य और अन्य फोटोग्राफर शोर करते हुए चिल्ला पड़े ‘‘अरे ! यह तो रोबोट है’’।
इस महिला रोबोट ‘एथीना’ को बनाने वाली कम्पनी का नाम है-साल्ट लेक सिटी इंजीनियरिंग एण्ड रोबोटिक्स कम्पनी सारकोस। एथीना को जर्मनी की मैक्स प्लांक सोसायटी, जो यूनिवर्सिटी ऑफ सदर्न कैलिफोर्निया के शोधार्थियों के साथ इस रोबोट से ख़तरनाक कार्य करने के परीक्षण में लगे हुए हैं उदाहरण के लिए उस प्रकार के नाभिकीय दुर्घटना के समय नाभिकीय कचरे को साफ करना जैसी फुकुशिमा,जापान में दुर्घटना हुई थी। एयरपोर्ट से मैक्स प्लांक के एक डॉक्टोरेट के विद्यार्थी एलेक्जेंडर हेरज़ॉग ने उसे हवाई जहाज़ से एयर पोर्ट पर उतारते समय कहा- ‘हम नहीं चाहते कि नाभिकीय दुर्घटना के स्थल पर मनुष्य जायें और अपनी जान ख़तरे में डालें।’ आगे बोलते हुए एलेक्जेण्डर ने कहा-‘मैं चाहूँगा कि एक रोबोट इस कठिन कार्य को करे।’’ एथीना के पास साधारण टिकट था पर उसने विशेष व्यवहार का आनन्द उठाया,जिसमें प्रथम श्रेणी के टिकट की पंक्ति में आगे शामिल होना है। 

आई रोबो कम्पनी ने किया यह है कि सफाई करने वाले एक अत्यन्त लोकप्रिय रोबोट, ‘रूमबा रोबोट’ का निर्माण कर लिया है। यही नहीं, इस कम्पनी ने ‘रूमबा रोबोट’ का नया संस्करण भी तैयार कर लिया है और उसे बज़ार में भी ले आने में सक्षम हो गई है।     

अमेरिका की ‘आई रोबो कम्पनी’ ने एक ऐसा रोबोट तैयार किया है जो उन किशोरों का सपना होता है कि इण्टरनेट के माध्यम से रोबोट को डाउनलोड करने के बाद प्रिन्ट और बस रोबोट को तैयार कर लेते। किशोरों का यह सपना अब उपरोक्त कम्पनी ने साकार कर दिया है।
आई रोबो कम्पनी ने किया यह है कि सफाई करने वाले एक अत्यन्त लोकप्रिय रोबोट, ‘रूमबा रोबोट’ का निर्माण कर लिया है। यही नहीं, इस कम्पनी ने ‘रूमबा रोबोट’ का नया संस्करण भी तैयार कर लिया है और उसे बज़ार में भी ले आने में सक्षम हो गई है।     
‘रूमबा रोबोट’ की डिज़ाइन ऐसी है जिसके कारण 3 डी प्रिंटर की सहायता से उसे तैयार किया जा सकता है । लेकिन इस रोबो को डाउन लोड करने के लिए मोटर और सर्किट बोर्ड को बाहर से स्वयं लाना होगा। वैसे इस कमी को दूर करने के लिए कम्पनी दृढ़ संकल्प है और ज़ोर शोेर से प्रयासरत है। यदि कम्पनी उपरोक्त कमी को पूरा कर लेगी तो किशोरों में यह रोबोट कितना लोकप्रिय होगा, इस समय केवल इसकी कल्पना ही की जा सकती है। 
        

‘अनुकम्पा’, वाई 2सी, 115ध्6,त्रिवेणीपुरम्, झूॅँसी
इलाहाबाद-211019, उ.प्र.